नई दिल्ली। GST Council Meeting 2026: वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी व्यवस्था को लेकर 57वीं GST काउंसिल की बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में नई दिल्ली में हुई इस बैठक में कारोबारियों और करदाताओं के लिए जीएसटी प्रक्रिया को सरल बनाने, रिफंड की प्रक्रिया तेज करने और कर व्यवस्था को अधिक पारदर्शी एवं अनुमानित बनाने से जुड़े कई प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।
गिरफ्तारी के अधिकार को लेकर बड़ा फैसला
57वीं जीएसटी काउंसिल की बैठक में सबसे महत्वपूर्ण फैसलों में से एक कर अधिकारियों की गिरफ्तारी की शक्ति से जुड़ा है। काउंसिल ने टैक्स अधिकारियों की गिरफ्तारी की शक्ति खत्म करने का फैसला किया है। इसके साथ ही मुकदमा चलाने के लिए कर चोरी या संबंधित अपराध की सीमा को 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये करने का निर्णय लिया गया है।
फिलहाल जीएसटी अधिकारियों को ऐसे गंभीर मामलों में गिरफ्तारी का अधिकार है, जिनमें 1 करोड़ रुपये से अधिक की कर चोरी, धोखाधड़ी से इनपुट टैक्स क्रेडिट यानी ITC हासिल करना या गलत तरीके से रिफंड लेना शामिल है। ऐसी कार्रवाई के लिए आयुक्त स्तर के अधिकारी से पहले अनुमति लेना जरूरी होता है। नए फैसले के बाद इस व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव होगा।
सजा के प्रावधान में भी बदलाव
जीएसटी काउंसिल ने न्यूनतम सजा से जुड़े प्रावधान को भी हटाने का फैसला किया है। अब प्रत्येक मामले में जुर्माना, कारावास या दोनों में से कौन-सी सजा लागू होगी, इसका निर्धारण न्यायिक विवेक के आधार पर किया जाएगा। इससे अलग-अलग मामलों में परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लेने की गुंजाइश बढ़ेगी।
वित्त मंत्रालय के अनुसार, जिन विशेष उल्लंघनों के लिए अलग से कोई निश्चित जुर्माना निर्धारित नहीं है, वहां लागू होने वाले सामान्य जुर्माने को भी कम किया गया है। यह राशि अब 25,000 रुपये के बजाय 10,000 रुपये होगी। इस बदलाव से उन मामलों में राहत मिलने की उम्मीद है, जहां किसी उल्लंघन के लिए अलग दंड का प्रावधान नहीं किया गया है।
अब 15 नहीं, 10 दिन में रिफंड क्लेम स्वीकार करने की समयसीमा
जीएसटी रिफंड प्रक्रिया को लेकर भी काउंसिल ने अहम बदलाव किया है। रिफंड क्लेम को स्वीकार करने की समयसीमा 15 दिन से घटाकर 10 दिन करने का फैसला लिया गया है। यानी रिफंड से जुड़ी प्रक्रिया में शुरुआती स्तर पर निर्णय लेने के लिए अब पहले की तुलना में कम समय निर्धारित होगा।
सरकार की ओर से जीएसटी प्रणाली को अधिक तेज और सरल बनाने की दिशा में इसे महत्वपूर्ण कदम माना गया है। कारोबारियों और टैक्सपेयर्स के लिए रिफंड प्रक्रिया में लगने वाला समय कम करना लंबे समय से महत्वपूर्ण विषय रहा है।
हर साल GST दरों की समीक्षा के लिए अलग बैठक
वित्त मंत्रालय की ओर से यह भी बताया गया है कि जीएसटी दरों की समीक्षा के लिए हर साल काउंसिल की एक अलग बैठक आयोजित की जाएगी। इसका उद्देश्य जीएसटी दरों की समीक्षा के लिए एक अलग और नियमित व्यवस्था सुनिश्चित करना है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि जीएसटी काउंसिल ने नोटिस और कार्यवाही के लिए समान मानक की सिफारिश की है। इससे कर संबंधी नोटिस और उसके बाद होने वाली कार्यवाही में एकरूपता लाने की कोशिश की गई है।
