नागोया। भारतीय मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन के लिए 2 अक्टूबर 2026 का दिन यादगार बन गया। अपने 29वें जन्मदिन पर उन्होंने एशियन गेम्स 2026 के महिला 75 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में चीन की जियी बाओ को 5-0 से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। स्वर्ण जीतने के बाद लवलीना ने जापान में ही अपना जन्मदिन मनाया और केक काटा। उन्होंने केक का पहला टुकड़ा अपने कोच को खिलाया। जीत और जन्मदिन के इस दोहरे जश्न के बीच उनके कोच ने अब उनसे ओलंपिक स्वर्ण पदक की उम्मीद जताई है।
12 साल का इंतजार खत्म, एशियाई खेलों में भारत को मिला महिला मुक्केबाजी का स्वर्ण
लवलीना की इस जीत के साथ एशियाई खेलों की महिला मुक्केबाजी में भारत का 12 साल से चला आ रहा स्वर्ण पदक का इंतजार खत्म हुआ। उन्होंने फाइनल मुकाबले में चीन की जियी बाओ को एकतरफा अंदाज में 5-0 से शिकस्त दी। इससे पहले लवलीना ने पिछले एशियाई खेलों में रजत पदक जीता था। 2026 में स्वर्ण जीतकर उन्होंने अपने एशियाई खेलों के पदकों का रंग बदल दिया।
मैरी कॉम के बाद दूसरी भारतीय महिला बॉक्सर बनीं
इस स्वर्ण पदक के साथ लवलीना बोरगोहेन एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारत की दूसरी महिला मुक्केबाज बन गई हैं। उनसे पहले यह उपलब्धि मैरी कॉम ने हासिल की थी। लवलीना पहले ही टोक्यो ओलंपिक में कांस्य पदक जीतकर भारतीय मुक्केबाजी में अपनी पहचान बना चुकी हैं और अब एशियाई खेलों के स्वर्ण ने उनके अंतरराष्ट्रीय पदकों के खाते में एक और बड़ी उपलब्धि जोड़ दी है।
जन्मदिन पर केक काटकर मनाया जीत का जश्न
गोल्ड मेडल जीतने के बाद लवलीना ने जापान में अपना जन्मदिन मनाया। इस दौरान उन्होंने केक काटा और सबसे पहले अपने कोच को केक खिलाया। इस मौके पर कोच भी बेहद खुश नजर आए। उन्होंने कहा कि वह लवलीना के एशियन गेम्स गोल्ड से संतुष्ट नहीं हैं और अब उनसे ओलंपिक गोल्ड की उम्मीद है। इस तरह लवलीना के जन्मदिन का जश्न उनके अगले बड़े लक्ष्य की चर्चा के साथ पूरा हुआ।
एक समय मुक्केबाजी छोड़ने का बना लिया था मन
लवलीना ने मुकाबले के बाद अपने संघर्ष के बारे में खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि यह साल उनके लिए काफी मुश्किल रहा। यहां तक कि एक समय उन्होंने मुक्केबाजी छोड़ने के बारे में भी सोचा था। हालांकि उन्होंने खेल जारी रखा और एशियाई खेलों में अपने पिछले रजत पदक का रंग बदलने के लक्ष्य के साथ मैदान में उतरीं।
लवलीना ने कहा कि उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी कि उन्होंने खेलना जारी रखा। उनके करियर में हार और चोट जैसी मुश्किल परिस्थितियां आईं, लेकिन उन्होंने उनका सामना किया। उनके मुताबिक एशियाई खेलों का यह स्वर्ण पदक उनके लिए बहुत महत्व रखता है।
टोक्यो में कांस्य, पेरिस में निराशा और फिर शानदार वापसी
असम की रहने वाली लवलीना ने टोक्यो ओलंपिक में कांस्य पदक जीता था। इसके बाद पेरिस ओलंपिक में उन्हें पदक नहीं मिल सका। पेरिस ओलंपिक के बाद उन्होंने एक साल का ब्रेक लिया और फिर अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाजी में वापसी की। इस दौरान कॉमनवेल्थ गेम्स में भी वह स्वर्ण पदक जीतने से चूक गईं और उन्हें रजत पदक से संतोष करना पड़ा।
