
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल के साथ डीपफेक का खतरा भी तेजी से बढ़ रहा है। अब सोशल मीडिया पर डाली गई एक साधारण फोटो का इस्तेमाल करके नकली वीडियो तैयार किए जा सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपनी तस्वीरों की सुरक्षा के लिए कुछ जरूरी प्राइवेसी सेटिंग्स अपनाना बेहद जरूरी है।
क्या है डीपफेक का खतरा?
डीपफेक तकनीक में AI की मदद से किसी व्यक्ति के चेहरे को किसी दूसरे वीडियो पर इस तरह लगाया जाता है कि वह बिल्कुल असली लगे। यदि आपकी तस्वीरें फेसबुक पर सार्वजनिक (Public) हैं, तो कोई भी उन्हें डाउनलोड कर सकता है और उनका गलत इस्तेमाल कर सकता है।
कैसे सुरक्षित रखें अपनी तस्वीरें?
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि फेसबुक पर अपनी फोटो और एल्बम की विजिबिलिटी "Friends" या "Only Me" पर रखें। साथ ही Privacy Checkup फीचर का उपयोग कर यह जांचते रहें कि आपकी पोस्ट और तस्वीरें कौन देख सकता है।

टैगिंग और प्रोफाइल सेटिंग्स पर रखें नजर
कई बार लोग आपकी तस्वीरों को टैग कर देते हैं, जिससे वे अधिक लोगों तक पहुंच जाती हैं। इससे बचने के लिए Profile and Tagging सेटिंग्स में जाकर टैग की गई पोस्ट की समीक्षा (Review) का विकल्प चालू करें।

गलत इस्तेमाल होने पर क्या करें?
अगर आपकी तस्वीरों का उपयोग करके कोई फर्जी वीडियो बनाया जाता है, तो तुरंत संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उसकी शिकायत करें। इसके अलावा भारत सरकार के साइबर क्राइम पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया पर कम से कम निजी तस्वीरें साझा करना और अनजान लोगों की फ्रेंड रिक्वेस्ट से बचना भी सुरक्षा के लिए जरूरी है।
