
ईरान नीति पर अमेरिकी संसद के प्रस्ताव के बाद प्रतिक्रिया देते अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप।Source : Social media
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अब इस मुद्दे ने अमेरिकी राजनीति में भी नया विवाद खड़ा कर दिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान नीति को लेकर अमेरिकी संसद के भीतर मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। हाल ही में संसद के दोनों सदनों में एक ऐसे प्रस्ताव को समर्थन मिला है, जिसमें ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई पर नियंत्रण और अमेरिकी सेना की भूमिका को सीमित करने की मांग की गई है। इस प्रस्ताव को ट्रंप की विदेश नीति के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।प्रस्ताव को समर्थन मिलने के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने अपने विरोधियों पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ नेता अमेरिका के हितों की बजाय ईरान के पक्ष में खड़े दिखाई दे रहे हैं। ट्रंप का कहना है कि ऐसे समय में, जब अमेरिका राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले ले रहा है, इस तरह के प्रस्ताव देश की रणनीतिक स्थिति को कमजोर कर सकते हैं।दरअसल, संसद में पेश किया गया यह प्रस्ताव राष्ट्रपति की युद्ध संबंधी शक्तियों को लेकर है। कई सांसदों का मानना है कि कांग्रेस की मंजूरी के बिना किसी बड़े सैन्य अभियान को आगे नहीं बढ़ाया जाना चाहिए। इसी मुद्दे को लेकर ट्रंप और उनके विरोधियों के बीच सियासी टकराव और तेज हो गया है। अब यह मामला केवल विदेश नीति तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि अमेरिकी राजनीति में भी चर्चा का बड़ा विषय बन गया है।
अमेरिकी संसद ने ट्रंप की शक्तियों पर लगाया अंकुश
अमेरिकी सीनेट ने 50-48 के करीबी अंतर से एक प्रस्ताव को मंजूरी दी है, जिसमें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कांग्रेस की अनुमति के बिना ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई जारी रखने से रोकने की मांग की गई है। इससे पहले अमेरिकी प्रतिनिधि सभा भी इसी तरह का प्रस्ताव पारित कर चुकी थी। ऐसे में पहली बार अमेरिकी संसद के दोनों सदनों ने मिलकर ईरान मुद्दे पर राष्ट्रपति की युद्ध संबंधी शक्तियों को सीमित करने की कोशिश की है। इस कदम को ट्रंप प्रशासन की ईरान नीति के लिए एक बड़ा राजनीतिक संदेश माना जा रहा है।
प्रस्ताव पर क्यों भड़के ट्रंप?
संसद के इस फैसले के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने कड़ी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने इस प्रस्ताव को गलत समय पर लिया गया फैसला बताते हुए कहा कि इससे अमेरिका की रणनीतिक स्थिति कमजोर हो सकती है। ट्रंप का मानना है कि ऐसे कदम अमेरिका के विरोधियों को गलत संदेश देते हैं और देश की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक बहस का विषय बना देते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रस्ताव का समर्थन करने वाले कुछ नेता राष्ट्रीय सुरक्षा के बजाय राजनीतिक फायदे को प्राथमिकता दे रहे हैं। ट्रंप ने यहां तक कह दिया कि ऐसे लोग अमेरिका के हितों की बजाय ईरान के पक्ष में खड़े नजर आ रहे हैं।
रिपब्लिकन सांसदों ने भी ट्रंप का साथ नहीं दिया
इस प्रस्ताव को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की हो रही है कि कई रिपब्लिकन सांसदों ने भी ट्रंप के खिलाफ जाकर मतदान किया। सीनेट में चार रिपब्लिकन सांसदों ने प्रस्ताव के पक्ष में वोट दिया, जिसे राष्ट्रपति ट्रंप के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। इन सांसदों का कहना है कि अमेरिकी संविधान के तहत युद्ध और सैन्य कार्रवाई जैसे महत्वपूर्ण फैसलों में कांग्रेस की भूमिका बेहद अहम है। उनका तर्क है कि किसी भी राष्ट्रपति को कांग्रेस की मंजूरी के बिना लंबे समय तक सैन्य अभियान चलाने का अधिकार नहीं होना चाहिए। यही वजह है कि उन्होंने प्रस्ताव का समर्थन किया।
इस प्रस्ताव का क्या असर पड़ेगा?
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रस्ताव फिलहाल अधिकतर प्रतीकात्मक महत्व रखता है और इसके कानूनी प्रभाव को लेकर अभी भी बहस जारी है। इसके बावजूद राजनीतिक स्तर पर इसे ट्रंप प्रशासन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। इस वोटिंग ने साफ कर दिया है कि ईरान को लेकर अमेरिका के भीतर एकमत राय नहीं है और कांग्रेस के कई सदस्य राष्ट्रपति की नीति से सहमत नहीं हैं। आने वाले समय में यह मुद्दा अमेरिकी राजनीति और राष्ट्रपति चुनाव की बहस में भी अहम भूमिका निभा सकता है।
