
Source : News 4 Nation
पटना के ऐतिहासिक और संवेदनशील माने जाने वाले पीरबहोर थाने में 36 वर्षों बाद एक ऐसा प्रशासनिक बदलाव हुआ है, जिसने पुलिस महकमे से लेकर राजनीतिक गलियारों तक चर्चा छेड़ दी है। बिहार पुलिस मुख्यालय ने राजकुमार सिंह को पीरबहोर थाने का नया थाना प्रभारी नियुक्त किया है। खास बात यह है कि वर्ष 1990 के बाद पहली बार इस थाने की कमान किसी गैर-मुस्लिम अधिकारी को सौंपी गई है। लंबे समय से चली आ रही नियुक्ति की इस परंपरा के टूटने को लेकर विभिन्न स्तरों पर चर्चाएं तेज हैं, हालांकि पुलिस विभाग इसे नियमित प्रशासनिक फेरबदल का हिस्सा बता रहा है।
तीन दशक से अधिक समय बाद टूटा नियुक्तियों का लंबा सिलसिला
पीरबहोर थाना राजधानी पटना का एक महत्वपूर्ण थाना माना जाता है, जिसके अंतर्गत कई प्रमुख शैक्षणिक संस्थान, व्यावसायिक प्रतिष्ठान और घनी आबादी वाले क्षेत्र आते हैं। वर्ष 1990 में जेड. अहमद की नियुक्ति के बाद यहां लगातार मुस्लिम अधिकारियों को थाना प्रभारी बनाया जाता रहा। इससे पहले विभिन्न समुदायों और सामाजिक पृष्ठभूमि के अधिकारियों की तैनाती इस थाने में होती थी। उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार राजकुमार सिंह से पहले जी. कुमार इस थाने के अंतिम हिंदू थाना प्रभारी थे, जिनका कार्यकाल 1987 से 1990 तक रहा था। अब 36 वर्षों बाद इस परंपरा में बदलाव देखने को मिला है।
सज्जाद गद्दी की विदाई के साथ हुआ नेतृत्व परिवर्तन
पीरबहोर थाने के पूर्व प्रभारी सज्जाद गद्दी ने जुलाई 2025 में पदभार संभाला था। वह इस क्रम में नियुक्त होने वाले 22वें मुस्लिम थाना प्रभारी थे। करीब 11 महीने के कार्यकाल के बाद उन्हें पद से हटाकर शास्त्रीनगर का सर्किल इंस्पेक्टर बनाया गया है। उनकी जगह राजकुमार सिंह को जिम्मेदारी सौंपी गई है। पुलिस विभाग का कहना है कि यह निर्णय प्रशासनिक आवश्यकता और कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से लिया गया है। हालांकि इतनी लंबी अवधि के बाद हुए इस बदलाव ने स्वाभाविक रूप से लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है।
प्रशासनिक निर्णय से आगे बढ़कर बन गया चर्चा का विषय
बिहार की राजनीति में प्रशासनिक नियुक्तियों को अक्सर व्यापक संदर्भों में देखा जाता है और पीरबहोर थाने का यह बदलाव भी उससे अछूता नहीं है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के कारण यह नियुक्ति सामान्य तबादले से कहीं अधिक महत्व रखती है। दूसरी ओर सरकार और पुलिस मुख्यालय लगातार यह स्पष्ट कर रहे हैं कि अधिकारियों की पोस्टिंग योग्यता, अनुभव और प्रशासनिक जरूरतों के आधार पर की जाती है। बावजूद इसके, 36 वर्षों बाद पीरबहोर थाने में हुए इस नेतृत्व परिवर्तन ने प्रशासनिक व्यवस्था, राजनीतिक विमर्श और सामाजिक प्रतिनिधित्व को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
