जन्म से ही कई दुर्लभ शारीरिक गड़बड़ियों के साथ दुनिया में आई एक साल की बच्ची के लिए सामान्य जीवन जीना लगभग असंभव माना जा रहा था। उसके शरीर में दो गर्भाशय, दो योनियां और मूत्र, प्रजनन व मल त्याग के लिए केवल एक ही साझा रास्ता था। लेकिन फरीदाबाद के डॉक्टरों की महीनों की मेहनत और जटिल सर्जरी ने इस मासूम को नई जिंदगी दे दी। यह मामला अब देश के सबसे दुर्लभ मेडिकल मामलों में गिना जा रहा है।
Faridabad medical miracle
जन्म से ही थी बेहद दुर्लभ बीमारी
डॉक्टरों के अनुसार बच्ची 'कॉमन क्लोअका' नामक दुर्लभ जन्मजात विकार से पीड़ित थी। इस स्थिति में शरीर के मूत्र मार्ग, प्रजनन अंग और आंत अलग-अलग विकसित होने के बजाय एक ही चैनल में मिल जाते हैं। मामला इसलिए और भी असाधारण था क्योंकि बच्ची के शरीर में दो गर्भाशय और दो योनियां भी मौजूद थीं। इसके साथ ही बड़ी आंत में भी गंभीर जन्मजात विकृति पाई गई थी, जिससे उसकी शारीरिक संरचना सामान्य बच्चों से बिल्कुल अलग थी। यह बीमारी करीब 50 हजार बच्चों में से किसी एक में देखने को मिलती है, जबकि इतने सारे विकारों का एक साथ होना बेहद दुर्लभ माना जाता है।
जांच में सामने आई हैरान करने वाली सच्चाई
बच्ची की स्थिति को समझने के लिए डॉक्टरों ने एमआरआई स्कैन और कई एडवांस एंडोस्कोपिक जांचें कीं। रिपोर्ट में पता चला कि उसके शरीर में दो अलग-अलग गर्भाशय, दो योनि मार्ग और मूत्र तथा आंतों की जटिल संरचना मौजूद है। डॉक्टरों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि किसी भी अंग को नुकसान पहुंचाए बिना शरीर के सभी सिस्टम को अलग-अलग और सामान्य तरीके से काम करने लायक बनाया जाए। इसके लिए बाल शल्य चिकित्सकों, एनेस्थीसिया विशेषज्ञों और अन्य डॉक्टरों की एक बड़ी टीम ने विस्तृत योजना तैयार की।
घंटों चली जटिल सर्जरी, फिर मिला नया जीवन
विशेषज्ञों ने लंबी और बेहद जटिल रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी को अंजाम दिया। ऑपरेशन के दौरान नया मलद्वार बनाया गया, मूत्र मार्ग का पुनर्निर्माण किया गया और प्रजनन अंगों की संरचना को भी सावधानीपूर्वक व्यवस्थित किया गया। डॉक्टरों ने दोनों योनि मार्गों को सुरक्षित रखते हुए शरीर के अलग-अलग सिस्टम के लिए स्वतंत्र रास्ते तैयार किए। यह प्रक्रिया तकनीकी रूप से बेहद कठिन थी क्योंकि बच्ची की उम्र केवल एक साल थी और शरीर के अंग बेहद नाजुक अवस्था में थे।
अब सामान्य बचपन की उम्मीद
सर्जरी के बाद बच्ची की हालत में लगातार सुधार देखा गया और वह डॉक्टरों की निगरानी में स्वस्थ हो रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते किए गए इस इलाज से उसके भविष्य में सामान्य जीवन जीने की संभावनाएं काफी बढ़ गई हैं। डॉक्टरों के मुताबिक यह सफलता आधुनिक बाल शल्य चिकित्सा और टीमवर्क की बड़ी मिसाल है। वहीं बच्ची के परिवार के लिए यह किसी चमत्कार से कम नहीं, क्योंकि अब उनकी बेटी के सामने एक बेहतर और स्वस्थ भविष्य की उम्मीद जग चुकी है।
