मुंबई: देश की राजनीति में आने वाले कुछ महीनों के भीतर एक बहुत बड़ा और हैरान कर देने वाला सियासी उलटफेर देखने को मिल सकता है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के प्रमुख राज ठाकरे ने एक ऐसा विस्फोटक बयान दिया है, जिससे राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई है। राज ठाकरे ने दावा किया है कि आने वाले 4 से 5 महीनों के भीतर देश की राजनीतिक स्थिति में ऐसा जबरदस्त बदलाव आ सकता है, जिसके बारे में किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी। उन्होंने यहां तक कह दिया कि यदि कुछ समय के लिए देश में प्रधानमंत्री का पद भी खाली रह जाए, तो उन्हें बिल्कुल भी हैरानी नहीं होगी।
मुंबई प्रेस क्लब में दिया गया वह बयान, जिसने मचा दिया हड़कंप
मुंबई प्रेस क्लब में 'द डांस ऑफ डेमोक्रेसी' नामक एक फोटो प्रदर्शनी के उद्घाटन के अवसर पर राज ठाकरे मीडिया से मुखातिब हुए थे। इस दौरान उन्होंने देश के मौजूदा हालातों, युवाओं के गुस्से और प्रशासनिक व्यवस्था पर खुलकर अपनी बात रखी। मनसे प्रमुख ने दो टूक शब्दों में कहा कि देश के भीतर जनता का असंतोष अब चरम सीमा पर पहुंच चुका है, जो कभी भी एक बड़े विद्रोह का रूप ले सकता है।
बेरोजगारी, महंगाई और पेपर लीक बना सरकार के लिए नासूर
राज ठाकरे ने देश में लगातार विकराल होती समस्याओं जैसे कि बढ़ती बेरोजगारी, आसमान छूती महंगाई और प्रतियोगी परीक्षाओं के लगातार लीक हो रहे पेपरों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि दिल्ली की सड़कों पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर जिस तरह से पुलिसिया कार्रवाई की गई, वह बेहद शर्मनाक है।
उन्होंने आगे कहा, "सड़कों पर विरोध प्रदर्शन कर रहे बच्चों ने कुछ भी गलत नहीं किया था, लेकिन उन्हें बेरहमी से पीटा गया। क्या यही देश का लोकतंत्र है? आज के समय में असली लोकतंत्र केवल अमेरिका जैसे देशों में बचा है, भारत में इसकी स्थिति दयनीय होती जा रही है।"
महाराष्ट्र पर मंडरा रहा है सूखे और भुखमरी का बड़ा खतरा?
राजनीतिक हालातों के अलावा राज ठाकरे ने महाराष्ट्र की भौगोलिक और कृषि से जुड़ी गंभीर समस्याओं पर भी चिंता जाहिर की। उन्होंने राज्य में गहराते सूखे के संकट का हवाला देते हुए चेतावनी दी कि आने वाले दिनों में स्थिति और भी ज्यादा भयानक हो सकती है। उनके अनुसार, यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो राज्य में अनाज की भारी किल्लत पैदा हो जाएगी और ऐसी विकट परिस्थितियों में सरकार के लिए हालात को संभालना लगभग नामुमकिन साबित होगा।
2018 से चली आ रही बैलेट पेपर की मांग को फिर से दोहराया
चुनावी प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए राज ठाकरे ने एक बार फिर से देश में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) की जगह बैलेट पेपर से चुनाव कराने की पुरजोर मांग की है। उन्होंने खुलासा किया कि वह साल 2018 से ही इस मुहीम में लगे हुए हैं और इस सिलसिले में सोनिया गांधी, शरद पवार और ममता बनर्जी जैसे दिग्गज नेताओं से भी मुलाकात कर चुके हैं।
राज ठाकरे का मानना है कि चुनाव में हार या जीत तो खेल का हिस्सा है, लेकिन देश के हर मतदाता के मन में इस बात का पूर्ण संतोष होना चाहिए कि उसने जिस उम्मीदवार के पक्ष में बटन दबाया है, उसका वोट उसी को गया है। उन्होंने विकसित देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि चुनाव के नतीजे घोषित करने में चार दिन का अतिरिक्त समय भी लग जाता है, तो इसमें कोई जल्दबाजी दिखाने की आवश्यकता नहीं है, बशर्ते चुनावी प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए।
