erere | Source: erereछत्रपति संभाजीनगर। जंतर-मंतर पर लंबे समय तक चले छात्र आंदोलन के बाद चर्चा में आई कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) अब अपने ही संगठन के भीतर उठे विरोध के कारण सुर्खियों में है। पार्टी के प्रमुख अभिजीत दीपके को राष्ट्रीय संयोजक बनाए जाने के तुरंत बाद उनके ही कुछ कथित वॉलेंटियर्स ने विरोध का मोर्चा खोल दिया। विरोध कर रहे युवाओं का आरोप है कि आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले जमीनी कार्यकर्ताओं की अनदेखी की जा रही है। इसी विरोध के तहत एक युवक अभिजीत दीपके के घर के बाहर अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठ गया।

राष्ट्रीय संयोजक बनने के बाद सामने आया विरोध

महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर स्थित अभिजीत दीपके के आवास पर दो दिनों तक सीजेपी की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में कई संगठनात्मक फैसले लिए गए। सबसे अहम निर्णय अभिजीत दीपके को पार्टी का राष्ट्रीय संयोजक बनाए जाने का रहा। इसके अलावा कई अन्य पदाधिकारियों को भी संगठन में नई जिम्मेदारियां सौंपी गईं।

हालांकि, बैठक के दौरान ही दीपके के घर के बाहर कुछ युवाओं ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि संगठन की बैठक में जमीनी स्तर पर काम करने वाले वॉलेंटियर्स को शामिल नहीं किया गया, जबकि आंदोलन को सफल बनाने में उनकी भी महत्वपूर्ण भूमिका रही थी।

'हमें दूसरा केजरीवाल नहीं चाहिए' कहकर शुरू किया अनशन

विरोध कर रहे युवाओं ने कहा कि उन्हें संगठन में लोकतांत्रिक व्यवस्था चाहिए। इसी दौरान एक युवक ने यह कहते हुए अनिश्चितकालीन अनशन शुरू कर दिया कि "हमें दूसरा केजरीवाल नहीं चाहिए।" इस बयान के बाद यह विरोध चर्चा का विषय बन गया।

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि आंदोलन के दौरान साथ देने वाले कार्यकर्ताओं की अनदेखी कर सीमित लोगों के बीच फैसले लिए जा रहे हैं, जिससे संगठन के मूल उद्देश्य पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

दोनों प्रदर्शनकारियों ने खुद को जंतर-मंतर आंदोलन का हिस्सा बताया

'पीटीआई-भाषा' के अनुसार, प्रदर्शन कर रहे युवाओं की पहचान अहमदाबाद निवासी मनीष और राहुल पांड्या के रूप में हुई है। दोनों का दावा है कि वे दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन में सक्रिय रूप से शामिल रहे थे।

उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान उन्होंने अन्य वॉलेंटियर्स के साथ मिलकर लगातार योगदान दिया, लेकिन इसके बावजूद उन्हें छत्रपति संभाजीनगर में आयोजित संगठन की बैठक में आमंत्रित नहीं किया गया।

बैठक में नहीं बुलाने पर जताई नाराजगी

प्रदर्शनकारी मनीष ने आरोप लगाया कि उन्होंने संगठन की टीम से मिलने का प्रयास किया, लेकिन उनसे मुलाकात तक नहीं कराई गई। उनका कहना था कि उन्हें बैठक में शामिल होने का अवसर भी नहीं दिया गया।

मनीष ने कहा, "जब सीजेपी का आंदोलन शुरू हुआ था, तब उसका कोई चेहरा नहीं था। मैं अन्य वॉलेंटियर्स के साथ जंतर-मंतर पर आंदोलन में शामिल रहा और अपना योगदान दिया। यहां आने के बाद भी टीम से मिलने की कोशिश की, लेकिन किसी ने मुलाकात नहीं की। मुझे बैठक में बुलाया तक नहीं गया। चचेरे भाई और दोस्त एक साथ बैठकर पूरे देश के आंदोलन का भविष्य तय नहीं कर सकते, क्योंकि यह आंदोलन पूरे देश का था।"

लोकतांत्रिक संगठन की मांग

मनीष ने मांग की कि सीजेपी का संगठन पूरी तरह लोकतांत्रिक तरीके से संचालित किया जाए। उन्होंने कहा कि आंदोलन में योगदान देने वाले सभी लोगों को अपने विचार रखने और संगठन की दिशा तय करने की प्रक्रिया में भागीदारी का अवसर मिलना चाहिए।

उन्होंने दोहराया कि इसी मांग को लेकर वह अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे हैं और संगठन में पारदर्शिता सुनिश्चित किए जाने तक अपना विरोध जारी रखेंगे।

जंतर-मंतर आंदोलन से मिली थी राष्ट्रीय पहचान

अभिजीत दीपके के नेतृत्व में दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों का आंदोलन लंबे समय तक चला था। इस आंदोलन के दौरान सोनम वांगचुक भी अनशन पर रहे। इस आंदोलन ने राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक चर्चा बटोरी थी। खबर के अनुसार, आंदोलन के बाद सरकार को अपने रुख में बदलाव करना पड़ा और धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा।

अगले महीने शुरू होगी 'क्या बोलती पब्लिक' मुहिम

विरोध के बीच अभिजीत दीपके ने संगठन की आगामी रणनीति भी साझा की। छत्रपति संभाजीनगर में आयोजित कोर टीम की बैठक के बाद संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने कहा कि सीजेपी अगले महीने देशभर में 'क्या बोलती पब्लिक' नाम से जनसंवाद अभियान शुरू करेगी।

उन्होंने बताया कि इस अभियान के माध्यम से पार्टी देश के विभिन्न हिस्सों में जाकर लोगों से सीधे संवाद करेगी और उनकी समस्याओं को समझने का प्रयास करेगी।

शिक्षा और बेरोजगारी को प्रमुख मुद्दा बनाएगी सीजेपी

अभिजीत दीपके ने कहा कि सीजेपी एक दबाव समूह के रूप में कार्य करेगी। उनका कहना था कि संगठन शिक्षा और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाएगा और इन्हें राष्ट्रीय राजनीतिक विमर्श के केंद्र में लाने का प्रयास करेगा।

उन्होंने विश्वास जताया कि जनभागीदारी के माध्यम से संगठन अपनी आगामी रणनीति को आगे बढ़ाएगा और लोगों के मुद्दों को प्रमुखता से उठाने का काम करेगा।