पुलिस में सिपाही बनने का सपना देखने वाले लाखों युवाओं के लिए आयोजित भर्ती परीक्षा अब बड़े विवादों में घिरती नजर आ रही है। करीब 19,838 पदों के लिए आयोजित बिहार पुलिस सिपाही भर्ती परीक्षा में लाखों अभ्यर्थी शामिल हुए थे। लिखित परीक्षा कई चरणों में आयोजित की गई थी, जिसके बाद शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET) और दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया शुरू हुई। लेकिन इसी बीच भर्ती प्रक्रिया में डमी कैंडिडेट, सॉल्वर गैंग और फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल का बड़ा खुलासा हुआ है।

जांच में मुंगेर जिला कथित तौर पर फर्जीवाड़े का सबसे बड़ा केंद्र बनकर सामने आया है। पुलिस जांच में पता चला है कि कई अभ्यर्थियों की जगह दूसरे लोग परीक्षा में शामिल हुए थे। मामले में अब तक 107 अभ्यर्थियों और सॉल्वर गैंग से जुड़े लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है, जबकि 15 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

कैसे खुली फर्जीवाड़े की पोल?

जानकारी के मुताबिक, भर्ती प्रक्रिया के दौरान बायोमेट्रिक जांच, फोटो मिलान और दस्तावेज सत्यापन में कई गड़बड़ियां सामने आईं। अधिकारियों को शक हुआ कि कुछ उम्मीदवारों की जगह दूसरे लोग परीक्षा देने पहुंचे थे। इसके बाद तकनीकी जांच शुरू की गई, जिसमें कई मामलों में पहचान बदलने और फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल के संकेत मिले।

मुंगेर में सबसे ज्यादा गड़बड़ी

जांच एजेंसियों के अनुसार, मुंगेर से जुड़े कई अभ्यर्थियों के खिलाफ संदिग्ध गतिविधियों के प्रमाण मिले हैं। आरोप है कि कुछ उम्मीदवारों ने सॉल्वर गैंग की मदद लेकर परीक्षा पास करने की कोशिश की। पुलिस अब इस नेटवर्क की जड़ तक पहुंचने की कोशिश कर रही है कि आखिर इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे और कितने उम्मीदवारों ने गलत तरीके अपनाए।

15 गिरफ्तार, कई और रडार पर

अब तक की कार्रवाई में 15 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें कथित सॉल्वर और भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी करने वाले लोग शामिल बताए जा रहे हैं। पुलिस का कहना है कि कई अन्य संदिग्ध भी रडार पर हैं और आने वाले दिनों में कार्रवाई और तेज हो सकती है।

इस खुलासे के बाद बिहार पुलिस सिपाही भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि सख्त निगरानी और तकनीकी जांच की वजह से फर्जीवाड़े का खुलासा हो सका और दोषियों पर कार्रवाई जारी है।