erereerer | Source: ee नई दिल्ली। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने छात्रों के प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर एक बार फिर सीधा निशाना साधा है। राहुल गांधी ने रविवार, 9 अगस्त को सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट के जरिए सवाल उठाया कि 20 जुलाई को देश की राजधानी में छात्रों पर लाठियां चलीं और पैलेट गन का इस्तेमाल हुआ, लेकिन गृह मंत्री की ओर से इस मामले पर एक शब्द भी नहीं कहा गया। राहुल गांधी ने इसे छात्रों के साथ हुई कथित ज्यादती और सरकार की जवाबदेही से जोड़ते हुए अमित शाह से जवाब मांगा।

राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में प्रयागराज में एक छात्र से हुई मुलाकात का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि छात्र ने उनसे कहा, “अब मेरे पास कोई रास्ता नहीं बचा।” राहुल गांधी के अनुसार, उस छात्र ने वर्षों तक परीक्षा की तैयारी की, परिवार ने उसकी पढ़ाई के लिए जमीन बेची और माता-पिता ने कर्ज लिया, लेकिन अंत में उसके हाथ कुछ नहीं आया। राहुल गांधी ने कहा कि ऐसी स्थिति में असफलता केवल उस छात्र की नहीं है, बल्कि उस व्यवस्था की है जो उसकी मेहनत का उचित परिणाम देने में विफल रही।

‘जवाबदेही मांगना बंद नहीं करेंगे’, अमित शाह को राहुल गांधी की चुनौती

राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को सीधे संबोधित करते हुए कहा कि सरकार को यह नहीं समझना चाहिए कि विपक्ष जवाबदेही मांगना बंद कर देगा। उन्होंने आरोप लगाया कि राजधानी की सड़कों पर छात्रों पर लाठियां और पैलेट चलीं, लेकिन गृह मंत्री की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।

राहुल गांधी ने कहा कि आज नहीं तो कल, इस मामले की जवाबदेही तय करनी होगी। उन्होंने छात्रों को देश की रोशनी बताते हुए कहा कि वह उनके साथ पूरी मजबूती से खड़े हैं। राहुल गांधी के इस बयान के बाद छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है।

‘तेरह दिन हो गए’, गृह मंत्री पर उठाया सवाल

राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में यह भी कहा कि घटना को 13 दिन बीत चुके हैं, लेकिन गृह मंत्री अमित शाह की ओर से इस संबंध में कोई बयान नहीं आया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि माफी मांगने के बजाय वह क्षमा बांटने की बात कर रहे हैं।

राहुल गांधी के मुताबिक, छात्रों की समस्याओं को केवल परीक्षा या रोजगार से जुड़े आंकड़ों के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। इसके पीछे वर्षों की मेहनत, परिवारों का आर्थिक बोझ और युवाओं की उम्मीदें जुड़ी होती हैं। उन्होंने इसी संदर्भ में प्रयागराज के छात्र की परेशानी का उल्लेख किया।

प्रयागराज में छात्रों के कार्यक्रम में भी केंद्र पर बरसे राहुल गांधी

इससे पहले शनिवार को राहुल गांधी ने प्रयागराज के केपी ग्राउंड में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में विद्यार्थियों को संबोधित किया था। इस दौरान उन्होंने केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए बेरोजगारी का मुद्दा उठाया। राहुल गांधी ने दावा किया कि देश में 1000 लोगों में से केवल 12 लोगों को स्थायी नौकरी मिल पा रही है।

उन्होंने युवाओं के रोजगार और भविष्य को लेकर चिंता जाहिर की तथा कहा कि देश की बड़ी युवा आबादी उसकी सबसे बड़ी ताकत है। राहुल गांधी ने युवाओं से जुड़े रोजगार के सवाल को सरकार की नीतियों से जोड़ते हुए केंद्र पर हमला बोला।

सोशल मीडिया को बताया युवाओं के लिए ‘21वीं सदी का नशा’

