ere | Source: ererविशाल तिवारी की सफलता की कहानी उन अभ्यर्थियों के संघर्ष को सामने लाती है, जो प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार असफल होने के बावजूद तैयारी नहीं छोड़ते। सरकारी नौकरी हासिल करने की कोशिश में विशाल तिवारी को एक-दो नहीं, बल्कि 13 बार असफलता का सामना करना पड़ा। कई मौकों पर परीक्षा के अगले चरण तक पहुंचने के बाद भी उन्हें सफलता नहीं मिली। एक समय ऐसा भी आया जब उत्तर प्रदेश सब-इंस्पेक्टर भर्ती में चयन की उम्मीद में उनके घर मिठाई बांट दी गई, लेकिन अंतिम सूची में नाम नहीं आया। इस घटना ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया।

विशाल तिवारी का सफर एक साधारण परिवार से शुरू हुआ। उनके माता-पिता चाहते थे कि वह डॉक्टर बनें। इसी लक्ष्य के साथ उन्होंने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा यानी NEET की तैयारी की और एक साल का अंतराल भी लिया, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने निराश होकर रुकने के बजाय अपनी पढ़ाई और करियर की दिशा बदलने का फैसला किया। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) से जूलॉजी में स्नातक की पढ़ाई पूरी की। इसी दौरान उनके करियर का रुख प्रतियोगी परीक्षाओं और सरकारी सेवा की ओर बढ़ा।

सेना में जाने की कोशिश, CDS और एफकैट पास लेकिन SSB में पांच बार असफल

ग्रेजुएशन के बाद विशाल तिवारी ने सशस्त्र बलों में शामिल होने का प्रयास किया। इसके लिए उन्होंने CDS और एफकैट जैसी परीक्षाएं दीं। इन परीक्षाओं में वह सफल भी हुए, लेकिन आगे की चयन प्रक्रिया में उन्हें लगातार मुश्किलों का सामना करना पड़ा। वह पांच बार SSB इंटरव्यू में सफल नहीं हो सके।

लगातार प्रयासों के बावजूद मनचाही नौकरी नहीं मिलने का सिलसिला यहीं खत्म नहीं हुआ। इसी दौरान उत्तर प्रदेश में सब-इंस्पेक्टर की बड़ी भर्ती निकली। विशाल को अपने चयन का इतना भरोसा था कि अंतिम परिणाम आने से पहले ही उनके घर मिठाई बंट गई। परिवार और आसपास के लोगों को उम्मीद थी कि इस बार सरकारी नौकरी का सपना पूरा हो जाएगा।

मिठाई बंट गई, लेकिन चयन सूची में नहीं था नाम

असली झटका तब लगा जब भर्ती का अंतिम परिणाम सामने आया। जिस चयन की उम्मीद में घर में मिठाई बांटी गई थी, उसी सूची में विशाल तिवारी का नाम नहीं था। यह उनके लिए बेहद निराशाजनक क्षण था। एक तरफ नौकरी मिलने की उम्मीद टूट गई और दूसरी तरफ लोगों के बीच चर्चा तथा तानों का सामना करना पड़ा।

विशाल ने अपनी यात्रा साझा करते हुए बताया कि उनकी असफलताओं की संख्या धीरे-धीरे लोगों को पता चलने लगी थी। इसके बाद कुछ लोग उनका मजाक उड़ाने लगे और ताने भी देने लगे। मिठाई बांटने के बाद अंतिम सूची में नाम नहीं आने की घटना ने उनके मन पर और गहरा असर डाला। असफलता और सामाजिक दबाव के बीच भी उन्होंने खुद को संभालने की कोशिश जारी रखी।

13 असफलताओं के बीच कंधे की चोट ने बढ़ाई मुश्किल

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के दौरान विशाल तिवारी को एक और चुनौती का सामना करना पड़ा। उनके कंधे में चोट लग गई। डॉक्टर ने उन्हें सलाह दी कि वह रक्षा क्षेत्र की तैयारी छोड़ दें। इससे उनके सामने सरकारी नौकरी हासिल करने के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी को आगे बढ़ाने का रास्ता ही प्रमुख विकल्प रह गया।

एक के बाद एक असफलताओं, लोगों के तानों और चोट के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। यही वह दौर था जब उन्होंने अपनी तैयारी के तरीके पर नए सिरे से काम करना शुरू किया। उन्होंने अपनी पिछली गलतियों को समझने और उन्हें दोबारा न दोहराने पर ध्यान दिया।

