कर्नाटक सरकार ने इंजीनियरिंग शिक्षा की गुणवत्ता और छात्रों की रोजगार क्षमता को लेकर चिंता जताते हुए एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। समिति यह जांच करेगी कि इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने वाले केवल 17 प्रतिशत छात्र ही नौकरी के लिए उपयुक्त क्यों माने जा रहे हैं। सरकार का उद्देश्य इस समस्या के कारणों की पहचान कर सुधार के लिए ठोस सुझाव तैयार करना है।

इंजीनियरिंग शिक्षा की गुणवत्ता पर उठे सवाल

सरकार के अनुसार बड़ी संख्या में इंजीनियरिंग स्नातक डिग्री हासिल करने के बावजूद उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप कौशल विकसित नहीं कर पा रहे हैं। विशेषज्ञ समिति पाठ्यक्रम, शिक्षण पद्धति उद्योगों से जुड़ाव और स्किल डेवलपमेंट जैसे पहलुओं की समीक्षा करेगी ताकि छात्रों की रोजगार क्षमता बढ़ाई जा सके।

AICTE ने 58 इंजीनियरिंग कॉलेज बंद करने की दी अनुमति

इसी बीच, इंजीनियरिंग कॉलेजों की निगरानी करने वाली संस्था ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (AICTE) ने इस वर्ष देशभर में 58 इंजीनियरिंग कॉलेजों को बंद करने की अनुमति दे दी है। माना जा रहा है कि कम दाखिले, घटती गुणवत्ता और अन्य शैक्षणिक चुनौतियों के कारण यह फैसला लिया गया है।

रोजगार योग्य कौशल पर रहेगा फोकस

विशेषज्ञों का मानना है कि इंजीनियरिंग शिक्षा को उद्योगों की वर्तमान जरूरतों के अनुरूप बनाना समय की मांग है। समिति की रिपोर्ट के आधार पर सरकार भविष्य में तकनीकी शिक्षा में सुधार और छात्रों को रोजगार के लिए बेहतर तैयार करने की दिशा में कदम उठा सकती है.