अमेरिका और ईरान के रिश्ते दुनिया की कूटनीति के सबसे अस्थिर और विस्फोटक अध्यायों में से एक रहे हैं। कभी बातचीत की मेज पर आने की कोशिश, तो कभी युद्ध की दहलीज पर पहुंच जाने वाली तनातनी इन दोनों देशों के बीच यह उतार-चढ़ाव अंतरराष्ट्रीय राजनीति में सबसे ज्यादा चिंता पैदा करता है। ऐसे माहौल में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ताज़ा बयान फिर से पूरे क्षेत्र में हलचल मचा रहा है। ट्रंप ने अमेरिका ईरान डील पर बेहद सख्त अल्टीमेटम देते हुए कहा है या तो ईरान के साथ एक ‘अच्छी डील’ होगी या फिर बिल्कुल भी डील नहीं होगी और अगर डील नहीं हुई तो फिर गोला-बारूद चलेगा।इस बयान ने कूटनीतिक गलियारे से लेकर तेल बाजार तक चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि यह बात समझी जाती है कि अमेरिका ईरान तनाव अगर बढ़ा, तो इसका असर सिर्फ दो मुल्कों तक सीमित नहीं रहेगा मध्य पूर्व का पूरा इलाक़ा, अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा सप्लाई, और विश्व अर्थव्यवस्था तक इसका झटका महसूस करेगी।ट्रंप का यह अल्टीमेटम ऐसे समय पर आया है जब ईरान पर पहले से ही आर्थिक दबाव है, परमाणु कार्यक्रम पर दुनिया की निगाह है और अमेरिका में चुनावी माहौल में विदेशी नीति एक बड़ा मुद्दा बन चुका है। ऐसे में यह बयान सिर्फ राजनीतिक संदेश नहीं, बल्कि एक भारी-भरकम चेतावनी माना जा रहा है जो आने वाले दिनों में हालात को काफी बदल सकता है।
ट्रंप का अल्टीमेटम डील या फिर धमाका
डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कहा कि अमेरिका अब कमजोर समझौते नहीं करेगा। ईरान को एक meaningful deal स्वीकार करनी होगी नहीं तो अमेरिका पीछे हटने वाला नहीं है।उनका इशारा साफ था अगर बातचीत में प्रगति नहीं हुई, तो सैन्य एक्शन भी विकल्प के रूप में मौजूद है।
क्यों बढ़ी इतनी सख्ती?
अमेरिका लंबे समय से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चिंतित है। वॉशिंगटन को डर है कि ईरान उन्नत तकनीक के ज़रिए न्यूक्लियर क्षमता तक पहुंच सकता है।साथ ही ईरान पर मध्य-पूर्व में प्रॉक्सी समूहों को समर्थन इज़रायल के खिलाफ बढ़ती बयानबाज़ी समुद्री मार्गों में तनाव जैसे आरोप पहले से हैं।इन्हीं मुद्दों को लेकर ट्रंप ने कहा कि ईरान ‘अनिश्चितता’ पर नहीं, बल्कि सख्त समझौते पर ही भरोसा करे।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया क्या है?
ट्रंप के बयान के बाद यूरोपीय यूनियन ने कहा कि बातचीत जारी रहनी चाहिए।चीन ने दोनों देशों से संयम बरतने की अपील की रूस ने अमेरिका पर तनाव बढ़ाने का आरोप लगाया।तेल बाज़ार में तुरंत हलचल देखने को मिलीजो साफ करता है कि यह बयान अकेला नहीं इसका असर दुनिया के हर बड़े देश पर पड़ रहा है।
ईरान का रुख?
ईरान ने पलटकर कहा कि हम किसी दबाव में झुकने वाले नहीं। जो डील होगी, हमारी शर्तों पर होगी।ईरान का दावा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण है और अमेरिका ही तनाव भड़का रहा है।
क्यों इतना महत्वपूर्ण है यह डील?
क्योंकि अगर ये डील नहीं बनती, तो हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य फिर से तनाव का केंद्र बन सकता है वैश्विक तेल कीमतें आसमान छू सकती हैं।मध्य-पूर्व में संघर्ष तेज हो सकता है।इज़रायल ईरान टकराव और बढ़ सकता है यानी, यह सिर्फ दो देशों का मुद्दा नहीं पूरी दुनिया की स्थिरता दांव पर है।
ट्रंप की रणनीति
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप मैक्सिमम प्रेशर स्ट्रैटेजी पर काम कर रहे हैं पहले धमकी फिर आर्थिक दबाव फिर बातचीत और फिर अपनी शर्तों पर डील वह ईरान को एक ऐसी स्थिति में ले जाना चाहते हैं जहां उसे अमेरिकी शर्तें स्वीकार करने के अलावा कोई विकल्प न बचे।
