
Source: Navbharat Times
दरभंगा की रहने वाली कायनात खानम की कहानी मेहनत, हिम्मत और लगन की मिसाल है। ट्रक चालक की बेटी होने के बावजूद उन्होंने आर्थिक परेशानियों को अपने सपनों के बीच नहीं आने दिया। डॉक्टर बनने का सपना लेकर कायनात ने लगातार मेहनत की और हर मुश्किल का डटकर सामना किया। कायनात खानम ने 3 बार असफलता के बाद नीट यूजी एग्जाम क्रैक किया है।
नीट परीक्षा से जुड़े विवाद और परीक्षा रद्द होने की खबर ने उन्हें काफी परेशान कर दिया था, लेकिन परिवार के साथ और अपने मजबूत इरादों के दम पर उन्होंने खुद को संभाला। कठिन परिस्थितियों के बीच भी कायनात ने हार नहीं मानी और सफलता की ओर कदम बढ़ाती रहीं। आज उनकी सफलता न सिर्फ उनके परिवार के लिए खुशी और गर्व की बात है, बल्कि उन सभी छात्रों के लिए प्रेरणा है जो कम संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं।
ट्रक चालक की बेटी कायनात ने NEET परीक्षा में हासिल किये 593 अंक
दरभंगा जिला के बिरौल प्रखंड के एक छोटे से गांव मोरवारा में रहने वाले इम्तियाज अहमद खान ट्रक ड्राइवर की बेटी कायनात खानम ने गरीबी को मात देकर री-नीट की परीक्षा में 593 पाकर 1407 वां स्थान हासिल किया है। कायनात का छोटा सा परिवार जिसमे, मम्मी पापा, एक छोटा भाई और एक बहन है। कायनात के पिता दरभंगा शहर में किराए के मकान में बच्चों को पढ़ा रहे हैं। कायनात के घर के हालात शुरू से ही ठीक नही थे। वो बताती हैं कि, उनकी शुरुआती तालीम नाना नानी के पास रहकर हासिल की है।
3 बार असफलता, पेपर लीक होने के बाद डिप्रेशन में पहुंची
कायनात ने मुश्किलों का सामना करते हुए अपनी पढाई जारी रखी, उनका राह आसान नहीं था । उन्होंने NEET की तैयारी शुरू की लेकिन पहले तीन बार वह असफल रहीं। हर बार असफलता मिली लेकिन हिम्मत नहीं हारी। हर बार वह अपनी गलतियों से सीखती गई और 2026 में हुई नीट परीक्षा में पेपर लीक से परेशान हो गई। कुछ दिनों में वह डिप्रेशन में चली गईं लेकिन शिक्षक सुमित चौबे के सहयोग से री-नीट की परीक्षा में कायनात ने 720 में से 593 और अंक हासिल किए।
पहली असफलता के बाद शिक्षक ने बढ़ाया हौसला
कायनात खानम बताती हैं कि शुरुआत में उनके पिता ने ऑनलाइन पढ़ाई की सुविधा दिलाई थी, लेकिन उन्हें ऑफलाइन पढ़ाई ज्यादा अच्छी लगी। दो साल तक उन्होंने कोचिंग में मेहनत की, लेकिन पहली बार नीट में मनचाही सफलता नहीं मिल सकी। इसके बाद घरवालों ने उन्हें तैयारी छोड़ने की सलाह दी, लेकिन उनके शिक्षक सुमित सर ने उनका हौसला बढ़ाया और एक और कोशिश करने के लिए प्रेरित किया। शिक्षक की बात मानकर कायनात ने दोबारा पूरी मेहनत के साथ तैयारी शुरू की और आखिरकार सफलता हासिल कर ली।
रोज 12 से 13 घंटे पढ़ाई कर पूरा किया डॉक्टर बनने का सपना
कायनात के पिता इम्तियाज अहमद खान ने बताया कि पहले उनका परिवार गांव में रहता था, लेकिन बेटी के डॉक्टर बनने के सपने को पूरा करने के लिए वे दरभंगा में किराये का मकान लेकर रहने लगे। कायनात ने बताया कि नीट परीक्षा रद्द होने की खबर से वह काफी परेशान हो गई थीं, क्योंकि उन्हें लगा था कि दोबारा होने वाली परीक्षा ज्यादा कठिन होगी। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और रोज 12 से 13 घंटे पढ़ाई की। कायनात अपनी इस सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और शिक्षकों को देती हैं, जिनके सहयोग से उन्होंने मेडिकल की कठिन परीक्षा में कामयाबी हासिल की।
