कोरोना महामारी के बाद लोगों की जीवनशैली में बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। घरों में अधिक समय बिताने, शारीरिक गतिविधियों में कमी और असंतुलित खानपान की आदतों का असर अब स्वास्थ्य पर साफ दिखाई देने लगा है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-6 (NFHS-6) की ताजा रिपोर्ट ने देश में बढ़ते मोटापे और हाई ब्लड शुगर के मामलों को लेकर गंभीर चिंता जताई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति आने वाले वर्षों में डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा और बढ़ा सकती है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी NFHS-6 सर्वे वर्ष 2023-24 के दौरान किया गया था। इस सर्वे में मणिपुर को छोड़कर देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 715 जिलों के लगभग 6.79 लाख परिवारों को शामिल किया गया। रिपोर्ट में स्वास्थ्य, पोषण और जनसंख्या से जुड़े कई महत्वपूर्ण संकेतकों का आकलन किया गया है।

भारत में तेज़ी से बढ़ रही डायबिटीज Source : Pixal
तेजी से बढ़ रही है डायबिटीज की समस्या
NFHS-6 के अनुसार, 15 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में डायबिटीज के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। सर्वे में उन लोगों को शामिल किया गया जिनका ब्लड शुगर स्तर 141 mg/dl से अधिक था या जो इसे नियंत्रित करने के लिए नियमित रूप से दवाएं ले रहे थे। रिपोर्ट बताती है कि पिछले कुछ वर्षों में डायबिटीज के मामलों में लगभग 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। देश में 15 वर्ष से अधिक आयु के करीब 56 करोड़ पुरुष हैं, जिनमें लगभग 11.7 करोड़ पुरुष डायबिटीज से प्रभावित पाए गए। वर्ष 2021 में यह संख्या करीब 8.7 करोड़ थी। NFHS-5 में जहां 15.6 प्रतिशत पुरुष डायबिटीज से पीड़ित थे, वहीं अब यह आंकड़ा बढ़कर 20.9 प्रतिशत तक पहुंच गया है। महिलाओं में भी स्थिति कम चिंताजनक नहीं है। वर्तमान में देश की लगभग 7.12 करोड़ महिलाएं मधुमेह से जूझ रही हैं, जबकि तीन वर्ष पहले यह संख्या करीब 5.4 करोड़ थी। महिलाओं में डायबिटीज की दर 13.5 प्रतिशत से बढ़कर 17.8 प्रतिशत हो गई है, जो 4.3 प्रतिशत की महत्वपूर्ण वृद्धि को दर्शाती है।
मोटापे के मामलों में भी बड़ा इजाफा
रिपोर्ट के मुताबिक, 15 से 49 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं में ओवरवेट और मोटापे की समस्या तेजी से बढ़ी है। वर्ष 2019-21 में जहां 24 प्रतिशत महिलाएं ओवरवेट या मोटापे की श्रेणी में थीं, वहीं 2023-24 में यह आंकड़ा बढ़कर 30.7 प्रतिशत हो गया। शहरी क्षेत्रों में स्थिति अधिक गंभीर है, जहां 42.8 प्रतिशत महिलाएं ओवरवेट या मोटापे से प्रभावित पाई गईं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह आंकड़ा 25.5 प्रतिशत दर्ज किया गया। पुरुषों में भी इसी तरह की वृद्धि देखने को मिली है। वर्ष 2019-21 में 22.9 प्रतिशत पुरुष ओवरवेट या मोटापे की श्रेणी में थे, जो 2023-24 में बढ़कर 27.3 प्रतिशत हो गए। ग्रामीण क्षेत्रों में 23 प्रतिशत पुरुष और शहरी इलाकों में 36.3 प्रतिशत पुरुष ओवरवेट या मोटापे से प्रभावित पाए गए।
विशेषज्ञों की सलाह
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित शारीरिक गतिविधि, संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर मोटापा और डायबिटीज जैसी बीमारियों के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। बढ़ते आंकड़े इस बात का संकेत हैं कि लोगों को अपनी दिनचर्या और खानपान को लेकर अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है।
Disclaimer: यह जानकारी शोध अध्ययनों और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है। इसे चिकित्सकीय सलाह का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। किसी भी नई गतिविधि, डाइट या व्यायाम को अपनाने से पहले डॉक्टर या संबंधित स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें।
