
कैराना सांसद इकरा हसन।Source : Chrome
समाजवादी पार्टी की युवा सांसद इकरा हसन आज देश की चर्चित महिला नेताओं में शामिल हैं। कैराना लोकसभा सीट से सांसद बनने वाली इकरा ने उच्च शिक्षा, जमीनी राजनीति और चुनावी संघर्ष के दम पर अपनी अलग पहचान बनाई है। राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखने के बावजूद उन्होंने अपनी मेहनत और नेतृत्व क्षमता से राष्ट्रीय राजनीति में जगह बनाई। आइए जानते हैं इकरा हसन की सफलता, शिक्षा और राजनीतिक सफर की पूरी कहानी।
कौन हैं इकरा हसन?
इकरा हसन का जन्म 26 अगस्त 1994 को उत्तर प्रदेश के कैराना में हुआ। वह समाजवादी पार्टी की सांसद हैं और जून 2024 से कैराना लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। इकरा ऐसे परिवार से आती हैं, जहां कई पीढ़ियों से राजनीति से जुड़ाव रहा है।
राजनीतिक परिवार से है संबंध
इकरा हसन के पिता चौधरी मुनव्वर हसन लोकसभा और राज्यसभा दोनों के सदस्य रह चुके हैं। उनकी मां तबस्सुम हसन भी कैराना से सांसद रही हैं। उनके दादा अख्तर हसन भी राजनीति में सक्रिय थे, जबकि उनके भाई नाहिद हसन उत्तर प्रदेश विधानसभा के कई बार विधायक रह चुके हैं।
शिक्षा में भी रहीं अव्वल
इकरा ने नई दिल्ली के क्वीन मैरी स्कूल से स्कूली शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद दिल्ली विश्वविद्यालय के लेडी श्रीराम कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। उच्च शिक्षा के लिए वह लंदन गईं और SOAS University of London से International Politics and Law में मास्टर ऑफ साइंस (MSc) की डिग्री हासिल की। विदेश में पढ़ाई के दौरान उन्होंने वैश्विक राजनीति, कानून और लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं का गहराई से अध्ययन किया।
राजनीति में शुरुआत आसान नहीं रही
इकरा हसन ने वर्ष 2016 में जिला पंचायत चुनाव से अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की। हालांकि उन्हें उस चुनाव में करीब 5 हजार वोटों से हार का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने इसे अपनी राजनीतिक यात्रा का अंत नहीं बनने दिया।
भाई के चुनाव प्रचार से मिली पहचान
जब उनके भाई नाहिद हसन कानूनी मामलों के कारण जेल में थे, तब इकरा हसन ने पूरे विधानसभा चुनाव अभियान की कमान संभाली। उन्होंने गांव-गांव जाकर लोगों से संपर्क किया और चुनाव प्रचार का नेतृत्व किया। इस दौरान उनकी संगठन क्षमता और जनसंपर्क कौशल की काफी चर्चा हुई।
2024 लोकसभा चुनाव में बड़ी जीत
लोकसभा चुनाव 2024 में समाजवादी पार्टी ने इकरा हसन को कैराना सीट से उम्मीदवार बनाया। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार प्रदीप कुमार चौधरी को 69,116 वोटों के अंतर से हराकर पहली बार लोकसभा का चुनाव जीता। इस जीत के बाद वह राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गईं।
संसद में उठाए शिक्षा और अल्पसंख्यक मुद्दे
सांसद बनने के बाद इकरा हसन ने संसद में शिक्षा और अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े कई मुद्दे उठाए। शिक्षा मंत्रालय के बजट पर चर्चा के दौरान उन्होंने अल्पसंख्यक शिक्षा, मौलाना आजाद फाउंडेशन को बंद किए जाने और पाठ्यपुस्तकों में इतिहास एवं विज्ञान से जुड़े विषयों में किए गए बदलावों पर अपनी चिंता व्यक्त की।
