जावेद अख्तर ने मंत्रालय के बयान को बेतुका बताया है. जावेद अख्तर ने मंत्रालय के बयान को बेतुका बताया है।

देश में इन दिनों पासपोर्ट और नागरिकता को लेकर नई बहस छिड़ गई है। विदेश मंत्रालय के उस बयान के बाद विवाद गहरा गया है, जिसमें कहा गया कि पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं बल्कि केवल अंतरराष्ट्रीय यात्रा के लिए जारी किया जाने वाला दस्तावेज है। इस बयान ने सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक चर्चा तेज कर दी है। इसी बीच मशहूर गीतकार और लेखक जावेद अख्तर ने भी इस मुद्दे पर खुलकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने विदेश मंत्रालय के बयान को बेतुका बताते हुए सवाल उठाया कि अगर पासपोर्ट नागरिकता का सबूत नहीं है, तो फिर इसे जारी करते समय यह कैसे सुनिश्चित किया जाता है कि संबंधित व्यक्ति भारतीय नागरिक ही है। साथ ही उन्होंने अवैध प्रवासियों और असली भारतीय नागरिकों की पहचान को लेकर भी सिस्टम पर कई तीखे सवाल दागे हैं।

पासपोर्ट विवाद पर जावेद अख्तर ने उठाए सवाल, मंत्रालय के बयान पर जताई कड़ी आपत्ति

देश में बांग्लादेशी घुसपैठ के मुद्दे पर पहले से जारी बहस के बीच विदेश मंत्रालय का एक बयान अब नए विवाद की वजह बन गया है। मंत्रालय ने हाल ही में स्पष्ट किया कि पासपोर्ट किसी व्यक्ति की नागरिकता का प्रमाण नहीं है, बल्कि इसका मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय यात्रा को सुगम बनाना है। इस बयान के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कई लोगों ने इस पर सवाल उठाए, तो कई ने मंत्रालय के रुख का समर्थन भी किया। इसी बीच मशहूर गीतकार और लेखक जावेद अख्तर ने भी इस बयान पर कड़ी आपत्ति जताई और इसे पूरी तरह बेतुका करार दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर अधिकारी असली भारतीय नागरिकों और अवैध प्रवासियों के बीच अंतर किस आधार पर करते हैं।

इस पूरे विवाद की शुरुआत 14वें पासपोर्ट सेवा दिवस के मौके पर हुई, जब विदेश मंत्रालय ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि पासपोर्ट का उद्देश्य केवल लोगों की अंतरराष्ट्रीय यात्रा को आसान बनाना है। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल पासपोर्ट होने से किसी व्यक्ति की नागरिकता साबित नहीं होती। इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई, क्योंकि भारत में पासपोर्ट केवल भारतीय नागरिकों को ही जारी किया जाता है। ऐसे में बड़ी संख्या में लोगों ने सवाल उठाया कि अगर पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है, तो इसे जारी करने की प्रक्रिया का आधार क्या है।

इसी मुद्दे पर 81 वर्षीय जावेद अख्तर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए विदेश मंत्रालय के बयान पर सवाल उठाए। उन्होंने लिखा, विदेश मंत्रालय का कहना है कि पासपोर्ट यात्रा के लिए एक दस्तावेज है, नागरिकता का सबूत नहीं। अगर वास्तव में ऐसा है, तो क्या कुछ लोगों को यह दस्तावेज बिना पूरी तरह यह सुनिश्चित किए जारी किया जाता है कि वे भारतीय नागरिक हैं? यह बात पूरी तरह बेतुकी लगती है। जावेद अख्तर का यह बयान सामने आते ही सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर बहस और तेज हो गई।

(फोटो साभार: X@Javedakhtarjadu)

(फोटो साभार: X@Javedakhtarjadu)

अवैध प्रवासियों को लेकर भी सिस्टम से पूछे सवाल

जावेद अख्तर की पोस्ट पर एक यूजर ने टिप्पणी करते हुए लिखा कि आधार कार्ड, वोटर आईडी और पैन कार्ड जैसे दस्तावेज भी भारतीय नागरिकता का प्रमाण नहीं माने जाते। इस पर जावेद अख्तर ने दोबारा अपनी बात रखते हुए कहा कि असली सवाल दस्तावेजों का नहीं, बल्कि सिस्टम की कार्यप्रणाली का है।

उन्होंने जवाब देते हुए लिखा, सिस्टम में आखिर कौन ऐसे अवैध प्रवासियों की बिना किसी शर्त मदद कर रहा है? अगर नागरिकता साबित करने वाले दस्तावेजों को लेकर इतनी अस्पष्टता है, तो ऐसे हालात में असली और नकली नागरिकों के बीच अंतर कैसे किया जाता है? उनके इस सवाल ने पूरे विवाद को एक नया आयाम दे दिया है।

विदेश मंत्रालय के अनुसार, पासपोर्ट का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय यात्रा को आसान बनाना है। मंत्रालय का कहना है कि यह एक यात्रा संबंधी आधिकारिक दस्तावेज है, न कि भारतीय नागरिकता का अंतिम और स्वतंत्र प्रमाण।

भारतीय नागरिकता का पक्का प्रमाण क्या माना जाता है?

पासपोर्ट को लेकर छिड़ी इस बहस के बाद एक बार फिर यह सवाल चर्चा में आ गया है कि आखिर भारतीय नागरिकता का कानूनी आधार क्या है। इसी साल की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट ने मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) मामले की सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया था कि आधार कार्ड भारतीय नागरिकता का प्रमाण नहीं है, बल्कि यह केवल पहचान से जुड़ा दस्तावेज है। इसी तरह वोटर आईडी कार्ड को भी नागरिकता के दस्तावेज के बजाय पहचान और पते के प्रमाण के रूप में देखा जाता है।

ईटाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय नागरिकता कानून के तहत 26 जनवरी 1950 से लेकर 1 जुलाई 1987 से पहले भारत में जन्म लेने वाला व्यक्ति जन्म से भारतीय नागरिक माना जाता है। वहीं 1 जुलाई 1987 के बाद जन्मे लोगों के लिए यह जरूरी है कि उनके माता-पिता में से कम से कम एक भारतीय नागरिक हो। जबकि 3 दिसंबर 2004 या उसके बाद जन्म लेने वाले व्यक्ति के लिए नियम यह है कि उसके माता-पिता दोनों भारतीय नागरिक हों, या फिर उनमें से एक भारतीय नागरिक हो और दूसरा जन्म के समय अवैध प्रवासी न हो। इन्हीं कानूनी प्रावधानों के आधार पर भारतीय नागरिकता तय की जाती है।