erer | Source: ereनई दिल्ली: भारत में ई-सिगरेट पर शिकंजा कसने के बाद अब केंद्र सरकार ने युवाओं और किशोरों को अपनी गिरफ्त में ले रहे 'निकोटीन पाउच' के खिलाफ बेहद कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने देश के सभी राज्यों को इन अवैध उत्पादों की बिक्री पर रोक लगाने और सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। सरकार का मानना है कि सेहत के लिए घातक ये पाउच बड़े पैमाने पर युवाओं को नशे की लत में धकेल रहे हैं, जिसके बाद से प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।

क्या हैं ये निकोटीन पाउच और क्यों मंडरा रहा है बड़ा खतरा?

जानकारी के लिए बता दें कि निकोटीन पाउच छोटे-छोटे ऐसे पैकेट होते हैं जिन्हें होंठ के नीचे रखा जाता है। इनमें तंबाकू तो नहीं होता, लेकिन भारी मात्रा में निकोटीन जरूर पाया जाता है, जो बेहद तेजी से लत लगाता है। देश में जहां हर साल तंबाकू के सेवन से लाखों लोगों की जान जाती है, वहीं ये पाउच अवैध रूप से तस्करी के जरिए भारत में लाए जा रहे हैं। ऑनलाइन माध्यमों और स्थानीय दुकानों के जरिए ये ज़हर युवाओं और बच्चों तक आसानी से पहुंच रहा है, जिससे स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंताएं सातवें आसमान पर पहुंच गई हैं।

18 से 40 साल के युवा बन रहे हैं मुख्य शिकार

हाल ही में सामने आई सरकारी रिपोर्ट्स के मुताबिक, 18 से 40 वर्ष की आयु के युवा वर्ग में फिलिप मॉरिस का 'ज़िन' (Zyn) और स्वीडिश स्मोकलेस सॉल्यूशंस का 'व्हाइट फॉक्स' (White Fox) जैसे विदेशी ब्रांड धड़ल्ले से इस्तेमाल किए जा रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी किए गए हालिया दिशा-निर्देशों में साफ तौर पर कहा गया है कि बच्चों और युवाओं को इस जानलेवा लत से बचाने के लिए राज्यों को तुरंत प्रभाव से ज़ब्ती और कानूनी कार्रवाई शुरू करनी चाहिए, ताकि सार्वजनिक स्वास्थ्य को सुरक्षित रखा जा सके।

एयरपोर्ट के ड्यूटी-फ्री स्टोर भी आए थे कानूनी घेरे में

इस अवैध कारोबार का दायरा कितना बड़ा है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कुछ समय पहले मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जिसका संचालन अडानी ग्रुप द्वारा किया जाता है) के ड्यूटी-फ्री स्टोर पर भी बिना अनुमति के इन निकोटीन पाउच को बेचने का मामला सामने आया था। हालांकि, कोर्ट ने कंपनी के उस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें घरेलू कानून लागू न होने की दलील दी गई थी, और अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि देश का कानून हर जगह और हर किसी पर एक समान रूप से लागू होता है।

नए उत्पादों की एंट्री पर लगा पूरी तरह से ताला

सरकार ने साफ कर दिया है कि निकोटीन से जुड़े किसी भी नए उत्पाद या फॉर्मूलेशन को देश में बेचने की कोई अनुमति नहीं दी जाएगी। 'ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड' की हालिया बैठक में यह कड़ा निर्णय लिया गया है कि इन पाउचों के पक्ष में ऐसा कोई भी पुख्ता वैज्ञानिक प्रमाण मौजूद नहीं है जो यह साबित कर सके कि इनसे धूम्रपान छुड़ाने में मदद मिलती है। इसके विपरीत, यह युवाओं के जीवन को बर्बादी के रास्ते पर धकेल रहा है, जिसके चलते सरकार अब किसी भी तरह की ढील देने के मूड में बिल्कुल नहीं है।