देश की सबसे कठिन इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं में शामिल जेईई को पास करने के लिए अक्सर बेहतर संसाधनों, कोचिंग और शांत माहौल की जरूरत बताई जाती है। लेकिन मुंबई के अभिषेक सुजीत शर्मा ने बेहद सीमित साधनों के बीच अपनी मेहनत के दम पर जेईई में सफलता हासिल की और अब आईआईटी दिल्ली में बीटेक की पढ़ाई कर रहे हैं। उनकी कहानी आर्थिक रूप से कमजोर परिस्थितियों में पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों के संघर्ष को सामने लाती है।
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अभिषेक लोकमान्य तिलक नगर की झुग्गी बस्ती में किराए के छोटे से घर में रहते थे। परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी थी कि महंगी कोचिंग लेना आसान नहीं था। इसके बावजूद उन्होंने जेईई की तैयारी के लिए स्वाध्याय और ऑनलाइन पढ़ाई का सहारा लिया।
पिता स्टील कंपनी में करते हैं मजदूरी
अभिषेक के पिता स्टील बनाने वाली कंपनी में मजदूरी करते हैं। परिवार का खर्च उनकी सीमित मासिक आय से चलता है। जिस झुग्गी में अभिषेक अपने परिवार के साथ रहते हैं, उसका मासिक किराया करीब 3 हजार रुपये बताया गया है। ऐसे में पढ़ाई के लिए अतिरिक्त खर्च जुटाना परिवार के लिए चुनौती थी।
अभिषेक ने आर्थिक मुश्किलों को अपनी पढ़ाई के रास्ते में बाधा नहीं बनने दिया। उन्होंने महंगी कोचिंग के बजाय उपलब्ध संसाधनों से जेईई की तैयारी शुरू की और ऑनलाइन माध्यम से पढ़ाई को आगे बढ़ाया।
इंटरनेट का रिचार्ज खत्म हुआ तो छत बनी पढ़ाई की जगह
ऑनलाइन पढ़ाई के लिए इंटरनेट जरूरी था, लेकिन नियमित इंटरनेट रिचार्ज कराना भी उनके लिए आसान नहीं था। इंटरनेट डेटा खत्म होने के बाद अभिषेक पड़ोसी के वाई-फाई का इस्तेमाल करने के लिए घर की छत पर चले जाते थे।
यहीं से उन्होंने ऑनलाइन अध्ययन सामग्री और कक्षाओं की मदद से अपनी तैयारी जारी रखी। सीमित संसाधनों के बावजूद लगातार पढ़ाई करते हुए उन्होंने जेईई की परीक्षा के अगले चरण के लिए अपनी जगह बनाई।
जेईई एडवांस्ड में हासिल की 2456वीं रैंक
जेईई मेन्स में प्रदर्शन के बाद अभिषेक उन शीर्ष 2.5 लाख अभ्यर्थियों में शामिल हुए, जिन्हें जेईई एडवांस्ड में शामिल होने का अवसर मिला। इसके बाद जेईई एडवांस्ड के परिणाम में उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 2456 हासिल की। उनकी ओबीसी-एनसीएल रैंक 415 रही।
इस प्रदर्शन के बाद अभिषेक को आईआईटी दिल्ली में बीटेक में प्रवेश मिला। मुंबई की झुग्गी में सीमित संसाधनों के साथ शुरू हुई उनकी पढ़ाई अब देश के प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों में से एक तक पहुंच चुकी है।
झुग्गी से आईआईटी दिल्ली तक का सफर
अभिषेक की कहानी में महंगी कोचिंग या अत्याधुनिक सुविधाओं के बजाय स्वाध्याय, ऑनलाइन संसाधनों और लगातार मेहनत की भूमिका सामने आती है। पिता की मजदूरी से चलने वाले परिवार से आने वाले अभिषेक ने उपलब्ध साधनों का इस्तेमाल करते हुए जेईई की तैयारी की और आईआईटी दिल्ली तक का सफर तय किया।
उनकी सफलता की कहानी यह दिखाती है कि आर्थिक रूप से सीमित परिस्थितियों में पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों के सामने चुनौतियां जरूर होती हैं, लेकिन अभिषेक ने अपने उपलब्ध संसाधनों के साथ तैयारी जारी रखकर जेईई में उल्लेखनीय परिणाम हासिल किया।
