लखनऊ से लेकर सीतापुर तक रातों-रात लगे कुछ पोस्टरों ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव को निशाना बनाते इन पोस्टरों ने न सिर्फ राजनीतिक माहौल गरमा दिया, बल्कि सपा नेताओं को भी खुलकर मैदान में उतरने पर मजबूर कर दिया। सबसे ज्यादा चर्चा उस समय हुई जब धौराहरा से सपा सांसद आनंद भदौरिया खुद सड़क किनारे लगे पोल पर चढ़ गए और विरोधी पोस्टरों को अपने हाथों से उतारने लगे। यह दृश्य सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और राजनीतिक संदेश का केंद्र बन गया।पोस्टर विवाद के बीच पोल पर चढ़े आनंद भदौरिया

पोस्टर विवाद के बीच पोल पर चढ़े आनंद भदौरिया

पोस्टरों से शुरू हुआ नया राजनीतिक विवाद

विवादित पोस्टरों में अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी पर जातिवाद को बढ़ावा देने के आरोप लगाए गए थे। कुछ पोस्टरों में ‘समाजवादी पार्टी’ को ‘समाजयादव पार्टी’ बताते हुए सपा सरकार के दौरान यादव समुदाय को कथित लाभ पहुंचाने का आरोप लगाया गया। वहीं, कुछ बैनरों पर "लाल टोपी, साइकिल निशान, यादववाद इनकी पहचान" जैसे नारे लिखे गए थे। इन पोस्टरों के सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई कि आखिर इनके पीछे कौन है और चुनावी माहौल से पहले ऐसे संदेशों का उद्देश्य क्या है।

आनंद भदौरिया का आक्रामक विरोध, खुद उतारे पोस्टर

सपा सांसद आनंद भदौरिया ने इस पूरे घटनाक्रम को पार्टी और उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष की छवि खराब करने की साजिश बताया। सीतापुर पहुंचकर उन्होंने खुद कई स्थानों से पोस्टर हटवाए। कुछ जगहों पर वे पोल पर चढ़े, तो कहीं हाइड्रा मशीन की मदद से बैनर उतरवाए गए। भदौरिया ने इसे "कायरतापूर्ण और अश्लील हरकत" बताते हुए कहा कि अगर किसी में हिम्मत है तो वह अपना नाम सामने लाए। उन्होंने साफ कहा कि इस मामले में एफआईआर दर्ज कराई जाएगी और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की जाएगी।

सपा का आरोप-छवि धूमिल करने की कोशिश

समाजवादी पार्टी के नेताओं का कहना है कि यह केवल पोस्टरबाजी का मामला नहीं, बल्कि सुनियोजित राजनीतिक अभियान का हिस्सा है। पार्टी का आरोप है कि विपक्षी ताकतें सपा और अखिलेश यादव की बढ़ती राजनीतिक सक्रियता से घबराई हुई हैं, इसलिए इस तरह के पोस्टरों के जरिए जनता के बीच भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही है। सपा कार्यकर्ताओं ने कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन भी किया और प्रशासन से पोस्टर लगाने वालों की पहचान कर कार्रवाई की मांग की।

यूपी की राजनीति में पोस्टर वार की पुरानी परंपरा

उत्तर प्रदेश की राजनीति में पोस्टर और बैनर लंबे समय से राजनीतिक संदेश और विरोध का माध्यम रहे हैं। चुनावी मौसम हो या बड़ा राजनीतिक मुद्दा, पोस्टर वार अक्सर राजनीतिक दलों के बीच टकराव का कारण बनता रहा है। हालांकि, इस बार मामला इसलिए ज्यादा चर्चा में है क्योंकि एक सांसद खुद सड़क पर उतरकर पोस्टर हटाते नजर आए। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल पोस्टर हटाने की घटना नहीं, बल्कि अपने नेता के प्रति सार्वजनिक निष्ठा दिखाने और कार्यकर्ताओं को संदेश देने की राजनीतिक रणनीति भी हो सकती है।