rr | Source: rtrकोलकाता। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चल रहे विवाद ने शुक्रवार को नया मोड़ ले लिया। चुनाव आयोग ने टीएमसी के दोनों गुटों के लिए अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न तय कर दिए। आयोग के इस फैसले पर पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक इतिहास का काला दिन बताया और भारतीय जनता पार्टी पर उनकी पार्टी को ‘हाईजैक’ करने का आरोप लगाया।

चुनाव आयोग के फैसले के बाद ममता का बड़ा बयान

चुनाव आयोग के आदेश के बाद पहली बार मीडिया के सामने आईं ममता बनर्जी ने कहा कि देश में जो कुछ हो रहा है, वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण, असंवैधानिक, गैरकानूनी और अलोकतांत्रिक है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई एक राजनीतिक दल के अहंकार को संतुष्ट करने के लिए पक्षपातपूर्ण तरीके से बदले की भावना से की जा रही है।

ममता बनर्जी ने कहा कि उनकी ओर से वर्ष 1998 में कांग्रेस से अलग होकर बनाई गई पार्टी को भारतीय जनता पार्टी ने ‘हाईजैक’ कर लिया है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी संवैधानिक पद का अपमान नहीं करती, लेकिन मौजूदा घटनाक्रम को लेकर उन्होंने आज के दिन को देश के लोकतांत्रिक इतिहास का काला दिन बताया।

उन्होंने कहा, “देश में जो कुछ हो रहा है, वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण, असंवैधानिक, गैरकानूनी और अलोकतांत्रिक है। यह एक राजनीतिक दल के अहंकार को संतुष्ट करने के लिए की जा रही पक्षपातपूर्ण बदले की कार्रवाई है।”

‘न नाम रखने दिया जाएगा, न चुनाव चिह्न रखने दिया जाएगा’

ममता बनर्जी ने दावा किया कि इस घटनाक्रम को लेकर पहले ही आशंका जताई गई थी कि उनकी पार्टी को न तो पुराना नाम रखने दिया जाएगा और न ही चुनाव चिह्न का इस्तेमाल करने दिया जाएगा। उन्होंने सत्ता में बैठे लोगों पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि वे कौन होते हैं यह तय करने वाले कि कौन क्या रखेगा।

ममता ने कहा कि आज वे सत्ता में हैं, लेकिन कल सत्ता में नहीं भी हो सकते। इसलिए उन्हें अपनी सीमाओं को समझना चाहिए। उनके बयान के बाद टीएमसी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चल रहा विवाद राजनीतिक रूप से और चर्चा में आ गया है।

ममता ने वोटों और ईवीएम को लेकर लगाए आरोप

ममता बनर्जी ने ‘वोट चोरी’ के मुद्दे को भी अपने बयान में प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि यह बेहद दुखद है और आरोप लगाया कि बिहार, छत्तीसगढ़, हरियाणा और पश्चिम बंगाल में वोटों की लूट हुई है। उन्होंने ईवीएम को लेकर भी ‘हाईजैक’ किए जाने का आरोप लगाया।

ममता बनर्जी ने दावा किया कि 92 लाख वोट हटाए गए और ईवीएम को हाईजैक किए जाने के बावजूद अंतर केवल 32 लाख वोटों का रहा। ये आंकड़े और आरोप ममता बनर्जी ने अपने बयान के दौरान रखे। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी उनकी पार्टी को कभी खत्म नहीं कर सकती।

उन्होंने बीजेपी को “झूठा बीजेपी पार्टी” और “जुमला पार्टी” कहते हुए आरोप लगाया कि उसका काम देश में लोकतंत्र, संविधान और शिक्षा व्यवस्था को खत्म करना है। हालांकि, ये ममता बनर्जी द्वारा लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं।

पत्रकारों की गिरफ्तारी का भी उठाया मुद्दा

ममता बनर्जी ने अपने संबोधन में पत्रकारों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि पत्रकारों को भी नहीं बख्शा जा रहा है और यदि कोई उनके खिलाफ बोलता है तो उसे गिरफ्तार कर लिया जाता है। उन्होंने कहा कि इससे पहले उद्धव ठाकरे के साथ भी ऐसा ही हुआ था।

उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें ऐसे किसी व्यक्ति का सम्मान नहीं है, जो केवल बीजेपी के अहंकार को संतुष्ट करने में लगा हुआ है। ममता के इस बयान में पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न से जुड़े विवाद के साथ-साथ व्यापक राजनीतिक मुद्दों पर भी उनका विरोध दर्ज किया गया।

चुनाव आयोग ने दोनों गुटों को दिए अलग नाम और चिह्न

चुनाव आयोग के शुक्रवार के फैसले के अनुसार, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम दिया गया है। इस गुट के लिए ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न आवंटित किया गया है।

वहीं, अरूप रॉय के नेतृत्व वाले गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम दिया गया है। इस गुट को ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न आवंटित किया गया है। इस तरह आगामी उपचुनाव में दोनों गुट अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न के साथ मैदान में उतरेंगे।

‘जोड़ा फूल’ और पुराने नाम के इस्तेमाल पर रोक

चुनाव आयोग ने गुरुवार रात जारी अंतरिम आदेश में दोनों पक्षों को ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘जोड़ा फूल’ चुनाव चिह्न का इस्तेमाल उपचुनाव में नहीं करने का निर्देश दिया था। इसके बाद दोनों पक्षों से उपलब्ध चुनाव चिह्नों की सूची में से अपनी पसंद बताने को कहा गया था।

आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि दोनों गुटों के लिए किए गए नाम और चुनाव चिह्न की यह व्यवस्था केवल आगामी उपचुनावों के लिए लागू रहेगी। पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर अंतिम फैसला विवाद के निपटारे के बाद किया जाएगा।

विवाद का अंतिम फैसला अभी बाकी

चुनाव आयोग के मौजूदा आदेश से दोनों गुटों को आगामी उपचुनाव के लिए अलग पहचान मिल गई है, लेकिन पार्टी के स्थायी नाम और चुनाव चिह्न को लेकर अंतिम स्थिति अभी तय नहीं हुई है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि अंतिम निर्णय विवाद के निपटारे के बाद किया जाएगा।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के फैसले को लेकर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है और बीजेपी पर गंभीर राजनीतिक आरोप लगाए हैं। दूसरी ओर, चुनाव आयोग का आदेश फिलहाल आगामी उपचुनावों तक सीमित है।