प्रयागराज में छात्रों को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि युवाओं को सोशल मीडिया का नशा दिया जा रहा है। राहुल गांधी के अनुसार, युवाओं का डाटा लेकर उसे जियो, अडाणी, फेसबुक और गूगल जैसी कंपनियों को दिया जा रहा है।

उन्होंने युवाओं के सामने सोशल मीडिया और डिजिटल सामग्री से जुड़ी गतिविधियों का उदाहरण रखते हुए कहा कि उन्हें रील देखने, वाट्सऐप संदेश भेजने और इंस्टाग्राम पर सामग्री बनाने में व्यस्त किया जा रहा है। राहुल गांधी ने इसे 21वीं सदी का नशा बताया।

उन्होंने कहा कि इसके बाद युवाओं से ब्लिंकिट, उबर में काम करने या मजदूरी करने के लिए कहा जाता है, जबकि उन्हें स्थायी रोजगार नहीं मिल रहा है। राहुल गांधी ने कहा कि भारत में करीब 40 करोड़ युवा हैं और यही देश की वास्तविक ताकत हैं।

20 जुलाई की घटना पर संसद में भी टकराव

छात्रों के प्रदर्शन के दौरान 20 जुलाई को हुई कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर संसद के दोनों सदनों में भी सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध बना हुआ है। विपक्ष की मांग है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इस मुद्दे पर दोनों सदनों में बयान दें। इस विषय को लेकर संसद में कई बार हंगामा हुआ है और विधायी कामकाज का बड़ा हिस्सा शोर-शराबे के बीच आगे बढ़ा है।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी छात्रों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर संसद में बयान नहीं देने के लिए अमित शाह की आलोचना की थी। उन्होंने कहा था कि सभापति सीपी राधाकृष्णन की ओर से गृह मंत्री से सदन में बयान देने के लिए कहे जाने के बावजूद अमित शाह राज्यसभा में नहीं आए।

सरकार ने विपक्ष की मांग पर दिया अलग तर्क

विपक्ष की ओर से गृह मंत्री के बयान की मांग के बीच संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने शुक्रवार को लोकसभा में सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि विपक्ष यह तय नहीं कर सकता कि कौन सा मंत्री सदन में आकर उनके सवालों का जवाब देगा।

इस तरह छात्रों के प्रदर्शन, कथित पुलिस कार्रवाई और गृह मंत्री के बयान को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव जारी है। राहुल गांधी लगातार इस मुद्दे को छात्रों, बेरोजगारी और सरकार की जवाबदेही से जोड़कर उठा रहे हैं, जबकि सरकार की ओर से विपक्ष की मांग को लेकर अलग रुख सामने आया है।

छात्रों के मुद्दे पर सियासी लड़ाई और तेज

राहुल गांधी के ताजा बयान से साफ है कि कांग्रेस छात्रों के प्रदर्शन और रोजगार से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक रूप से जोरदार तरीके से उठाने की तैयारी में है। उन्होंने प्रयागराज में छात्रों से संवाद के दौरान बेरोजगारी का मुद्दा उठाया और सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर भी युवाओं को आगाह किया। इसके बाद एक्स पर पोस्ट के जरिए उन्होंने 20 जुलाई की घटना और अमित शाह की कथित चुप्पी को लेकर सवाल उठाया।

छात्रों की कथित पुलिस कार्रवाई पर गृह मंत्री के बयान की विपक्ष की मांग और सरकार की ओर से दिए गए जवाब के बीच संसद में गतिरोध भी बना हुआ है। ऐसे में राहुल गांधी का नया हमला इस पूरे विवाद को एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीतिक बहस के केंद्र में ले आया है। छात्रों की मांग, कथित पुलिस कार्रवाई, रोजगार और संसद में जवाबदेही जैसे मुद्दों पर सरकार और विपक्ष के बीच आगे भी टकराव जारी रहने के संकेत हैं।