अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित शांति समझौते को जहां पश्चिमी एशिया समेत दुनिया के कई देशों के लिए राहत भरी पहल माना जा रहा है, वहीं इजरायल इस समझौते को लेकर असहज नजर आ रहा है। इजरायल के नेशनल सिक्योरिटी मिनिस्टर बेन ग्वीर ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि उनका देश इस समझौते को स्वीकार करने के लिए बाध्य नहीं है और वह अपनी स्वतंत्र विदेश एवं सुरक्षा नीति के अनुसार फैसले लेगा।

क्या बोले इजरायल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री?
दुनियाभर में संघर्षों, युद्धों और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर नजर रखने वाली क्लैश रिपोर्ट के अनुसार, बेन ग्वीर ने अमेरिका-ईरान समझौते पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "डोनाल्ड ट्रंप का समझौता हमें बाध्य नहीं करता। इजरायल संयुक्त राज्य अमेरिका के अधीन नहीं है। हम एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र हैं।"
उन्होंने आगे कहा, "हम अमेरिका से प्यार करते हैं और राष्ट्रपति ट्रंप के आभारी हैं, लेकिन इजरायल किसी दूसरे देश के निर्देशों पर चलने वाला राष्ट्र नहीं है।"
समझौते को लेकर इजरायल में बढ़ी नाराजगी
अमेरिका और ईरान के बीच बनी सहमति को लेकर इजरायल के राजनीतिक और सुरक्षा हलकों में असंतोष देखा जा रहा है। कई राजनीतिक दलों और सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि प्रस्तावित समझौता ईरान के परमाणु कार्यक्रम, बैलिस्टिक मिसाइलों और उसके समर्थित संगठनों—हिज़्बुल्लाह, हमास और हूती—से जुड़े सुरक्षा खतरों का पर्याप्त समाधान नहीं करता। विपक्षी नेताओं ने इसे इजरायल की विदेश और सुरक्षा नीति की बड़ी विफलता करार दिया है। आलोचकों का तर्क है कि यह समझौता ईरान को आर्थिक राहत तो देगा, लेकिन उसकी क्षेत्रीय गतिविधियों और सैन्य क्षमताओं पर प्रभावी नियंत्रण नहीं लगा पाएगा।
पीस डील पर नेतन्याहू का रुख
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस मुद्दे पर अब तक सीमित प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने केवल इतना कहा है कि ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिए जाएंगे।
हालांकि आलोचकों का मानना है कि यदि समझौता मौजूदा स्वरूप में लागू होता है, तो इससे ईरान को आर्थिक लाभ मिल सकता है, जबकि उसकी सैन्य और क्षेत्रीय रणनीतियों पर अपेक्षित अंकुश नहीं लगेगा।
ट्रंप ने किया समझौते का ऐलान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार (14 जून) की शाम अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट कर घोषणा की कि अमेरिका और ईरान के बीच 107 दिनों से जारी संघर्ष को समाप्त करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने पर सहमति बन गई है। ट्रंप के अनुसार, दोनों देशों के बीच इस समझौते पर शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में हस्ताक्षर किए जाने की योजना है, जिससे क्षेत्रीय तनाव कम होने और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को स्थिरता मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
