कर्नाटक में मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के नेतृत्व वाली कैबिनेट में 19 नए मंत्रियों की एंट्री | Source: Deccan Heraldकर्नाटक में मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के नेतृत्व वाली कैबिनेट में 19 नए मंत्रियों की एंट्री Source : Deccan Herald

बेंगलुरु: कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने सीएम बनने के दो महीने बाद आखिरकार सोमवार को अपने मंत्रिमंडल का बहुप्रतीक्षित विस्तार कर दिया। राजभवन के लोक भवन में आयोजित एक भव्य और गरिमामयी समारोह में राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने कुल 19 नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस विस्तार के साथ ही शिवकुमार कैबिनेट में कुल मंत्रियों की संख्या बढ़कर अब 33 हो गई है। कांग्रेस आलाकमान की मंजूरी के बाद हुए इस बड़े प्रशासनिक फेरबदल में पार्टी ने जहां एक ओर युवाओं को आगे बढ़ाकर संगठन में बड़े बदलाव के संकेत दिए हैं, वहीं दूसरी ओर कैबिनेट में जगह न मिलने से नाराज वरिष्ठ विधायकों की बगावत ने सरकार के सामने एक नया सियासी संकट खड़ा कर दिया है।

राहुल गांधी की टीम के रिजवान अरशद की एंट्री और जेनरेशन शिफ्ट

इस पूरे मंत्रिमंडल विस्तार में जिस एक नाम ने सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरी हैं, वह है शिवाजीनगर विधानसभा सीट से युवा विधायक रिजवान अरशद का। 46 वर्षीय रिजवान अरशद को कांग्रेस के राष्ट्रीय नेता राहुल गांधी की कोर टीम का हिस्सा और उनका बेहद विश्वसनीय माना जाता है। 1995-96 में छात्र संगठन NSUI के जरिए जमीनी राजनीति से अपने करियर की शुरुआत करने वाले रिजवान अरशद ने संगठन में राष्ट्रीय महासचिव तक का सफर तय किया है। हालांकि वे 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में बैंगलोर सेंट्रल निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा के पी सी मोहन से चुनाव हार गए थे, लेकिन दिसंबर 2019 के विधानसभा उपचुनाव में पहली बार विधायक बनने के बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। रिजवान अरशद को कैबिनेट में शामिल करके कांग्रेस आलाकमान ने साफ कर दिया है कि वह राज्य में मुस्लिम और युवा नेतृत्व की एक नई पौध तैयार कर रही है, जिसे राजनीति में एक बड़े जेनरेशन शिफ्ट (पीढ़ीगत बदलाव) के रूप में देखा जा रहा है।

ऐन वक्त पर फेरबदल और सिद्धारमैया की रहस्यमयी दूरी

इस कैबिनेट विस्तार की पटकथा दिल्ली में कांग्रेस के शीर्ष नेताओं के साथ कई दौर की बैठकों के बाद लिखी गई, लेकिन अंतिम समय तक इसमें भारी उथल-पुथल देखने को मिली। सूत्रों के मुताबिक, आखिरी वक्त पर मंकल वैद्य का नाम सूची से हटाकर वरिष्ठ नेता एस एस मल्लिकार्जुन को कैबिनेट में जगह दी गई। इसके अलावा, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी द्वारा मंजूर की गई सूची में एकमात्र महिला विधायक गायत्री शांतिगौड़ा का नाम होने के बावजूद उन्होंने सोमवार को शपथ नहीं ली, जिसके चलते मौजूदा कैबिनेट में एक भी महिला चेहरा शामिल नहीं हो सका है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और दिग्गज कांग्रेस नेता सिद्धारमैया की शपथ ग्रहण समारोह से रहस्यमयी दूरी ने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। सिद्धारमैया का राजभवन न पहुंचना पार्टी के भीतर मुख्यमंत्री शिवकुमार और उनके बीच की अंदरूनी खींचतान को एक बार फिर जगजाहिर कर गया है।

बगावत की आग और विधायकों के इस्तीफे की चेतावनी

मंत्रिमंडल की सूची सार्वजनिक होते ही कांग्रेस पार्टी के भीतर असंतोष का ज्वालामुखी फूट पड़ा है, जिससे सरकार की स्थिरता पर सवाल उठने लगे हैं। मंत्री पद की रेस से बाहर होने से नाराज बीजापुर के वरिष्ठ और कद्दावर कांग्रेस विधायक यशवंतरायगौड़ा वी. पाटिल ने सीधे विधानसभा की सदस्यता से अपना इस्तीफा सौंप दिया है। पाटिल के इस कदम के बाद पार्टी में हड़कंप मच गया है, क्योंकि उनके समर्थन में बालूर गोपालकृष्ण समेत करीब 5 से 10 अन्य विधायकों ने भी सामूहिक इस्तीफे की चेतावनी दे डाली है। नाराज गुट का आरोप है कि पार्टी के लिए दशकों तक वफादारी से काम करने वाले वरिष्ठ नेताओं और क्षेत्रीय समीकरणों को पूरी तरह दरकिनार कर जूनियर और नए चेहरों को मलाईदार पद सौंप दिए गए हैं।

शिवकुमार का डैमेज कंट्रोल और भविष्य की चुनौती

पार्टी के भीतर मचे इस भारी घमासान को देखते हुए मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार तुरंत एक्शन मोड में आ गए हैं और उन्होंने नाराज विधायकों को मनाने के लिए डैमेज कंट्रोल शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री ने बगावती सुर अपना रहे नेताओं से शांति बनाए रखने की भावुक अपील करते हुए कहा कि मंत्रिमंडल में शामिल करने की एक संवैधानिक सीमा होती है और चाहकर भी हर योग्य विधायक को मंत्री नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने नाराज विधायकों को आश्वस्त किया है कि आने वाले दिनों में उन्हें सरकार के विभिन्न महत्वपूर्ण बोर्डों, निगमों और अन्य प्रशासनिक पदों पर बड़ी जिम्मेदारियां देकर हर हाल में समायोजित किया जाएगा। बहरहाल, डीके शिवकुमार ने अपनी इस नई टीम के जरिए प्रशासनिक कामकाज को रफ्तार देने की कोशिश तो की है, लेकिन अब उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने ही घर में लगी असंतोष की इस आग को शांत करने की होगी।