मुंबई। दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन की खबर के बीच उनका ‘कौन बनेगा करोड़पति’ का पुराना प्रसंग फिर चर्चा में है। इस कार्यक्रम में उन्होंने अपनी सादगी, गांव से जुड़ाव और फिल्मी दुनिया से दूरी को लेकर खुलकर बात की थी। अमिताभ बच्चन के सवाल पर नाना पाटेकर ने कहा था कि वह खुद को फिल्म इंडस्ट्री का हिस्सा नहीं मानते, बल्कि फिल्मों में काम करने के लिए मुंबई आते हैं और फिर वापस गांव लौट जाते हैं।
नाना पाटेकर अपनी बेबाक अदाकारी के साथ-साथ सादगी भरी जीवनशैली के लिए भी जाने जाते रहे हैं। बड़े पर्दे पर कई यादगार किरदार निभाने के बावजूद उन्होंने निजी जिंदगी में ग्लैमर और दिखावे से दूरी बनाए रखी। उनके कई ठिकाने रहे, लेकिन गांव से उनका लगाव हमेशा खास रहा।
‘मैं फिल्म इंडस्ट्री से नहीं हूं, बस यहां काम करने आता हूं’
8 जून 2025 को नाना पाटेकर क्विज आधारित रियलिटी शो ‘कौन बनेगा करोड़पति 17’ में अतिथि के तौर पर पहुंचे थे। शो के मेजबान अमिताभ बच्चन ने उनसे पूछा था कि जीवन में इतना कुछ हासिल करने के बाद उन्होंने सब कुछ छोड़कर गांव में रहना क्यों पसंद किया।
अमिताभ बच्चन के इस सवाल पर नाना पाटेकर ने बेहद सहज अंदाज में जवाब दिया था, “मैं फिल्म इंडस्ट्री से नहीं हूं। मैं बस यहां काम करने आता हूं और फिर वापस चला जाता हूं। मैं कभी किसी पार्टी में नहीं गया, न ही शहर में ज्यादा रुका। मैं गांव-खेड़े का हूं और वहीं अच्छा लगता है।”
नाना पाटेकर का यह जवाब उनकी जीवनशैली और सोच को काफी हद तक बयां करता है। फिल्मों में बड़ी सफलता हासिल करने के बावजूद उन्होंने खुद को मायानगरी की चमक-दमक तक सीमित नहीं रखा और गांव की सादगी को प्राथमिकता दी।
‘जितना चाहा, उससे कई गुना ज्यादा मिला’
केबीसी के उस एपिसोड में नाना पाटेकर ने अपनी जरूरतों और जिंदगी के प्रति नजरिए पर भी बात की थी। उन्होंने कहा था, “जितना मैंने चाहा न, उससे कई गुना ज्यादा मिला है। जरूरतें सीमित हों तो बहुत आसान हो जाती है।”
नाना पाटेकर ने अपनी सादगी का उदाहरण देते हुए बताया था कि उनके पास एसी नहीं है, क्योंकि उन्हें उसकी जरूरत महसूस नहीं होती। उन्होंने अपने घर के आसपास के प्राकृतिक माहौल का जिक्र करते हुए कहा था कि जिस तरह शहरों में घर चारों तरफ दीवारों से घिरे होते हैं, उसी तरह उनका घर पहाड़ों से घिरा हुआ है।
उन्होंने कहा था कि वह ऐसे माहौल में आराम से रहते हैं और उन्हें यह जीवन बहुत अच्छा लगता है।
मुंबई में साधारण घर, पुणे के पास बड़ा फार्महाउस
नाना पाटेकर मुख्य रूप से मुंबई के अंधेरी स्थित समर्थ नगर, लोखंडवाला इलाके में एक साधारण 1 बीएचके फ्लैट में रहते थे। फिल्म इंडस्ट्री में लंबे समय तक सक्रिय रहने और बड़े स्टार का दर्जा हासिल करने के बावजूद उनकी जीवनशैली में आलीशान दिखावे की झलक कम ही देखने को मिली।
पुणे के पास खडकवासला में उनका करीब 27 एकड़ में फैला फार्महाउस भी बताया जाता है। यहां वह खेती-बाड़ी से जुड़े काम करते थे। इसके अलावा गोवा के डोना पाउला में भी उनका एक घर था। उनका पुश्तैनी गांव महाराष्ट्र के रत्नागिरी में बताया गया है।
गांव से लगाव सिर्फ बातों तक सीमित नहीं था
