ere | Source: ereमुजफ्फरपुर। बिहार के मुजफ्फरपुर में बेटे की हत्या के मामले में अब उसी के माता-पिता के खिलाफ अदालत ने जमानतीय वारंट जारी किया है। मामला वर्ष 2024 में हुई विशाल पांडेय की हत्या से जुड़ा है। अदालत ने हत्या के मामले में गवाही के लिए उपस्थित नहीं होने पर मृतक के पिता राजेश पांडेय, मां रंजू देवी और बखरी निवासी सुधा देवी के खिलाफ जमानतीय वारंट जारी किया है। अदालत ने अहियापुर थाने की पुलिस को तीनों गवाहों को 21 नवंबर तक न्यायालय में उपस्थित कराने का आदेश दिया है।

बेटे की हत्या के मामले में माता-पिता ही क्यों बने वारंट के दायरे में?

विशाल पांडेय की हत्या के बाद उसके पिता राजेश पांडेय ने पुलिस में मामला दर्ज कराया था, जबकि उसकी मां रंजू देवी इस मामले में महत्वपूर्ण गवाह हैं। अदालत में मामले की सुनवाई के दौरान गवाही के लिए निर्धारित प्रक्रिया में उनकी उपस्थिति नहीं होने के बाद कोर्ट ने इस मामले में सख्ती दिखाई।

मृतक के माता-पिता के अलावा सुधा देवी के खिलाफ भी जमानतीय वारंट जारी किया गया है। वारंट एसएसपी के माध्यम से अहियापुर थानेदार को भेजा गया है। पुलिस को निर्देश दिया गया है कि तीनों गवाहों को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाए।

2024 में चाकू से गला रेतकर हुई थी हत्या

यह मामला अहियापुर थाना क्षेत्र का है और घटना 19 फरवरी 2024 की है। विशाल पांडेय का शव एसकेएमसीएच के पीछे शहबाजपुर सलेम गांव में एक सुनसान स्थान पर बोरे में बंद मिला था। पुलिस के अनुसार, उसकी हत्या चाकू से गला रेतकर की गई थी और शव को बोरे में बंद कर वहां फेंक दिया गया था।

इस हत्या की घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई थी। मामले में मृतक के पिता राजेश पांडेय ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। प्राथमिकी में उन्होंने अपने बेटे के घर से निकलने और उसके बाद वापस नहीं लौटने से जुड़ी जानकारी पुलिस को दी थी।

सब्जी लाने की बात कहकर घर से निकला था विशाल

राजेश पांडेय ने पुलिस को दिए बयान में बताया था कि 18 फरवरी 2024 की शाम विशाल घर से सब्जी लाने की बात कहकर निकला था। इसके बाद वह घर वापस नहीं आया। पिता के अनुसार, विशाल को एक अज्ञात नंबर से बार-बार फोन किया जा रहा था और उसे घर से बाहर बुलाया गया था।

परिजनों को जब घटना की जानकारी मिली तो विशाल की तलाश शुरू की गई। अगले दिन उसका शव एसकेएमसीएच के पीछे शहबाजपुर सलेम गांव में बोरे के अंदर मिला। शव मिलने के बाद हत्या का मामला दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू की थी।

पिता ने लगाया था घर से बुलाकर हत्या करने का आरोप

मृतक के पिता राजेश पांडेय ने पुलिस को बताया था कि उनके बेटे को किसी अंजान नंबर से लगातार फोन करके घर से बुलाया गया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि घर से बुलाने के बाद विशाल की हत्या कर दी गई और उसके शव को सुनसान स्थान पर फेंक दिया गया।

मामले की जांच के दौरान विशाल के आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी भी सामने आई थी। पुलिस की छानबीन में यह बात बताई गई थी कि उसके अपराधी साथियों ने उसे बुलाकर हत्या की और शव को ठिकाने लगाने की कोशिश की थी।

हत्या के बाद परिवार ने की थी कार्रवाई और स्पीडी ट्रायल की मांग

विशाल पांडेय की हत्या के बाद 19 फरवरी 2024 को बखरी में उसके परिवार की ओर से आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर प्रदर्शन भी किया गया था। इस दौरान पूर्व मंत्री सह कांटी विधायक अजीत कुमार, पूर्व मंत्री सुरेश शर्मा और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने तत्कालीन एसएसपी से मुलाकात की थी।

प्रतिनिधियों की ओर से हत्याकांड में आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई के साथ मामले में स्पीडी ट्रायल चलाकर दोषियों को सजा दिलाने की मांग की गई थी। उस समय घटना को लेकर परिवार और स्थानीय लोगों में आक्रोश भी सामने आया था।

अब कोर्ट ने तीन गवाहों को पेश कराने का दिया आदेश

मामले की वर्तमान न्यायिक प्रक्रिया में अदालत ने मृतक के माता-पिता राजेश पांडेय और रंजू देवी के साथ सुधा देवी को भी गवाही के लिए पेश कराने का निर्देश दिया है। तीनों के खिलाफ जमानतीय वारंट एसएसपी के माध्यम से अहियापुर थानेदार को भेजा गया है।

अदालत ने पुलिस को निर्देश दिया है कि तीनों गवाहों को 21 नवंबर तक न्यायालय के समक्ष उपस्थित कराया जाए। इस कार्रवाई का उद्देश्य मामले की सुनवाई के दौरान आवश्यक गवाहों की उपस्थिति सुनिश्चित करना है।

अब आगे क्या होगा?

अदालत के आदेश के बाद पुलिस की जिम्मेदारी है कि वारंट की कार्रवाई करते हुए तीनों गवाहों को निर्धारित समयसीमा के भीतर न्यायालय में पेश करे। इसके बाद मामले की न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। बेटे की हत्या के मामले में पिता का शिकायतकर्ता और मां का महत्वपूर्ण गवाह होना इस प्रकरण को और भी संवेदनशील बनाता है।