
वंदे मातरम के पूर्ण गायन को लेकर कांग्रेस सांसद राजमोहन उन्नीथन का बयान।Source : Chrome
केरल में ‘वंदे मातरम’ के पूर्ण संस्करण के सामूहिक गायन को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ता नजर आ रहा है। कासरगोड से कांग्रेस सांसद राजमोहन उन्नीथन ने कहा है कि केरल में वंदे मातरम उसी तरीके से गाया जाएगा, जिस तरह अब तक गाया जाता रहा है। उन्होंने साफ कहा कि इसका पूरा संस्करण गाने को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
‘जितना अब तक गाते आए हैं, उतना ही गाएंगे’
राजमोहन उन्नीथन ने कहा कि वंदे मातरम का गायन पहले की तरह ही जारी रहेगा और इससे ज्यादा नहीं गाया जाएगा। उन्होंने यहां तक कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से धमकी दिए जाने के बावजूद उनका रुख नहीं बदलेगा।उनके इस बयान के बाद केरल की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है।
सरकारी निर्देश के बाद शुरू हुआ विवाद
दरअसल, केरल के मुख्य सचिव विश्वनाथ सिन्हा ने 6 अगस्त को सरकारी विभागों को एक पत्र जारी किया था। इसमें केंद्र सरकार के निर्देशों के अनुसार स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान वंदे मातरम के सामूहिक गायन की बात कही गई थी।यह कार्यक्रम ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के 2026 के तीसरे चरण से जुड़ा है। इस साल राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर देशभर में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।निर्देश के मुताबिक, कार्यक्रमों में राष्ट्रीय ध्वज फहराने के साथ वंदे मातरम का सामूहिक गायन किया जाना है। इसके अलावा लोगों को ‘हर घर तिरंगा’ पोर्टल के जरिए तिरंगे के साथ अपनी तस्वीर साझा करने के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री विजयन भी जता चुके हैं आपत्ति
इससे पहले केरल के मुख्यमंत्री पी. विजयन ने भी वंदे मातरम के पूर्ण गायन को लेकर केंद्र के निर्देशों पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने कहा था कि पूरे वंदे मातरम के गायन को लेकर RSS की नीति को देश पर थोपना स्वीकार नहीं किया जा सकता और ऐसे निर्देश वापस लिए जाने चाहिए।इसी मुद्दे पर कांग्रेस सांसद उन्नीथन ने भी अपना रुख स्पष्ट किया है।
‘राजभवन घटिया राजनीति का केंद्र बन गया’
राजमोहन उन्नीथन ने इस दौरान केरल के राजभवन और राज्यपाल को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि राजभवन अब घटिया राजनीति के केंद्र बन गए हैं।उन्होंने आरोप लगाया कि राज्यपाल केंद्र सरकार के प्रभाव में काम कर रहे हैं और ऐसे में उनसे निष्पक्षता की उम्मीद करना मुश्किल है। उन्नीथन ने कहा कि वह वंदे मातरम के पूर्ण गायन को स्वीकार नहीं करेंगे।
CPM ने भी सरकारी पत्र पर उठाए सवाल
वंदे मातरम को लेकर केरल में सिर्फ कांग्रेस ही नहीं, बल्कि सत्तारूढ़ वाम दलों की ओर से भी केंद्र के निर्देशों पर सवाल उठाए गए हैं।मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPM) ने मुख्य सचिव के पत्र की आलोचना करते हुए इसे वापस लेने की मांग की थी। पार्टी का आरोप है कि इस तरह के निर्देश जारी करके राज्य सरकार RSS के एजेंडे के आगे झुक रही है।
पहले भी उठ चुका है पूरा वंदे मातरम गाने का मुद्दा
केरल में वंदे मातरम के पूर्ण संस्करण को लेकर विवाद नया नहीं है। 29 मई 2026 को 16वीं केरल विधानसभा के उद्घाटन सत्र के दौरान पुलिस बैंड की ओर से वंदे मातरम का पूरा संस्करण नहीं गाए जाने पर भी विवाद हुआ था।उस समय बीजेपी ने कांग्रेस पर उसके गठबंधन सहयोगी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के दबाव में आने का आरोप लगाया था। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भी उस समय कहा था कि केंद्र सरकार को वंदे मातरम को लोगों पर अनावश्यक रूप से थोपने से बचना चाहिए।
अब बढ़ सकता है सियासी विवाद
केरल में कांग्रेस नेतृत्व वाला यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट सत्ता में है। ऐसे में केंद्र के निर्देश, राज्य सरकार का रुख और कांग्रेस सांसद राजमोहन उन्नीथन के बयान ने वंदे मातरम को लेकर राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।अब देखना होगा कि स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रमों में केरल सरकार और उसके विभाग केंद्र के निर्देशों को किस तरह लागू करते हैं और इस मुद्दे पर बीजेपी, कांग्रेस तथा वाम दलों के बीच सियासी टकराव कितना बढ़ता है।
