दरभंगा। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के मुद्दे पर बिहार की राजनीति में विपक्षी आवाजें एक साथ आती दिखाई दे रही हैं। पटना में तेजस्वी यादव की अगुवाई में विपक्ष की ओर से प्रदर्शन किए जाने के बीच दरभंगा में जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर कड़ा बयान दिया। आमतौर पर तेजस्वी यादव के कई राजनीतिक बयानों का विरोध करने वाले प्रशांत किशोर इस मुद्दे पर उनके सुर में सुर मिलाते नजर आए।
ज्ञानेश कुमार को जाना चाहिए: प्रशांत किशोर
जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने मीडिया से बातचीत में कहा कि अब समय आ गया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से चले जाना चाहिए, क्योंकि चुनाव आयोग की विश्वसनीयता दांव पर है। उन्होंने इस मुद्दे को केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रखा, बल्कि चुनाव आयोग की पूरी व्यवस्था में सुधार की जरूरत पर जोर दिया।
प्रशांत किशोर ने कहा कि ज्ञानेश कुमार से पहले राजीव कुमार मुख्य चुनाव आयुक्त थे और उन्होंने भी इसी तरह निर्वाचन आयोग का संचालन किया था। उन्होंने राजीव कुमार के सेवानिवृत्त होने के बाद एचडीएफसी बैंक का चेयरमैन बनाए जाने का भी उल्लेख किया।
चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर PK ने उठाए सवाल
प्रशांत किशोर ने कहा कि चुनाव आयोग की विश्वसनीयता किसी एक व्यक्ति या एक घटना की वजह से दांव पर नहीं लगी है। उनके अनुसार, पिछले 7-8 वर्षों से लगातार अलग-अलग स्तरों पर चुनावी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
उन्होंने मतदाता सूची तैयार करने, चुनाव की समय-सारणी, आदर्श आचार संहिता लागू करने और बिहार में सरकार की ओर से 10-10 हजार रुपये देकर वोट खरीदने के आरोपों का जिक्र किया। उन्होंने मतगणना में धांधली के आरोपों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि इन सभी स्तरों पर चुनाव आयोग सरकार और सत्तारूढ़ दल के पक्ष में दिखाई देता है।
प्रशांत किशोर ने कहा कि इसी वजह से जनता को यह लगने लगा है कि चुनाव निष्पक्ष नहीं हो रहे हैं और आंदोलन की स्थिति बन रही है। हालांकि उनके बयान में लगाए गए ये आरोप उनके राजनीतिक दावे हैं।
सिर्फ CEC बदलना नहीं, चुनाव आयोग में सुधार जरूरी
प्रशांत किशोर ने कहा कि ज्ञानेश कुमार को जाना चाहिए, लेकिन इससे भी ज्यादा जरूरी चुनाव आयोग में व्यापक सुधार करना है। उन्होंने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया में बदलाव की आवश्यकता बताई।
उन्होंने कहा कि मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया में भी सुधार होना चाहिए, ताकि लोगों का पूरे चुनावी तंत्र पर विश्वास बढ़े। उनके मुताबिक चुनाव आयोग की विश्वसनीयता और चुनावी प्रक्रिया पर जनता के भरोसे को मजबूत करना सबसे महत्वपूर्ण विषय है।
पटना में तेजस्वी यादव का प्रदर्शन, दरभंगा में PK का बयान
एक ओर पटना में राष्ट्रीय जनता दल नेता तेजस्वी यादव मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी प्रदर्शन का हिस्सा बने, तो दूसरी ओर दरभंगा में प्रशांत किशोर ने भी इसी मुद्दे पर अपनी राय रखी। इस तरह बिहार की राजनीति में आमतौर पर अलग-अलग राजनीतिक रुख रखने वाले दोनों नेताओं की आवाज इस मुद्दे पर एक जैसी दिखाई दी।
तेजस्वी यादव और प्रशांत किशोर के बीच राजनीतिक मतभेद किसी से छिपे नहीं हैं। ऐसे में मुख्य चुनाव आयुक्त के मुद्दे पर प्रशांत किशोर का बयान राजनीतिक रूप से खासा महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
शिक्षकों के सातवें वेतन आयोग के मुद्दे पर भी बोले PK
प्रशांत किशोर ने शिक्षकों के सातवें वेतन आयोग से जुड़े मुद्दे पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि शिक्षकों के लिए जो मुद्दा महत्वपूर्ण है, उसे उठाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को उन्होंने उठाया या किसी और ने, यह महत्वपूर्ण नहीं है। महत्वपूर्ण यह है कि यह बड़ा राजनीतिक मुद्दा बने, इस पर वोट मांगे जाएं और इसका समाधान निकले।
उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति, विधायक या एमएलसी अकेले सातवें वेतन आयोग को लागू नहीं करवा सकता। उनके मुताबिक यदि शिक्षक एकजुट हो जाएं तो बिहार की सभी राजनीतिक पार्टियों पर इस मुद्दे का समाधान निकालने के लिए दबाव बनाया जा सकता है।
लोकसभा चुनाव से पहले समाधान की बात
प्रशांत किशोर ने शिक्षकों की भूमिका को लोकसभा चुनाव से भी जोड़ते हुए कहा कि चुनाव से पहले इस मुद्दे का समाधान जरूरी है। उन्होंने कहा कि जो भी दिल्ली पर शासन करना चाहता है, उसे बिहार में लोकसभा चुनाव जीतना होगा और छह लाख शिक्षकों के समर्थन के बिना बिहार में जीत हासिल करना मुश्किल होगा।
उन्होंने शिक्षकों से यह तय करने की अपील की कि वे किस राजनीतिक दल या व्यक्ति पर भरोसा करते हैं। इस बयान के जरिए उन्होंने शिक्षकों के मुद्दे को चुनावी राजनीति से जोड़कर अपनी राजनीतिक रणनीति भी स्पष्ट की।
10 हजार रुपये वाली निजी नौकरी के दावे पर भी सफाई
प्रशांत किशोर ने 10 हजार रुपये वाली नौकरी से जुड़े अपने बयान पर भी स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने कहा कि जब वह बांकीपुर विधानसभा का उपचुनाव लड़ रहे थे, तब उन्होंने कोई नौकरी देने का वादा नहीं किया था।
उनके मुताबिक चुनाव जीतने के बाद उन्होंने यह कहा था कि जनता ने उन पर भरोसा किया है और देशभर में उनके संपर्कों से बातचीत के बाद यह रास्ता निकाला गया कि वह सरकारी नौकरी तो नहीं दिला सकते, लेकिन निजी क्षेत्र में नौकरी दिलाने में मदद कर सकते हैं।
प्रशांत किशोर ने दावा किया कि लोगों की ओर से उनके कार्यालय में अपना बायोडाटा जमा कराया जा रहा है और लोगों को नौकरी भी दिलाई जा रही है। उन्होंने सरकारी नौकरी और निजी नौकरी के बीच अंतर बताते हुए अपने पुराने बयान का संदर्भ भी स्पष्ट किया।