नाना पाटेकर के लिए गांव से जुड़ाव केवल भावनात्मक बात नहीं थी। वह अपने फार्महाउस पर खेती-बाड़ी करते थे और शहर की व्यस्त जिंदगी से दूर प्राकृतिक वातावरण में समय बिताना पसंद करते थे। यही वजह थी कि जब अमिताभ बच्चन ने उनसे गांव में लौटने की वजह पूछी, तो उन्होंने फिल्मी दुनिया से खुद को अलग बताते हुए अपनी जड़ों से जुड़े रहने की बात कही थी।
उनका मानना था कि जरूरतें जितनी सीमित हों, जीवन उतना ही सरल हो जाता है। यही विचार उनकी जीवनशैली में भी दिखाई देता था।
माधुरी दीक्षित के साथ काम को बताया था शानदार अनुभव
‘कौन बनेगा करोड़पति 17’ के उसी एपिसोड में नाना पाटेकर ने अभिनेत्री माधुरी दीक्षित के साथ काम करने के अनुभव के बारे में भी बात की थी। एक दर्शक ने उनसे फिल्म ‘वजूद’ में माधुरी दीक्षित के साथ काम करने को लेकर सवाल पूछा था।
इसके जवाब में नाना पाटेकर ने माधुरी दीक्षित की जमकर तारीफ की थी। उन्होंने कहा था कि उनके साथ काम करना शानदार अनुभव रहा। उन्होंने माधुरी को बेहतरीन अभिनेत्री और खूबसूरत कलाकार बताते हुए उनके नृत्य की भी तारीफ की थी। नाना पाटेकर ने कहा था कि उनमें वह सब कुछ है जो हर इंसान में होना चाहिए और वह उनका बेहद सम्मान करते हैं।
‘कैसे बताऊं मैं तुम्हें’ कविता से जुड़ी याद भी की साझा
शो में नाना पाटेकर से फिल्म ‘वजूद’ में माधुरी दीक्षित को सुनाई गई कविता ‘कैसे बताऊं मैं तुम्हें’ के बारे में भी सवाल पूछा गया था। इस पर उन्होंने बताया था कि यह कविता गीतकार और लेखक जावेद अख्तर ने लिखी थी।
नाना पाटेकर ने कहा था कि यह कविता उन्हें आज भी याद है। उन्होंने यह कविता माधुरी दीक्षित को सुनाई थी, इसलिए इसे भूल पाना उनके लिए आसान नहीं था। उन्होंने कहा था कि आज भी उन्हें ऐसा महसूस होता है जैसे वह कविता उनके खून में दौड़ रही हो।
उन्होंने यह भी कहा था कि जब भी कोई उनसे उस कविता के बारे में सवाल करता है तो उनके मन में उससे जुड़ी कई यादें ताजा हो जाती हैं।
जावेद अख्तर ने श्रद्धांजलि में क्या कहा
नाना पाटेकर के निधन पर जावेद अख्तर ने भी उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए भावुक बातें कही हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने केवल एक असाधारण और अद्वितीय अभिनेता को ही नहीं खोया, बल्कि एक ऐसे सच्चे भारतीय को भी खोया है, जो अपनी मातृभूमि से गहराई से जुड़ा हुआ था और हमेशा सच को सच कहने में विश्वास रखता था।
जावेद अख्तर ने कहा था कि नाना साहब को उनकी तरह लाखों लोग याद करेंगे। उनके इस बयान में नाना पाटेकर के साथ लंबे समय से जुड़े व्यक्तिगत और पेशेवर संबंधों की झलक दिखाई दी।
नाना पाटेकर की सादगी क्यों याद आती है?
नाना पाटेकर का अभिनय जितना प्रभावशाली रहा, उनकी निजी जिंदगी की सादगी भी उतनी ही चर्चा में रही। उन्होंने अपने करियर में सफलता के ऊंचे मुकाम हासिल किए, लेकिन खुद को भव्य जीवनशैली से जोड़ने के बजाय गांव, खेती और प्राकृतिक माहौल के करीब रखना पसंद किया।
‘कौन बनेगा करोड़पति’ में अमिताभ बच्चन के साथ हुई बातचीत में उनकी यही सोच स्पष्ट रूप से सामने आई थी। “मैं फिल्म इंडस्ट्री से नहीं हूं” वाला उनका बयान इस बात का संकेत था कि वह अभिनय को अपने काम के रूप में देखते थे, जबकि उनकी पहचान और आत्मीयता अपनी मिट्टी और गांव से जुड़ी हुई थी।
