देर रात तक मोबाइल चलाना, काम करना या मनोरंजन के लिए जागना आज कई लोगों की आदत बन चुकी है। लेकिन एक नई स्टडी ने इस आदत को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। शोध के अनुसार, नियमित रूप से देर रात तक जागने और पर्याप्त नींद न लेने से हृदय रोग, टाइप-2 डायबिटीज, मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं और समय से पहले मौत का खतरा बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अच्छी सेहत के लिए केवल पर्याप्त घंटों की नींद ही नहीं, बल्कि सही समय पर सोना और जागना भी उतना ही जरूरी है।
Sleep
स्टडी में क्या सामने आया?
हालिया शोध में पाया गया कि जो लोग लगातार देर रात तक जागते हैं और उनकी नींद का समय अनियमित रहता है, उनमें समय से पहले मृत्यु का जोखिम बढ़ सकता है। शोधकर्ताओं के अनुसार, शरीर की जैविक घड़ी (Body Clock) के लगातार बिगड़ने से कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। यही कारण है कि नियमित और समय पर नींद को स्वस्थ जीवनशैली का अहम हिस्सा माना जाता है।
दिल की बीमारी और डायबिटीज का खतरा क्यों बढ़ता है?
विशेषज्ञों के मुताबिक, देर रात तक जागने से शरीर का हार्मोनल संतुलन प्रभावित होता है। इससे ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और सूजन (Inflammation) बढ़ सकती है। लंबे समय तक ऐसा होने पर हृदय रोग, टाइप-2 डायबिटीज, मोटापा और मेटाबॉलिक सिंड्रोम जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा शरीर की इंसुलिन संवेदनशीलता भी प्रभावित हो सकती है।
मानसिक स्वास्थ्य और दिनचर्या पर भी पड़ता है असर
पर्याप्त और समय पर नींद न लेने से तनाव, चिंता, चिड़चिड़ापन और ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। लगातार नींद की कमी से कार्यक्षमता घटती है, याददाश्त कमजोर हो सकती है और दुर्घटनाओं का जोखिम भी बढ़ जाता है। बच्चों, युवाओं और कामकाजी लोगों में इसका प्रभाव और अधिक देखा गया है।
कैसे रखें अपनी नींद को स्वस्थ?
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि रोजाना एक ही समय पर सोने और उठने की आदत डालें। सोने से कम से कम एक घंटे पहले मोबाइल, लैपटॉप और टीवी जैसी स्क्रीन से दूरी बनाए रखें। शाम के बाद कैफीन का सेवन कम करें और नियमित व्यायाम व संतुलित आहार अपनाएं। वयस्कों के लिए प्रतिदिन 7 से 9 घंटे की गुणवत्तापूर्ण नींद को बेहतर स्वास्थ्य के लिए आवश्यक माना जाता है। नियमित और पर्याप्त नींद न केवल बीमारियों के खतरे को कम करती है, बल्कि शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाए रखती है।
