erer | Source: ereपटना। बिहार की राजधानी पटना में ट्रैफिक जाम की समस्या से निपटने के लिए अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई की मदद लेने की तैयारी है। शहर की यातायात व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित, तेज और सुरक्षित बनाने के लिए एक तकनीकी नियंत्रण प्रणाली लागू करने का प्रस्ताव सामने आया है। इसके तहत एआई आधारित प्रणाली संभावित जाम का अनुमान पहले ही लगाएगी और स्थिति बिगड़ने से पहले वाहनों को वैकल्पिक मार्गों की ओर मोड़ने की व्यवस्था की जाएगी।

जाम लगने से पहले ही बदल जाएगा ट्रैफिक का रास्ता

शनिवार को परिवहन विभाग के अधिकारियों और विशेषज्ञों की महत्वपूर्ण बैठक में पटना की यातायात व्यवस्था को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक की अध्यक्षता विभागीय सचिव पंकज कुमार पाल ने की। इसमें शहर की भौगोलिक संरचना, बढ़ती आबादी, लगातार बढ़ते वाहनों के दबाव, अतिक्रमण, यातायात नियमों और वर्तमान ट्रैफिक प्रबंधन से जुड़ी चुनौतियों का आंकड़ों के आधार पर विश्लेषण किया गया।

प्रस्तावित एआई आधारित व्यवस्था की खास बात यह होगी कि यातायात दबाव बढ़ने से पहले ही संभावित समस्या का अनुमान लगाने की कोशिश की जाएगी। चर्चा के अनुसार, एआई संचालित मॉडल करीब 30 से 40 मिनट पहले संभावित ट्रैफिक जाम का पूर्वानुमान दे सकेगा। इसके बाद सिग्नल व्यवस्था और यातायात मार्गों में जरूरी बदलाव स्वचालित तरीके से लागू करने की दिशा में काम किया जाएगा।

पटना के इन इलाकों पर खास नजर

बैठक में पटना के उन प्रमुख इलाकों पर भी विशेष चर्चा हुई जहां अक्सर यातायात दबाव और जाम की स्थिति सामने आती है। इनमें डाक बंगला, पटना रेलवे स्टेशन रोड, जीपीओ गोलंबर, एग्जीबिशन रोड, बोरिंग रोड, गांधी मैदान, पीएमसीएच, अशोक राजपथ, सगुना मोड़, अनीसाबाद और बेली रोड शामिल हैं।

इन क्षेत्रों में वाहनों की संख्या, सड़क की उपलब्ध चौड़ाई, अतिक्रमण और अनियंत्रित ठहराव जैसी समस्याओं को ध्यान में रखते हुए यातायात प्रबंधन को बेहतर बनाने के उपायों पर मंथन किया गया। सड़क हादसों को कम करने और दुर्घटना होने पर राहत एवं बचाव व्यवस्था को तेज करने पर भी विशेष जोर दिया गया।

हादसा होते ही एआई भेजेगा एंबुलेंस को अलर्ट

प्रस्तावित व्यवस्था में सड़क हादसों की एआई के जरिए स्वचालित पहचान का प्रावधान भी चर्चा में आया है। हादसे की पहचान होने के बाद आसपास उपलब्ध एंबुलेंस को तत्काल अलर्ट भेजने की व्यवस्था की जाएगी। इसके बाद घायल को अस्पताल तक जल्द पहुंचाने के लिए ग्रीन कॉरिडोर का सुझाव दिया जाएगा।

इस व्यवस्था का लक्ष्य आपात स्थिति में एंबुलेंस को अधिकतम 10 मिनट के भीतर अस्पताल तक पहुंचाने का है। इसके लिए रास्ते में आने वाले यातायात को नियंत्रित करने और एंबुलेंस के लिए रास्ता सुगम बनाने की व्यवस्था की जाएगी। इससे सड़क दुर्घटना के बाद इलाज तक पहुंचने में लगने वाला समय कम करने में मदद मिल सकती है।

पटना के मौजूदा कमांड सेंटर में जुड़ेगी नई तकनीकी परत

यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए पटना के एकीकृत कमांड एंड कंट्रोल सेंटर में पहले से मौजूद बुनियादी ढांचे का अधिकतम इस्तेमाल करने पर भी जोर दिया गया है। इसी व्यवस्था के ऊपर एक नई इंटेलिजेंस लेयर लागू करने का प्रस्ताव रखा गया है।

