तेलंगाना में मेडिकल शिक्षा विभाग के तहत असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है। डॉक्टरों और अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया है कि भर्ती प्रक्रिया में तय नियमों का पालन नहीं किया जा रहा और “लैटरल एंट्री” को ज्यादा प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे सीधे भर्ती (डायरेक्ट रिक्रूटमेंट) के उम्मीदवारों के साथ अन्याय हो रहा है।
यह मामला Hyderabad से जुड़ा है, जहां डॉक्टरों ने डायरेक्टोरेट ऑफ मेडिकल एजुकेशन (DME) के निदेशक डॉ. ए. नरेंद्र कुमार को एक ज्ञापन सौंपा है। इस ज्ञापन में उन्होंने सरकार के आदेश (GO) नंबर 154 का सख्ती से पालन कराने की मांग की है।
डॉक्टरों के अनुसार, इस सरकारी आदेश में भर्ती का एक स्पष्ट और अनिवार्य क्रम तय किया गया है। नियम के मुताबिक हर पांच खाली पदों में से तीन पद सीधे भर्ती से भरे जाने चाहिए, एक पद इन-सर्विस उम्मीदवारों के लिए और एक पद नॉन-टीचिंग कैटेगरी से ट्रांसफर के जरिए भरा जाना चाहिए। उनका कहना है कि यह क्रम केवल औपचारिकता नहीं बल्कि एक अनिवार्य प्रक्रिया है, जिसमें सबसे पहले डायरेक्ट भर्ती ही होनी चाहिए।
अभ्यर्थियों का आरोप है कि विभाग इस तय क्रम को उलटकर पहले लैटरल एंट्री या अन्य श्रेणियों से भर्ती कर रहा है। इससे डायरेक्ट भर्ती के लिए उपलब्ध पद कम हो सकते हैं और कई योग्य उम्मीदवारों को मौका नहीं मिल पा रहा है।
अभ्यर्थियों ने अपने ज्ञापन में Telangana High Court के एक फैसले का भी हवाला दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा था कि भर्ती प्रक्रिया “सीरिएटिम” यानी क्रमवार तरीके से ही की जानी चाहिए और इसमें किसी तरह का बदलाव नहीं होना चाहिए। डॉक्टरों का कहना है कि अगर इस आदेश की अनदेखी की जाती है तो यह नियमों के उल्लंघन के साथ-साथ कोर्ट की अवमानना भी हो सकती है।
डॉक्टरों और अभ्यर्थियों ने इस मुद्दे पर कई गंभीर चिंताएं जताई हैं। उनका कहना है कि इससे भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता प्रभावित हो रही है और योग्य उम्मीदवारों के साथ अन्याय हो सकता है। इसके अलावा, अगर विवाद बढ़ता है तो मेडिकल कॉलेजों में शिक्षकों की कमी भी बनी रह सकती है, जिससे छात्रों की पढ़ाई पर असर पड़ सकता है।
इससे पहले भी असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती को लेकर विवाद सामने आ चुका है। कुछ अभ्यर्थियों ने मेरिट लिस्ट की निष्पक्षता पर सवाल उठाए थे और आरोप लगाया था कि कुछ खास समूहों से जुड़े लोगों को फायदा पहुंचाया गया, जबकि कई योग्य उम्मीदवारों को बाहर कर दिया गया।
अब डॉक्टरों की मांग है कि भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और नियमों के अनुसार किया जाए। उनका कहना है कि सबसे पहले डायरेक्ट भर्ती पूरी की जाए और उसके बाद ही अन्य श्रेणियों को शामिल किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर नियमों का पालन नहीं किया गया, तो वे इस मामले को कानूनी रूप से चुनौती दे सक
ते हैं।
