बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं का सीजन शुरू होते ही रेलवे स्टेशनों पर उमड़ रही अभ्यर्थियों की भीड़ ने एक बार फिर रेलवे की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। 13 जून की रात पाटलिपुत्र रेलवे स्टेशन पर जो कुछ हुआ, उसने केवल एक स्टेशन की अव्यवस्था नहीं दिखाई, बल्कि यह उस बड़ी समस्या की तस्वीर बनकर सामने आया जिसमें लाखों छात्र परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने के लिए सीमित संसाधनों पर निर्भर हैं। ट्रेनों में जगह न मिलने, लगातार बढ़ती भीड़ और पर्याप्त व्यवस्था के अभाव से नाराज छात्रों का गुस्सा आखिरकार स्टेशन परिसर में फूट पड़ा। इस घटना के बाद रेलवे प्रशासन को अपनी रणनीति बदलनी पड़ी और पहले घोषित दो स्पेशल ट्रेनों की जगह अब 16 परीक्षा स्पेशल ट्रेनें चलाने का फैसला लिया गया है।पाटलिपुत्र हंगामे के बाद रेलवे अलर्ट | फोटो: NDTV

परीक्षा सीजन में बढ़ा दबाव, व्यवस्था पड़ गई कम

पिछले कुछ वर्षों में रेलवे भर्ती, एसएससी, बैंकिंग, केंद्रीय और राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों की संख्या लगातार बढ़ी है। बिहार देश के उन राज्यों में शामिल है जहां बड़ी संख्या में युवा सरकारी नौकरियों की तैयारी करते हैं। परीक्षा तिथियों की घोषणा होते ही हजारों छात्र एक साथ दूसरे शहरों और राज्यों की ओर रवाना होते हैं। ऐसे समय में नियमित ट्रेनों की क्षमता अक्सर कम पड़ जाती है। पाटलिपुत्र स्टेशन पर भी यही स्थिति देखने को मिली, जहां बड़ी संख्या में छात्र परीक्षा देने के लिए पहुंचे, लेकिन ट्रेनों में सीटें उपलब्ध नहीं थीं। कई ट्रेनों में क्षमता से कहीं अधिक यात्री सवार हो गए, जिससे अव्यवस्था और नाराजगी बढ़ती चली गई।

छात्रों के विरोध के बाद बदला रेलवे का फैसला

हंगामे के बाद रेलवे मुख्यालय में स्थिति की समीक्षा की गई। अधिकारियों ने माना कि परीक्षा सीजन के दौरान यात्रियों की वास्तविक संख्या का सही आकलन नहीं हो पाया था। इसके बाद पूर्व मध्य रेलवे ने बड़ा निर्णय लेते हुए परीक्षा अभ्यर्थियों के लिए कुल 16 स्पेशल ट्रेनों के संचालन की घोषणा की। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इन ट्रेनों का संचालन उन मार्गों पर किया जाएगा जहां छात्रों की सबसे अधिक आवाजाही होती है। इसके साथ ही जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त कोच लगाने की व्यवस्था भी की जाएगी, ताकि सामान्य ट्रेनों पर दबाव कम हो और यात्रियों को बेहतर सुविधा मिल सके।

रेलवे के सामने चुनौती केवल भीड़ नहीं, भरोसे की भी

विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल अतिरिक्त ट्रेनों का नहीं है, बल्कि यात्रियों के भरोसे से भी जुड़ा हुआ है। हर परीक्षा सीजन में छात्रों को टिकट, सीट और समय पर यात्रा जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। कई बार अभ्यर्थी परीक्षा केंद्र तक पहुंचने के लिए घंटों प्लेटफॉर्म पर इंतजार करते हैं या भीड़भाड़ वाली ट्रेनों में सफर करने को मजबूर हो जाते हैं। पाटलिपुत्र की घटना ने दिखाया कि यदि मांग और व्यवस्था के बीच संतुलन नहीं बनाया गया, तो ऐसी घटनाएं दोबारा भी हो सकती हैं। यही कारण है कि रेलवे अब भविष्य की परीक्षाओं को ध्यान में रखते हुए भीड़ प्रबंधन और विशेष ट्रेनों की योजना पर अधिक गंभीरता से काम कर रहा है।

सुरक्षा एजेंसियां भी अलर्ट, उपद्रवियों की पहचान जारी

स्टेशन पर हुए हंगामे के बाद रेलवे सुरक्षा बल (RPF), जीआरपी और स्थानीय पुलिस को भी अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। घटना के दौरान हुई तोड़फोड़ और अव्यवस्था की जांच जारी है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज, वीडियो क्लिप और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर उन लोगों की पहचान कर रही है, जिन्होंने सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। अधिकारियों का कहना है कि कानून-व्यवस्था बिगाड़ने और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम ने रेलवे प्रशासन को यह संदेश भी दे दिया है कि परीक्षा सीजन में भीड़ को केवल सुरक्षा बलों के भरोसे नहीं संभाला जा सकता, बल्कि समय रहते पर्याप्त परिवहन व्यवस्था करना भी उतना ही जरूरी है।