ere | Source: ereनई दिल्ली। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के बाद न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेजे गए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आशुतोष रांका और सौरभ दास की जेल में दिनचर्या को लेकर चर्चा तेज है। दोनों नेताओं को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद तिहाड़ जेल की अलग-अलग कोठरियों में रखा गया है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों को जेल में सामान्य विचाराधीन कैदियों की तरह रहना पड़ रहा है। उनके लिए अलग से विशेष सुविधाओं की व्यवस्था नहीं की गई है। सोने के लिए जमीन और ओढ़ने के लिए कंबल दिया गया है, जबकि भोजन में दाल, रोटी और सब्जी उपलब्ध कराई जा रही है। उनकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कोठरियों के बाहर चौबीसों घंटे पुलिसकर्मियों की तैनाती किए जाने की भी जानकारी सामने आई है। जेल प्रशासन की ओर से उन्हें अन्य कैदियों से अलग रखने का उद्देश्य सुरक्षा सुनिश्चित करना और किसी संभावित विवाद, हमले या अवांछित संपर्क की आशंका को कम करना बताया गया है।

अलग-अलग कोठरियों में रखे गए दोनों नेता, सुरक्षा पर विशेष निगरानी

‘द टेलीग्राफ’ की एक रिपोर्ट में जेल अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि नए आए कैदियों को अलग-अलग कोठरियों में रखा गया है। ऐसा उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने और दूसरे कैदियों के साथ संभावित झगड़े, हमले या मिलीभगत जैसी परिस्थितियों को रोकने के उद्देश्य से किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, आशुतोष रांका और सौरभ दास को उनकी कोठरियों में अखबार और टेलीविजन की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। दोनों के साथ दूसरे विचाराधीन कैदियों से अलग व्यवहार नहीं किए जाने की बात कही गई है। जेल अधिकारी के अनुसार, उन्हें वही सुविधाएं दी जा रही हैं, जो सामान्य रूप से अन्य विचाराधीन कैदियों को उपलब्ध होती हैं। दोनों नेताओं को अलग-अलग रखने के पीछे सुरक्षा संबंधी सावधानियों को प्रमुख वजह बताया गया है। हालांकि, उनकी जेल में वास्तविक दिनचर्या और उपलब्ध सुविधाओं से संबंधित विवरण मीडिया रिपोर्ट में उद्धृत जेल अधिकारी की जानकारी पर आधारित हैं।

जमीन पर सोना, कंबल ओढ़ना और सामान्य भोजन करना होगा

रिपोर्ट के मुताबिक, आशुतोष रांका और सौरभ दास को तिहाड़ जेल में सामान्य विचाराधीन कैदियों की तरह ही रहना होगा। सोने के लिए उन्हें जमीन उपलब्ध कराई गई है और ओढ़ने के लिए कंबल दिया गया है। भोजन में दाल, रोटी और सब्जी परोसे जाने की जानकारी दी गई है। इसका अर्थ है कि न्यायिक हिरासत में रहने के दौरान दोनों नेताओं को जेल की सामान्य व्यवस्था के अनुरूप दिन बिताना पड़ रहा है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि उनकी कोठरियों में संलग्न शौचालय की सुविधा है। सुरक्षा कारणों से उनकी आवाजाही पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। जेल में किसी व्यक्ति को हिरासत में रखने के दौरान उसकी सुरक्षा, अन्य कैदियों से संपर्क और परिसर में आवाजाही को लेकर प्रशासन अपनी व्यवस्था के अनुसार निगरानी करता है। इस मामले में भी दोनों नेताओं को अलग-अलग कोठरियों में रखने और उनके बाहर पुलिस तैनात करने की जानकारी सामने आई है।

तिहाड़ जेल में ब्लेडबाजी और दूसरे कैदियों से धमकी का खतरा

तिहाड़ जेल में विचाराधीन कैदियों के बीच झड़प और हमले की घटनाओं को लेकर समय-समय पर खबरें सामने आती रही हैं। इसी पृष्ठभूमि में आशुतोष रांका और सौरभ दास की सुरक्षा को लेकर विशेष निगरानी की जानकारी दी गई है। ‘द टेलीग्राफ’ की रिपोर्ट में उद्धृत जेल अधिकारी के अनुसार, दोनों नेताओं की कोठरियों के बाहर चौबीसों घंटे पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। अधिकारी ने जेल के भीतर ब्लेडबाजी जैसी घटनाओं की आशंका का भी उल्लेख किया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि नए कैदियों को कभी-कभी दूसरे विचाराधीन कैदियों की ओर से धमकियों का सामना करना पड़ सकता है और उनसे पैसे ऐंठने की कोशिश भी की जा सकती है। हालांकि, आशुतोष रांका या सौरभ दास पर जेल के भीतर किसी हमले या ब्लेडबाजी की घटना होने की जानकारी इस रिपोर्ट में नहीं दी गई है। यहां सुरक्षा संबंधी आशंका और किसी वास्तविक घटना के बीच अंतर समझना जरूरी है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दोनों नेताओं की सुरक्षा के लिए निगरानी व्यवस्था की गई है।

