देशभर में लोग झमाझम बारिश और राहत भरे मॉनसून का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन इस बार आसमान से पानी नहीं बल्कि चिंता बरस सकती है। प्रशांत महासागर में अल नीनो (El Niño) की वापसी हो चुकी है और मौसम वैज्ञानिकों को आशंका है कि यह जल्द ही "सुपर अल नीनो" का रूप ले सकता है। इसका सीधा असर भारत के मॉनसून पर पड़ सकता है। केंद्र सरकार ने संभावित खतरे को देखते हुए देश के 197 जिलों को सबसे संवेदनशील श्रेणी में रखा है और राज्यों को विशेष तैयारी के निर्देश दिए हैं। 
क्या है सुपर अल नीनो और क्यों बढ़ गई चिंता?
अल नीनो एक वैश्विक जलवायु घटना है, जिसमें प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से का समुद्री तापमान सामान्य से अधिक बढ़ जाता है। इससे दुनिया भर के मौसम चक्र प्रभावित होते हैं। जब यह गर्माहट बेहद ज्यादा हो जाती है तो उसे "सुपर अल नीनो" कहा जाता है। अमेरिकी और भारतीय मौसम एजेंसियों के अनुसार इस बार अल नीनो के बहुत मजबूत होने की संभावना जताई गई है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इसके कारण मॉनसूनी हवाएं कमजोर पड़ सकती हैं और भारत में सामान्य से कम बारिश दर्ज हो सकती है।
197 जिलों पर सबसे बड़ा खतरा
केंद्र सरकार और कृषि मंत्रालय ने देश के 197 जिलों को अल नीनो के प्रभाव के लिहाज से सबसे संवेदनशील माना है। इनमें राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र, बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई इलाके शामिल हैं। इन क्षेत्रों में बारिश की भारी कमी, सूखे जैसी स्थिति और खेती पर गंभीर असर पड़ने की आशंका है। इसी वजह से राज्यों से जिला स्तर की आपदा और कृषि योजनाओं को अपडेट करने के लिए कहा गया है।
कमजोर मॉनसून से खेती और महंगाई पर असर
भारत की बड़ी आबादी और कृषि व्यवस्था आज भी मॉनसून पर निर्भर है। यदि बारिश सामान्य से कम होती है तो धान, दाल, तिलहन और अन्य खरीफ फसलों की बुआई प्रभावित हो सकती है। उत्पादन घटने से खाद्यान्न की कीमतों में बढ़ोतरी और महंगाई का दबाव भी बढ़ सकता है। मौसम विभाग पहले ही सामान्य से कम वर्षा की आशंका जता चुका है, जिसके चलते कृषि क्षेत्र में चिंता बढ़ गई है।
सिर्फ सूखा ही नहीं, बढ़ेंगी हीटवेव भी
सुपर अल नीनो का असर केवल बारिश तक सीमित नहीं रहता। इसके कारण तापमान में भी असामान्य वृद्धि देखी जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तर, मध्य और पश्चिम भारत में लंबे समय तक लू चल सकती है। जलाशयों में पानी का स्तर घटने, पेयजल संकट बढ़ने और बिजली की मांग में रिकॉर्ड बढ़ोतरी जैसी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं।
सरकार ने शुरू की तैयारी
संभावित संकट को देखते हुए केंद्र सरकार, भारतीय मौसम विभाग (IMD) और कृषि वैज्ञानिकों ने संयुक्त तैयारी शुरू कर दी है। राज्यों को सूखा-रोधी फसलों को बढ़ावा देने, सिंचाई प्रबंधन मजबूत करने और किसानों के लिए वैकल्पिक कृषि योजनाएं तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अभी घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन आने वाले हफ्तों में अल नीनो की तीव्रता पर लगातार नजर रखनी होगी क्योंकि यही तय करेगा कि इस साल मॉनसून कितना कमजोर पड़ सकता है।
मॉनसून भारत की अर्थव्यवस्था और करोड़ों किसानों की जीवनरेखा है। ऐसे में प्रशांत महासागर में बन रहा सुपर अल नीनो केवल मौसम की खबर नहीं, बल्कि खेती, पानी, महंगाई और आम आदमी की जेब से जुड़ा बड़ा खतरा बन सकता है। अगले कुछ सप्ताह भारत के मॉनसून और कृषि भविष्य के लिए बेहद अहम साबित होने वाले हैं।
