गाजीपुर की अपर सत्र न्यायाधीश शक्ति सिंह की अदालत ने वर्ष 2021 में गहमर थाना क्षेत्र के बारा गांव में चार वर्षीय मासूम दानियाल की हत्या के मामले में उसके मामा अमजद खान को दोषी करार देते हुए मृत्यु दंड की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपी पर 50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। सजा सुनाए जाने के दौरान आरोपी के चेहरे पर अपने किए का कोई पछतावा दिखाई नहीं दिया। आइए जानते हैं पूरा मामला।

खेलते समय मामा ने भांजे की कर दी हत्या
यह मामला गाजीपुर जनपद के गहमर थाना क्षेत्र स्थित बारा गांव का है। वर्ष 2021 में आरोपी अमजद खान अपने चार वर्षीय भांजे दानियाल के साथ खेल रहा था। इसी दौरान किसी बात को लेकर उसने मासूम के गले पर चाकू से वार कर उसकी हत्या कर दी।
परिवार की गवाही बनी सजा का आधार
इस मामले में आरोपी के भाई-बहनों समेत परिवार के अन्य सदस्यों ने अदालत में महत्वपूर्ण गवाही दी। इन्हीं गवाहियों और साक्ष्यों के आधार पर अपर सत्र न्यायाधीश शक्ति सिंह ने आरोपी अमजद खान को दोषी मानते हुए फांसी की सजा तथा 50 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया।
अदालत में भी नहीं दिखा पछतावा
सहायक शासकीय अधिवक्ता अखिलेश सिंह ने बताया कि सजा सुनाए जाने से पहले न्यायाधीश ने आरोपी से पूछा कि क्या उसे अपने किए पर कोई पछतावा है। इस पर आरोपी ने कहा कि उसे किसी प्रकार का कोई पछतावा नहीं है। इतना ही नहीं, उसने यह भी कहा कि जो भी उससे उलझेगा, वह उसे भी मार देगा।
आरोपी के व्यवहार ने बढ़ाई सजा की गंभीरता
अधिवक्ता के अनुसार, सजा सुनाते समय न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि भविष्य में सुधार की संभावना आरोपी की बातों से दिखाई नहीं देती। इसी आधार पर अदालत ने इसे दुर्लभतम से दुर्लभतम (Rarest of Rare) श्रेणी का अपराध मानते हुए मृत्यु दंड की सजा सुनाई। उन्होंने बताया कि आरोपी ने मासूम का गला इस तरह काटा था कि केवल चार सेंटीमीटर हिस्सा ही शेष बचा था।
फैसले के दौरान जज की अहम टिप्पणी
फैसला सुनाते हुए न्यायाधीश ने कहा कि जिस मां ने अपने ही भाई के हाथों अपने चार वर्षीय मासूम बेटे की हत्या होते देखी हो, उसकी पीड़ा को शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता। अदालत ने माना कि आरोपी के इस कृत्य से सामाजिक संवेदनाएं प्रभावित हुई हैं, इसलिए उसे मृत्यु दंड दिया जाना उचित है।
नौ गवाहों ने पेश किए अहम साक्ष्य
अधिवक्ता ने बताया कि इस मामले में कुल नौ गवाह पेश किए गए थे, जिनमें चार गवाह मृतक और आरोपी के परिवार के सदस्य थे। अदालत ने माना कि सगे भाई-बहनों और परिवार के सदस्यों की गवाही के आधार पर यह मामला किसी भी प्रकार की रियायत या क्षमा के योग्य नहीं है। इसी कारण आरोपी को मृत्यु दंड की सजा सुनाई गई।