लवलीना ने माना कि कॉमनवेल्थ गेम्स में रजत पदक मिलने से वह खुश नहीं थीं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि एक खिलाड़ी के जीवन में हार और चोट जैसी परिस्थितियां आती रहती हैं और खिलाड़ी को इनका सामना करते हुए आगे बढ़ना पड़ता है।
फाइनल में पहले दो राउंड से बनाया दबाव
चीन की जियी बाओ के खिलाफ फाइनल मुकाबला लवलीना के लिए आसान नहीं था। उन्होंने शुरुआत में 3-2 के करीबी अंतर से शुरुआती राउंड अपने नाम किया। इसके बाद उन्होंने अगले दोनों राउंड में 4-1 के समान अंतर से बढ़त हासिल की और मुकाबले पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली।
पहले दो राउंड में बढ़त बनाने के बाद लवलीना आखिरी राउंड में सतर्क रहीं। उन्होंने मुकाबले के दौरान लगातार खुद को जीत के लिए प्रेरित किया। अंततः पांचों जजों के फैसले में उन्हें 5-0 से विजेता घोषित किया गया।
विरोधी के खेल से अनजान थीं लवलीना
लवलीना ने बताया कि वह जियी बाओ के खिलाफ पहली बार खेल रही थीं और उन्हें पहले से अंदाजा नहीं था कि उनकी प्रतिद्वंद्वी किस तरह मुक्केबाजी करेंगी। उन्होंने कहा कि मुकाबला काफी मुश्किल था और आखिरी राउंड विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण रहा। इसके बावजूद उन्होंने पूरे मुकाबले में अपना ध्यान जीत पर बनाए रखा।
लवलीना के मुताबिक उन्होंने हार के बारे में एक सेकंड के लिए भी नहीं सोचा। उनका पूरा ध्यान इस बात पर था कि किसी भी स्थिति में मुकाबला जीतना है। पहले दो राउंड जीतने के बाद उन्होंने खुद को तीसरा राउंड भी जीतने के लिए प्रेरित किया।
जीत के बाद सबसे पहले मां को फोन करने की बात
स्वर्ण पदक जीतने के बाद जब लवलीना से पूछा गया कि वह सबसे पहले किसे फोन करेंगी, तो उन्होंने अपनी मां का नाम लिया। उन्होंने बताया कि उनकी मां उनके मुकाबले नहीं देखतीं, क्योंकि वह बहुत चिंतित रहती हैं। इसलिए जीत के बाद सबसे पहले मां से बात करना उनके लिए खास पल रहा।
'जापान मेरे लिए बहुत भाग्यशाली है'
लवलीना ने अपनी जीत के बाद कहा कि जापान उनके लिए बहुत भाग्यशाली रहा है। उन्होंने बताया कि वह हमेशा जीतने के बारे में सोचती हैं और इस मुकाबले में भी उनका नजरिया सकारात्मक था। उन्होंने कहा कि स्वर्ण पदक जीतने के बाद उन्हें इस उपलब्धि को स्वीकार करने के लिए थोड़ा समय चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें मजबूत रहना होगा और जीतते रहना होगा। उनके बयान से साफ था कि एशियन गेम्स का स्वर्ण उनके लिए महत्वपूर्ण पड़ाव है, लेकिन वह आगे भी अपने खेल करियर को जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
जन्मदिन पर खुद को दिया गोल्ड मेडल का तोहफा
लवलीना ने अपने जन्मदिन को यादगार बनाने के लिए खुद को स्वर्ण पदक का तोहफा देने का लक्ष्य पहले ही तय कर रखा था। उन्होंने कहा कि उन्होंने सोचा था कि जन्मदिन पर उन्हें खुद को गोल्ड मेडल गिफ्ट करना चाहिए। फाइनल में उन्होंने इसी लक्ष्य के साथ मुकाबला किया और अंततः स्वर्ण पदक हासिल कर लिया।
29वें जन्मदिन पर मिली यह सफलता इसलिए भी खास रही क्योंकि यह उनका एशियाई खेलों में पहला स्वर्ण पदक है। इससे पहले वह एशियाई खेलों में रजत पदक जीत चुकी थीं।
कोच की नजर अब ओलंपिक स्वर्ण पर
लवलीना के कोच एशियन गेम्स में उनकी स्वर्ण पदक जीत से खुश हैं, लेकिन उन्होंने आगे का लक्ष्य भी स्पष्ट कर दिया है। कोच ने कहा कि उन्हें लवलीना से ओलंपिक स्वर्ण पदक की उम्मीद है। ऐसे में एशियन गेम्स का यह स्वर्ण उनके लिए अगले बड़े अंतरराष्ट्रीय लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।