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के बाद पांच दिन की न्यायिक हिरासत

आशुतोष रांका और सौरभ दास को जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के बाद न्यायिक हिरासत में भेजा गया। रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने जंतर-मंतर पर जबरन प्रवेश किया था, जिसके बाद दिल्ली के एक मजिस्ट्रेट ने दोनों नेताओं को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रही है। इस मुद्दे पर कई विपक्षी दलों ने भी प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया है। प्रदर्शन और उसके बाद हुई न्यायिक कार्रवाई के चलते दोनों नेताओं का मामला चर्चा में है। न्यायिक हिरासत का अर्थ है कि संबंधित व्यक्ति को अदालत के आदेश पर हिरासत में रखा जाता है। हिरासत में भेजे जाने का आदेश अपने आप में किसी आरोप में दोष सिद्ध होने का प्रमाण नहीं है। मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया के तहत ही संबंधित तथ्यों और आरोपों पर निर्णय होगा।

CJP के प्रदर्शन और चुनाव आयोग से जुड़ी मांग पर भी चर्चा

आशुतोष रांका और सौरभ दास की गिरफ्तारी के बाद CJP के प्रदर्शन और उसकी मांग को लेकर भी चर्चा हो रही है। पार्टी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शन कर रही है। रिपोर्ट के अनुसार, इस मुद्दे पर कई विपक्षी दलों ने भी समर्थन दिया है। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान हुई कार्रवाई के बाद दोनों नेताओं को न्यायिक हिरासत में भेजा गया। इस घटनाक्रम ने प्रदर्शन के तरीके, कानून-व्यवस्था और राजनीतिक विरोध से जुड़े सवालों को फिर चर्चा में ला दिया है। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट में प्रदर्शन से संबंधित सभी घटनाओं का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है। इसलिए मामले की पृष्ठभूमि और कानूनी स्थिति को समझने के लिए अदालत के आदेश तथा संबंधित आधिकारिक जानकारी को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

तिहाड़ जेल में कैदियों की दिनचर्या कैसी होती है?

रिपोर्ट में तिहाड़ जेल में कैदियों की सामान्य दिनचर्या का भी उल्लेख किया गया है। इसके अनुसार, कैदी सुबह करीब पांच बजे उठते हैं और सुबह छह बजे हाजिरी होती है। इसके बाद सुबह सात बजे नाश्ता दिया जाता है। दोपहर का भोजन सुबह 11 बजे से दोपहर 12 बजे के बीच परोसे जाने की जानकारी दी गई है। भोजन के बाद निर्धारित समय में आगंतुकों से मुलाकात की व्यवस्था होती है। शाम को करीब 6:30 बजे रात का भोजन दिया जाता है। इसके बाद कैदियों की गिनती पूरी होने पर शाम सात बजे उन्हें फिर से उनकी निर्धारित जगहों पर बंद कर दिया जाता है। यह दिनचर्या रिपोर्ट में दी गई सामान्य जानकारी पर आधारित है। वास्तविक समय-सारणी जेल की व्यवस्था, सुरक्षा आवश्यकताओं और संबंधित नियमों के अनुसार अलग हो सकती है। आशुतोष रांका और सौरभ दास के मामले में भी रिपोर्ट के मुताबिक, उन्हें सामान्य विचाराधीन कैदियों की तरह ही बुनियादी सुविधाएं दी जा रही हैं।

सुरक्षा व्यवस्था और न्यायिक हिरासत पर टिकी निगाहें

आशुतोष रांका और सौरभ दास के तिहाड़ जेल पहुंचने के बाद उनकी सुरक्षा, रहने की व्यवस्था और जेल की दिनचर्या को लेकर चर्चा सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों को अलग-अलग कोठरियों में रखा गया है, उनके बाहर चौबीसों घंटे निगरानी की जा रही है और उन्हें सामान्य विचाराधीन कैदियों की तरह भोजन तथा सोने की व्यवस्था दी गई है। जेल के भीतर झड़प या ब्लेडबाजी की आशंका का उल्लेख भी रिपोर्ट में किया गया है, लेकिन दोनों नेताओं पर किसी हमले की पुष्टि नहीं हुई है। उनका मामला जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग से जुड़ा है। फिलहाल दोनों पांच दिन की न्यायिक हिरासत में हैं। आगे की कानूनी प्रक्रिया और जेल प्रशासन की व्यवस्था के बीच इस मामले पर लोगों की नजर बनी हुई है।