Late night eating habit affect kidney and metabolism


नई दिल्ली। आज की तेज रफ्तार जिंदगी में देर रात तक काम करना, मोबाइल पर समय बिताना या ओटीटी प्लेटफॉर्म पर मनोरंजन देखते हुए देर से भोजन करना आम होता जा रहा है। कई लोग रात 10 से 11 बजे या उससे भी देर से रात का खाना खाते हैं। अधिकांश लोगों को लगता है कि इसका असर केवल वजन बढ़ने तक सीमित रहता है, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार यह आदत शरीर के मेटाबॉलिज्म, ब्लड शुगर नियंत्रण, इंसुलिन की कार्यप्रणाली और लंबे समय में किडनी के स्वास्थ्य पर भी असर डाल सकती है। हालांकि विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि केवल देर रात खाना खाना किडनी रोग का सीधा कारण नहीं माना जाता, लेकिन यह मोटापा, मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसे जोखिमों को बढ़ाकर अप्रत्यक्ष रूप से किडनी को प्रभावित कर सकता है।

शरीर की जैविक घड़ी पर पड़ता है असर

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (एनआईएच) के अनुसार मानव शरीर का लगभग हर अंग 24 घंटे की एक प्राकृतिक जैविक घड़ी, जिसे सर्केडियन रिदम कहा जाता है, के अनुसार काम करता है। दिन के समय शरीर भोजन को अधिक प्रभावी तरीके से पचाता है और उससे ऊर्जा प्राप्त करता है।

रात होने के साथ ही शरीर की कार्यप्रणाली में बदलाव आने लगता है। इस समय इंसुलिन की संवेदनशीलता कम होने लगती है और मेटाबॉलिज्म की गति भी धीमी पड़ जाती है। यदि ऐसे समय में भारी भोजन किया जाए तो शरीर उसे दिन की तुलना में उतनी कुशलता से पचा नहीं पाता।

देर रात भोजन से क्यों बढ़ सकती है परेशानी

विशेषज्ञों के अनुसार रात में भारी भोजन करने पर ब्लड शुगर लंबे समय तक बढ़ा रह सकता है। साथ ही अतिरिक्त कैलोरी शरीर में वसा के रूप में जमा होने लगती है। यदि यह आदत लंबे समय तक बनी रहे तो मोटापा और उससे जुड़ी कई स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।

ब्लड शुगर नियंत्रण पर पड़ सकता है असर

एनआईएच के अनुसार रात के समय शरीर ग्लूकोज को नियंत्रित करने में दिन की अपेक्षा कम सक्षम होता है। यदि देर रात अधिक कैलोरी या रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट वाला भोजन किया जाए तो ब्लड शुगर सामान्य होने में अधिक समय लग सकता है।

लगातार ऐसा होने पर इंसुलिन रेजिस्टेंस विकसित होने का खतरा बढ़ सकता है, जो आगे चलकर टाइप-2 मधुमेह का कारण बन सकता है।

इंसुलिन की कार्यक्षमता हो सकती है प्रभावित

नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन (एनसीबीआई) के अनुसार रात के समय शरीर में मेलाटोनिन हार्मोन का स्तर बढ़ने लगता है, जो नींद की तैयारी करता है। इसी दौरान इंसुलिन की कार्यक्षमता अपेक्षाकृत कम हो सकती है।

यदि इस समय भारी भोजन किया जाए तो शरीर को ब्लड शुगर नियंत्रित करने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है। लंबे समय तक यह स्थिति बनी रहने पर मेटाबॉलिक स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है।

मोटापा बढ़ने से किडनी पर बढ़ सकता है दबाव

देर रात अधिक कैलोरी वाला भोजन करने की आदत शरीर में अतिरिक्त वसा जमा होने का कारण बन सकती है। धीरे-धीरे वजन बढ़ने और पेट के आसपास चर्बी जमा होने की संभावना बढ़ जाती है।

अध्ययनों के अनुसार मोटापा किडनी पर अतिरिक्त दबाव डालता है, जिससे समय के साथ उसकी कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है।

मधुमेह के जरिए किडनी को हो सकता है नुकसान

एनसीबीआई के अनुसार यदि लंबे समय तक देर रात भोजन करने की आदत बनी रहती है और इससे इंसुलिन रेजिस्टेंस तथा टाइप-2 मधुमेह विकसित हो जाता है, तो इसका असर किडनी पर भी पड़ सकता है।

अनियंत्रित ब्लड शुगर किडनी की महीन रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकती है, जिससे किडनी की कार्यक्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है।

नींद की गुणवत्ता भी हो सकती है प्रभावित

देर रात भारी भोजन करने से केवल पाचन ही प्रभावित नहीं होता, बल्कि नींद की गुणवत्ता पर भी असर पड़ सकता है। भोजन के बाद शरीर लंबे समय तक पाचन प्रक्रिया में व्यस्त रहता है, जिससे आरामदायक और गहरी नींद लेने में कठिनाई हो सकती है। लगातार खराब नींद भी मेटाबॉलिज्म और संपूर्ण स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है।

विशेषज्ञ क्या सलाह देते हैं

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार रात का भोजन समय पर, हल्का और संतुलित होना चाहिए। यदि किसी कारणवश देर से भोजन करना पड़े, तो अत्यधिक तला-भुना या अधिक कैलोरी वाला भोजन लेने से बचना चाहिए। नियमित समय पर भोजन करने की आदत शरीर की जैविक घड़ी को संतुलित रखने और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद करती है।