बिहार की राजनीति में राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के राष्ट्रीय अधिवेशन ने एक बार फिर सियासी हलचल तेज कर दी है। पार्टी ने उपेंद्र कुशवाहा पर भरोसा जताते हुए उन्हें दोबारा राष्ट्रीय अध्यक्ष चुन लिया, लेकिन इस अधिवेशन की सबसे ज्यादा चर्चा उनके बेटे और बिहार सरकार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश को लेकर दिए गए बयान की हो रही है। पिछले कुछ समय से दीपक प्रकाश के मंत्री पद को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं और राजनीतिक गलियारों में उनके भविष्य को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। ऐसे माहौल में उपेंद्र कुशवाहा ने खुलकर अपनी बात रखी और साफ शब्दों में कहा कि दीपक प्रकाश के मंत्री पद को लेकर किसी तरह का भ्रम नहीं होना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि एनडीए नेतृत्व को उन पर पूरा भरोसा है और जब तक बिहार में एनडीए की सरकार है, तब तक दीपक प्रकाश मंत्री बने रहेंगे। कुशवाहा के इस बयान ने बिहार की सियासत में एक नई बहस को जन्म दे दिया है।
दीपक प्रकाश के मंत्री पद पर क्या बोले कुशवाहा?
राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाने के बाद उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि एनडीए के शीर्ष नेतृत्व ने दूरदर्शिता और राजनीतिक समझदारी का परिचय दिया है। उन्होंने कहा कि यदि गठबंधन नेतृत्व को दीपक प्रकाश पर भरोसा नहीं होता तो उन्हें दोबारा मंत्री नहीं बनाया जाता। कुशवाहा ने साफ शब्दों में कहा कि जब तक बिहार में एनडीए की सरकार है, तब तक दीपक प्रकाश मंत्री बने रहेंगे। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब संवैधानिक नियमों के कारण उनके मंत्री पद को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं।
मंत्री पद को लेकर क्यों उठ रहे हैं सवाल?
दरअसल, दीपक प्रकाश ने 7 मई 2026 को दूसरी बार मंत्री पद की शपथ ली थी। संविधान के अनुसार यदि कोई मंत्री विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य नहीं है, तो वह अधिकतम छह महीने तक ही मंत्री पद पर रह सकता है। इस हिसाब से दीपक प्रकाश को 6 नवंबर 2026 तक किसी सदन का सदस्य बनना होगा। लेकिन हालिया विधान परिषद चुनाव में उन्हें उम्मीदवार नहीं बनाया गया, जिससे उनके एमएलसी बनने की संभावना लगभग खत्म हो गई है। ऐसे में विपक्ष और राजनीतिक विश्लेषक उनके मंत्री पद के भविष्य को लेकर सवाल उठा रहे हैं, जबकि उपेंद्र कुशवाहा लगातार भरोसा जता रहे हैं कि समाधान निकाला जाएगा।
अधिवेशन में उठे कई बड़े राजनीतिक मुद्दे
RLM के राष्ट्रीय अधिवेशन में केवल संगठनात्मक फैसले ही नहीं हुए, बल्कि कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव भी पारित किए गए। पार्टी ने नीतीश कुमार के 20 वर्षों के शासनकाल में बिहार में सड़क, बिजली, परिवहन और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं में हुए सुधार की सराहना की। साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग और रोजगार के क्षेत्र में और अधिक काम करने की जरूरत बताई। अधिवेशन में न्यायिक सुधार, कॉलेजियम व्यवस्था में बदलाव, 2026 परिसीमन में जनसंख्या को आधार बनाने, पटना का नाम बदलकर पाटलिपुत्र करने और संसद परिसर में भारत रत्न कर्पूरी ठाकुर की आदमकद प्रतिमा स्थापित करने जैसी मांगों को भी प्रमुखता से उठाया गया। इन प्रस्तावों के जरिए पार्टी ने आगामी राजनीतिक रणनीति और अपनी प्राथमिकताओं का स्पष्ट संकेत देने की कोशिश की।
