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क्या आप भी उन लोगों में शामिल हैं जो 10 घंटे या उससे ज्यादा सोने के बाद भी सुबह उठते ही थकान महसूस करते हैं? अगर हां, तो इसे सिर्फ कमजोरी या आलस समझने की गलती न करें। कई बार शरीर कुछ ऐसे संकेत देता है, जिन्हें हम नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यही संकेत किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या की ओर इशारा कर सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि भरपूर नींद लेने के बावजूद लगातार थकान, सुस्ती और ऊर्जा की कमी महसूस होना सामान्य नहीं है। इसके पीछे खराब जीवनशैली से लेकर हार्मोनल गड़बड़ी और कई छिपी हुई बीमारियां जिम्मेदार हो सकती हैं। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि जरूरत से ज्यादा नींद आखिर कब खतरे की घंटी बन जाती है।
अधिक नींद के स्वास्थ्य जोखिम
विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक जरूरत से ज्यादा सोने की आदत शरीर की सामान्य कार्यप्रणाली को प्रभावित कर सकती है। जब व्यक्ति अधिक समय तक बिस्तर पर रहता है, तो उसकी शारीरिक गतिविधियां कम होने लगती हैं, जिससे वजन बढ़ने और मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ने का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा ज्यादा नींद लेने वाले लोगों में सिरदर्द, शरीर में भारीपन, कम ऊर्जा और दिनभर सुस्ती जैसी समस्याएं भी देखने को मिलती हैं। कई बार व्यक्ति को लगता है कि उसकी नींद पूरी नहीं हुई है, इसलिए वह और अधिक सोता है, लेकिन इसके बावजूद थकान बनी रहती है। यह स्थिति शरीर के लिए एक चेतावनी संकेत हो सकती है।
बीमारियों का हो सकता है संकेत
डॉक्टरों के अनुसार, अत्यधिक नींद कई बार किसी अंदरूनी स्वास्थ्य समस्या की ओर इशारा करती है। स्लीप एपनिया जैसी स्थिति में सोते समय व्यक्ति की सांस बार-बार रुकती है, जिससे उसे पूरी तरह आराम नहीं मिल पाता। इसी तरह बार-बार नींद टूटना या नींद की गुणवत्ता खराब होना भी थकान का कारण बन सकता है। इसके अलावा थायरॉयड संबंधी समस्याएं, ब्लड शुगर का असंतुलन, डिप्रेशन, हार्मोनल बदलाव और तंत्रिका तंत्र से जुड़ी कुछ बीमारियां भी अधिक नींद आने की वजह बन सकती हैं। ऐसे मामलों में व्यक्ति लंबे समय तक सोने के बाद भी तरोताजा महसूस नहीं करता और उसकी दैनिक गतिविधियां प्रभावित होने लगती हैं।
कब लें डॉक्टर की सलाह
यदि जरूरत से ज्यादा नींद आने के साथ तेज खर्राटे, नींद में सांस लेने में परेशानी, लगातार थकान, अचानक वजन बढ़ना, याददाश्त कमजोर होना, काम में मन न लगना या एकाग्रता की कमी जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर जांच कराने से समस्या की असली वजह का पता लगाया जा सकता है और गंभीर बीमारियों का समय रहते इलाज शुरू किया जा सकता है। इसलिए यदि आपकी नींद की अवधि अचानक बढ़ गई है या लंबे समय से अधिक सोने के बावजूद थकान बनी हुई है, तो इसे सिर्फ आलस समझकर नजरअंदाज न करें।
