महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी भूचाल देखने को मिला है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) यानी शिवसेना (यूबीटी) के भीतर जारी बगावत के बीच पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कड़ा कदम उठाते हुए सांसद नागेश पाटिल अष्टिकर के बेटे कृष्णा नागेश पाटिल अष्टिकर को पार्टी से निष्कासित कर दिया है। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसदों ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और उनमें से कई नेता मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। राजनीतिक जानकार इस घटनाक्रम को आगामी चुनावों से पहले उद्धव ठाकरे के लिए बड़ी चुनौती और पार्टी में बढ़ते असंतोष का संकेत मान रहे हैं।


संजय राउत ने की कार्रवाई की घोषणा

शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर बताया कि पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे के निर्देश पर कृष्णा नागेश पाटिल अष्टिकर को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निष्कासित किया गया है। राउत ने कहा कि पार्टी अनुशासन से समझौता नहीं किया जाएगा और संगठन के खिलाफ काम करने वालों पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।


विधान परिषद उम्मीदवार रहे हैं कृष्णा अष्टिकर

कृष्णा पाटिल अष्टिकर को हाल ही में शिवसेना (यूबीटी) ने महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव के लिए नांदेड़ स्थानीय निकाय निर्वाचन क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया था। लेकिन राजनीतिक परिस्थितियों में तेजी से आए बदलाव के बाद अब उन्हें पार्टी से बाहर कर दिया गया है।


शिंदे गुट में शामिल हुए सांसद नागेश अष्टिकर

हिंगोली से लोकसभा सांसद नागेश पाटिल अष्टिकर ने हाल ही में सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि वह उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो गए हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपनी विचारधारा नहीं छोड़ी है और केवल एक शिवसेना से दूसरी शिवसेना में गए हैं।


विकास कार्यों को लेकर जताई नाराजगी

अष्टिकर ने दावा किया कि पिछले दो वर्षों के दौरान वह अपने संसदीय क्षेत्र के विकास के लिए पर्याप्त फंड नहीं जुटा सके। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के विकास और जनता की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए उन्होंने यह राजनीतिक फैसला लिया।


शिवसेना (यूबीटी) के लिए बढ़ी चुनौती

छह सांसदों की बगावत और लगातार हो रहे दलबदल ने शिवसेना (यूबीटी) की चिंताओं को बढ़ा दिया है। पार्टी पहले से ही महाराष्ट्र में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत बनाए रखने की कोशिश कर रही है और ऐसे में वरिष्ठ नेताओं व सांसदों का अलग होना संगठन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।


चुनाव से पहले बढ़ सकती है सियासी हलचल

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम महाराष्ट्र की राजनीति में आने वाले दिनों में और बड़े बदलावों का संकेत हो सकता है। आगामी चुनावों से पहले शिवसेना (यूबीटी) और शिंदे गुट के बीच राजनीतिक संघर्ष और तेज होने की संभावना है।