ई-कॉमर्स से जुड़े छोटे कारोबारियों के लिए आसान होगा पंजीकरण
57वीं जीएसटी काउंसिल की बैठक में ई-कॉमर्स मंचों के माध्यम से कारोबार करने वाले छोटे करदाताओं के लिए पंजीकरण प्रक्रिया को आसान बनाने का भी फैसला किया गया है। इससे ऐसे छोटे कारोबारी, जो ई-कॉमर्स मंचों के जरिए वस्तुओं या सेवाओं की आपूर्ति करते हैं, उनके लिए जीएसटी पंजीकरण की प्रक्रिया पहले की तुलना में सरल होगी।
यह फैसला छोटे करदाताओं के लिए जीएसटी अनुपालन को आसान बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। काउंसिल ने जीएसटी व्यवस्था में कारोबारियों के लिए प्रक्रियागत जटिलताओं को कम करने से जुड़े कई पहलुओं पर बैठक में विचार किया।
ITC दावों पर वास्तविक खरीदारों को राहत देने की तैयारी
इनपुट टैक्स क्रेडिट यानी ITC के दावों को लेकर भी जीएसटी काउंसिल ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। काउंसिल ने अधिकारियों की एक समिति गठित करने का फैसला किया है। यह समिति इस बात का अध्ययन करेगी कि ऐसे वास्तविक खरीदारों को किस तरह संरक्षण दिया जा सकता है, जिनके पास उचित बिल मौजूद हैं, जिन्होंने माल प्राप्त कर लिया है और अपने आपूर्तिकर्ता को पूरा भुगतान भी कर दिया है।
वित्त मंत्रालय ने बताया कि अधिकारियों की समिति तीन महीने के भीतर अपना अध्ययन पूरा करेगी। इसके बाद इस विषय को अगली जीएसटी काउंसिल की बैठक के एजेंडे में रखा जाएगा। इसका उद्देश्य वास्तविक और नियमों का पालन करने वाले खरीदारों के हितों की सुरक्षा से जुड़े समाधान पर विचार करना है।
कर्मचारियों के बीमा कवर पर भी ITC का प्रावधान
बैठक के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बीमा कवर पर चुकाए गए जीएसटी को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के बीमा कवर पर चुकाए गए जीएसटी पर नियोक्ताओं को इनपुट टैक्स क्रेडिट मिलेगा।
यह फैसला नियोक्ताओं और कर्मचारियों से जुड़े बीमा कवर के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। बैठक में जीएसटी व्यवस्था को सरल बनाने और करदाताओं के लिए अधिक स्पष्ट नियम तैयार करने पर विशेष जोर दिया गया।
कारोबारियों और टैक्सपेयर्स के लिए क्या बदलेगा
57वीं जीएसटी काउंसिल की बैठक के फैसलों में गिरफ्तारी की शक्ति से जुड़ा बदलाव, मुकदमा चलाने की सीमा में वृद्धि, न्यूनतम सजा के प्रावधान में बदलाव, सामान्य जुर्माने में कमी और रिफंड क्लेम की समयसीमा घटाना प्रमुख हैं। इसके अलावा ई-कॉमर्स के जरिए कारोबार करने वाले छोटे करदाताओं के पंजीकरण को आसान बनाने और वास्तविक खरीदारों के ITC दावों पर संरक्षण की संभावनाओं का अध्ययन करने के लिए समिति बनाने का निर्णय भी लिया गया है।
कुल मिलाकर 57वीं जीएसटी काउंसिल की बैठक में जीएसटी व्यवस्था को कारोबारियों और करदाताओं के लिए अधिक सरल, तेज और स्पष्ट बनाने से जुड़े कई अहम फैसले सामने आए हैं। रिफंड की समयसीमा घटने, मुकदमे की सीमा बढ़ने और छोटे कारोबारियों के पंजीकरण को आसान बनाने जैसे निर्णय सीधे तौर पर जीएसटी अनुपालन प्रक्रिया को प्रभावित करेंगे। वहीं ITC दावों और बीमा कवर से जुड़े फैसलों का असर संबंधित करदाताओं और नियोक्ताओं पर पड़ेगा।