ऑपरेशन टालकर SSC CGL की तैयारी में जुटे विशाल

कंधे की चोट के बीच विशाल ने SSC CGL की तैयारी जारी रखने का निर्णय लिया। उन्होंने अपना ऑपरेशन भी टाल दिया ताकि परीक्षा की तैयारी प्रभावित न हो। लगातार असफलताओं के बाद भी उनका लक्ष्य सरकारी सेवा में जाना था।

साल 2022 में उनकी मेहनत का पहला बड़ा परिणाम सामने आया। उन्होंने SSC CGL परीक्षा में सफलता हासिल की और पोस्टल असिस्टेंट के पद पर चयनित हुए। यह उनके लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि थी, क्योंकि इससे लंबे समय से जारी असफलताओं के बीच उन्हें पहली बड़ी सफलता मिली थी। हालांकि, विशाल यहीं रुकना नहीं चाहते थे।

पहली सफलता के बाद भी नहीं रुके, तैयारी का तरीका बदला

पोस्टल असिस्टेंट के पद पर चयन के बाद विशाल ने अपनी कमियों का विश्लेषण किया। उन्हें यह समझ आया कि केवल पढ़ाई पूरी कर लेना पर्याप्त नहीं है, बल्कि परीक्षा के पैटर्न के अनुसार लगातार अभ्यास भी जरूरी है। इसके बाद उन्होंने SSC CGL की दोबारा तैयारी शुरू की।

इस बार उनकी रणनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव आया। उन्होंने थ्योरी पर पहले ही काम कर लिया था, इसलिए दोबारा तैयारी के दौरान उनका मुख्य ध्यान मॉक टेस्ट, रिवीजन और अपनी गलतियों को सुधारने पर रहा। उन्होंने परीक्षा के अनुरूप लगातार अभ्यास किया और अपने प्रदर्शन का आकलन करते रहे।

2023 में मेहनत ने बदली तस्वीर, SSC CGL में हासिल की AIR-74

साल 2023 विशाल तिवारी के लिए निर्णायक साबित हुआ। उन्होंने लाइब्रेरी में लंबे समय तक पढ़ाई की और मॉक टेस्ट तथा रिवीजन को अपनी तैयारी का अहम हिस्सा बनाया। लगातार असफलताओं से मिली सीख को उन्होंने अपनी नई रणनीति में शामिल किया।

आखिरकार SSC CGL के परिणाम ने उनके वर्षों के संघर्ष को एक नई दिशा दे दी। विशाल तिवारी ने परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक यानी AIR 74 हासिल की। इस सफलता के साथ उनका चयन मिनिस्ट्री ऑफ एक्सटर्नल अफेयर्स में असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर (ASO) के पद पर हुआ।

13 बार की असफलता के बाद मिली सफलता ने बदल दिया पूरा सफर

विशाल तिवारी की कहानी में सबसे उल्लेखनीय बात यह है कि उनकी सफलता एक ही प्रयास में नहीं आई। NEET में असफलता, CDS और एफकैट के बाद SSB में पांच बार असफल होना, उत्तर प्रदेश सब-इंस्पेक्टर भर्ती की अंतिम सूची में नाम नहीं आना, लोगों के ताने और कंधे की चोट—इन सभी परिस्थितियों के बीच उन्होंने तैयारी जारी रखी।

साल 2022 में पोस्टल असिस्टेंट के रूप में मिली सफलता ने उन्हें आगे बढ़ने का आधार दिया, लेकिन उन्होंने उसी उपलब्धि को अंतिम मंजिल नहीं माना। अपनी गलतियों पर काम करते हुए उन्होंने SSC CGL की तैयारी जारी रखी और 2023 में AIR-74 हासिल कर अपने लक्ष्य को एक नई ऊंचाई तक पहुंचाया।

विशाल तिवारी की कहानी से क्या सामने आता है

विशाल तिवारी की यात्रा बताती है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में असफलता के बाद रणनीति में बदलाव और लगातार अभ्यास महत्वपूर्ण हो सकते हैं। उनकी कहानी में बार-बार आने वाली असफलताओं के साथ-साथ अपनी कमजोरियों को पहचानने और तैयारी के तरीके को बदलने का पहलू भी सामने आता है।

उनकी सफलता की यात्रा इस बात का उदाहरण है कि एक परीक्षा में असफल होना पूरे करियर का अंतिम परिणाम नहीं होता। विशाल ने पहले की असफलताओं से सीख लेकर अपनी तैयारी को आगे बढ़ाया और अंततः SSC CGL में AIR-74 हासिल की। उनकी कहानी उन अभ्यर्थियों के संघर्ष को भी सामने लाती है, जो सरकारी नौकरी की तैयारी के दौरान कई तरह की चुनौतियों से गुजरते हैं।