इस तकनीकी परत में एआई, आंकड़ा विश्लेषण और एकीकृत मंच का इस्तेमाल कर शहर के अलग-अलग हिस्सों से मिलने वाली यातायात संबंधी जानकारी का बेहतर उपयोग करने की योजना है। इसका उद्देश्य केवल किसी एक स्थान पर जाम लगने के बाद प्रतिक्रिया देना नहीं, बल्कि संभावित समस्या का पहले से अनुमान लगाकर यातायात व्यवस्था को उसके अनुरूप संचालित करना है।

ई-रिक्शा और ऑटो के लिए भी बनेगी अलग व्यवस्था

बैठक में ई-रिक्शा और ऑटो के यातायात को नियंत्रित करने के लिए भौगोलिक सीमा आधारित व्यवस्था यानी जियोफेंसिंग, वर्चुअल स्टैंड और समय-सारणी आधारित संचालन जैसे विकल्पों पर चर्चा हुई। इसके जरिए इन वाहनों के अनियंत्रित आवागमन और सड़क किनारे ठहराव को नियंत्रित करने की कोशिश की जाएगी।

स्टेशन, प्रमुख स्थानों और बाजार क्षेत्रों में होने वाले अनियंत्रित ठहराव को भी नियंत्रित करने की योजना है। इसके अलावा मेट्रो स्टेशनों के आसपास यात्रियों की भीड़ और यात्रियों को उतारने-बैठाने की व्यवस्था को भी अधिक सुचारू बनाने पर विचार किया गया।

ट्रैफिक जवानों की निगरानी भी तकनीक से होगी

नई व्यवस्था में यातायात नियंत्रण के लिए तैनात जवानों की उपस्थिति की निगरानी के लिए अटेंडेंस मॉनीटरिंग सिस्टम लागू करने का प्रस्ताव भी रखा गया है। इससे यह देखा जा सकेगा कि निर्धारित स्थानों पर यातायात नियंत्रण के लिए तैनात कर्मियों की उपस्थिति और व्यवस्था किस तरह संचालित हो रही है।

तकनीक आधारित निगरानी को यातायात प्रबंधन के व्यापक ढांचे से जोड़ने की योजना है, ताकि सड़क पर मौजूद यातायात व्यवस्था और नियंत्रण केंद्र से मिलने वाली जानकारी के बीच बेहतर समन्वय बनाया जा सके।

अवैध पार्किंग और अतिक्रमण पर भी नजर

पटना में जाम की एक बड़ी वजह सड़क किनारे होने वाली अनधिकृत पार्किंग और अतिक्रमण भी है। प्रस्तावित व्यवस्था में अनधिकृत पार्किंग की पहचान करने और उसे नियंत्रित करने पर जोर दिया गया है। इसके साथ ही सड़क की प्रभावी चौड़ाई बनाए रखने की दिशा में भी कार्रवाई की व्यवस्था पर चर्चा हुई।

यदि सड़क के किनारे अनधिकृत रूप से वाहन खड़े होते हैं, तो इससे उपलब्ध सड़क की चौड़ाई कम हो जाती है और यातायात की गति प्रभावित होती है। ऐसे स्थानों की पहचान कर यातायात प्रवाह को बेहतर बनाने की योजना बनाई जा रही है।

बारिश और जलजमाव में पहले ही बदले जाएंगे मार्ग

पटना में बारिश और जलजमाव के कारण भी कई बार यातायात प्रभावित होता है। प्रस्तावित तकनीकी प्रणाली के जरिए ऐसे मार्गों की पहले से पहचान और सूचना उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है, ताकि जलजमाव से प्रभावित रास्तों पर वाहनों का दबाव बढ़ने से पहले ही उन्हें वैकल्पिक मार्गों की ओर मोड़ा जा सके।

इसका उद्देश्य विशेष रूप से आपातकालीन सेवाओं को प्रभावित होने से बचाना है। यदि किसी मार्ग पर जलजमाव या अन्य कारण से यातायात बाधित होने की संभावना है, तो पहले से वैकल्पिक यातायात व्यवस्था तैयार करने की दिशा में काम किया जाएगा।

पटना की यातायात व्यवस्था को तकनीक से बदलने की तैयारी

पटना में प्रस्तावित एआई आधारित यातायात नियंत्रण प्रणाली का उद्देश्य शहर में जाम की समस्या को केवल तत्काल उपायों से नहीं, बल्कि आंकड़ों और तकनीक के आधार पर व्यवस्थित तरीके से नियंत्रित करना है। संभावित जाम का पूर्वानुमान, स्वचालित सिग्नल और डायवर्जन, हादसों की पहचान, एंबुलेंस को तत्काल सूचना, ग्रीन कॉरिडोर, अवैध पार्किंग की निगरानी और जलजमाव वाले मार्गों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था इस प्रस्ताव के प्रमुख हिस्से हैं।