कर्नाटक कैबिनेट विस्तार और डीके शिवकुमार। | Source: Chrome

कर्नाटक कैबिनेट विस्तार और डीके शिवकुमार।Source : Chrome

कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के कैबिनेट विस्तार के बाद पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। मंत्रियों की सूची में अंतिम समय पर हुए बदलाव, कई दावेदारों की अनदेखी और समर्थकों के विरोध ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। कैबिनेट गठन के बाद अब पार्टी के अंदर नाराजगी, इस्तीफों की चेतावनी और विरोध प्रदर्शन ने नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

अंतिम समय में बदली मंत्रियों की सूची

करीब दो महीने तक चली चर्चाओं और पार्टी नेतृत्व के साथ मंथन के बाद कैबिनेट विस्तार को अंतिम रूप दिया गया। हालांकि, सोमवार को जारी पहली सूची में कुछ ही देर बाद बदलाव कर दिया गया। शुरुआती सूची में शामिल एक नाम हटाकर उसकी जगह दूसरे वरिष्ठ नेता को शामिल किया गया। इस बदलाव ने पार्टी के भीतर नई बहस छेड़ दी।

कैबिनेट में जगह न मिलने पर बढ़ी नाराजगी

मंत्रिमंडल में स्थान नहीं मिलने से कई नेताओं और विधायकों में असंतोष देखने को मिला। विधायक यशवंत रायगौड़ा पाटिल ने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा सौंप दिया, जबकि कुछ अन्य नेताओं के भी इसी तरह का कदम उठाने की चर्चा है।

समर्थकों ने किया विरोध प्रदर्शन

कैबिनेट से बाहर रह गए नेताओं के समर्थकों ने कई जगह विरोध प्रदर्शन किया। विधायक प्रिया कृष्णा और तनवीर सैत के समर्थकों ने भी फैसले के खिलाफ नाराजगी जताई। इससे साफ संकेत मिला कि पार्टी के भीतर कई वर्ग इस विस्तार से संतुष्ट नहीं हैं।

दिनेश गुंडू राव ने भी जताई निराशा

वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिनेश गुंडू राव ने सार्वजनिक रूप से मंत्रिमंडल में जगह न मिलने पर निराशा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि वर्षों तक पार्टी और राज्य की सेवा करने के बावजूद उन्हें मौका नहीं दिया गया और फैसले की वजह भी नहीं बताई गई। इसके बावजूद उन्होंने पार्टी और जनता के लिए काम जारी रखने की बात कही।

परिवार की प्रतिक्रिया भी बनी चर्चा

दिनेश गुंडू राव की पत्नी तब्बू राव ने भी सोशल मीडिया पर पार्टी के फैसले पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि नियुक्तियों में योग्यता से ज्यादा अन्य समीकरणों को महत्व दिया गया, जिससे यह मुद्दा और चर्चा में आ गया।

कुछ समुदायों में भी दिखी नाराजगी

कैबिनेट में कुछ प्रमुख चेहरों को शामिल नहीं किए जाने से कई समुदायों में भी असंतोष देखने को मिला। खासकर कोडवा समुदाय के बीच यह चर्चा रही कि लंबे समय बाद भी उन्हें मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाया।

CM और वरिष्ठ नेताओं की पसंद भी नहीं चली?

सूत्रों के अनुसार, अंतिम सूची में शामिल कुछ नामों को लेकर मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार भी पूरी तरह संतुष्ट नहीं थे। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के करीबी माने जाने वाले कुछ नेताओं को भी मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली। इससे माना जा रहा है कि अंतिम फैसला केंद्रीय नेतृत्व ने विभिन्न स्तरों पर लंबी चर्चा और लॉबिंग के बाद लिया।

कैबिनेट गठन के बाद भी जारी है सियासी हलचल

मंत्रियों की सूची जारी होने के कुछ ही घंटों के भीतर बदलाव, विरोध, इस्तीफे और सार्वजनिक नाराजगी ने साफ कर दिया कि कैबिनेट विस्तार के बाद भी कांग्रेस के भीतर सब कुछ सामान्य नहीं है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि पार्टी नेतृत्व इन नाराज नेताओं और कार्यकर्ताओं को किस तरह साधता है।