
आदित्य ठाकरे और एकनाथ शिंदे।Source : Chrome
शिवसेना को हाल ही में बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पार्टी के कई सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट में शामिल होने के बाद अब नगरसेवकों के भी बगावत करने की अटकलें तेज हो गई हैं। ऐसे माहौल में पार्टी को एकजुट रखने और संगठन को मजबूत करने के लिए उद्धव ठाकरे ने अपने आवास 'मातोश्री' पर अहम बैठक बुलाई। इस बैठक की कमान आदित्य ठाकरे ने संभाली और नगरसेवकों को जनता के बीच सक्रिय रहने के साथ-साथ मुंबई के मुद्दों को मजबूती से उठाने का संदेश दिया।
मातोश्री में हुई रणनीतिक बैठक
गुरुवार को आयोजित इस बैठक में मुंबई महानगरपालिका क्षेत्र से जुड़े कई अहम विषयों पर चर्चा की गई। बैठक की अध्यक्षता आदित्य ठाकरे ने की, जिसमें पार्टी के नगरसेवकों के साथ संगठन की मौजूदा स्थिति और आगे की रणनीति पर विचार-विमर्श हुआ। साथ ही मुंबई के अलग-अलग इलाकों में नागरिकों से जुड़े मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
जनता के मुद्दों को प्राथमिकता देने का संदेश
बैठक के दौरान आदित्य ठाकरे ने नगरसेवकों से कहा कि वे अपने-अपने वार्डों में लोगों की समस्याओं पर लगातार नजर रखें और उन्हें प्रभावी तरीके से महानगरपालिका के सदन में उठाएं। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी जनता की आवाज बनना है और स्थानीय समस्याओं को मजबूती से प्रशासन के सामने रखना जरूरी है।
मुंबई के हालात पर सरकार से जवाब मांगने की तैयारी
आदित्य ठाकरे ने पिछले कुछ दिनों में मुंबई में सामने आए विभिन्न नागरिक मुद्दों का जिक्र करते हुए कहा कि इन मामलों में सत्तारूढ़ पक्ष से जवाब मांगा जाना चाहिए। उन्होंने नगरसेवकों से अपील की कि वे शहर से जुड़े हर महत्वपूर्ण मुद्दे को सदन में उठाएं और प्रशासन की जवाबदेही सुनिश्चित करें।
संगठन को एकजुट रखने पर जोर
हाल के दिनों में पार्टी के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट में शामिल होने के बाद शिवसेना (यूबीटी) के सामने संगठन को मजबूत बनाए रखना बड़ी चुनौती बन गया है। माना जा रहा है कि इसी वजह से पार्टी नेतृत्व अब स्थानीय स्तर पर भी सक्रिय हो गया है, ताकि किसी तरह की टूट-फूट की संभावना को रोका जा सके और कार्यकर्ताओं का मनोबल बनाए रखा जा सके।
आगे की रणनीति पर भी हुई चर्चा
बैठक में केवल मौजूदा राजनीतिक हालात ही नहीं, बल्कि आने वाले समय में पार्टी की रणनीति को लेकर भी विचार किया गया। सूत्रों के मुताबिक, नेतृत्व चाहता है कि जनप्रतिनिधि जनता के बीच अपनी सक्रियता बढ़ाएं और स्थानीय मुद्दों पर मुखर होकर संगठन की पकड़ को और मजबूत करें। इसी रणनीति के तहत नगरसेवकों को लगातार क्षेत्र में सक्रिय रहने और लोगों से सीधा संवाद बनाए रखने की सलाह दी गई।
