महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर रिसॉर्ट पॉलिटिक्स चर्चा के केंद्र में है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के चार सांसदों के राजस्थान के मकराना स्थित एक निजी रिसॉर्ट में ठहरने की खबर ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। पार्टी पहले से ही 9 में से 6 सांसदों की संभावित बगावत की आशंका से जूझ रही है। ऐसे में सांसदों का अचानक राजस्थान पहुंचना और दिल्ली में बुलाई गई अहम बैठक से दूरी बनाना कई सवाल खड़े कर रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह सिर्फ एक यात्रा नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति में बड़े बदलाव की भूमिका भी हो सकती है।राजस्थान रिसॉर्ट में ठहरे शिवसेना UBT सांसद, बढ़ा सियासी संकट

राजस्थान रिसॉर्ट में ठहरे शिवसेना UBT सांसद, बढ़ा सियासी संकट

राजस्थान के रिसॉर्ट से शुरू हुई नई सियासी चर्चा

सूत्रों के मुताबिक शिवसेना (UBT) के सांसद संजय जाधव, संजय डिना पाटिल, संजय देशमुख और नागेश पाटिल चार्टर विमान से राजस्थान के किशनगढ़ एयरपोर्ट पहुंचे थे। वहां से उन्हें सीधे नागौर जिले के मकराना स्थित एक निजी रिसॉर्ट ले जाया गया। बताया जा रहा है कि यह रिसॉर्ट एक मार्बल कारोबारी समूह के परिसर में स्थित है और यहां बाहरी लोगों की आवाजाही बेहद सीमित रहती है। हालांकि रिसॉर्ट प्रबंधन ने सांसदों के ठहरने की पुष्टि नहीं की है, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे रणनीतिक शिफ्टिंग माना जा रहा है। 2022 में एकनाथ शिंदे गुट की बगावत के दौरान भी विधायकों को पहले गुजरात और फिर असम के होटलों में रखा गया था, इसलिए इस घटनाक्रम को उसी पैटर्न से जोड़कर देखा जा रहा है।

दिल्ली की बैठक से दूरी ने बढ़ाया शक

गुरुवार को दिल्ली में शिवसेना (UBT) ने संसदीय दल की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई थी। पार्टी ने सभी सांसदों को उपस्थित रहने का निर्देश दिया था, लेकिन 9 में से केवल तीन सांसद ही बैठक में पहुंचे। चार सांसद राजस्थान में बताए जा रहे हैं, जबकि अन्य दो सांसदों की गतिविधियों को लेकर भी असमंजस बना हुआ है। पार्टी नेतृत्व के लिए सबसे बड़ा झटका यही रहा कि बैठक से अनुपस्थित सांसदों ने पहले से कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी। यही वजह है कि अब उनकी गैरमौजूदगी को महज संयोग नहीं बल्कि संभावित राजनीतिक रणनीति माना जा रहा है। दिल्ली की बैठक और राजस्थान के रिसॉर्ट के बीच बने इस राजनीतिक कनेक्शन ने बगावत की अटकलों को और मजबूत कर दिया है।

उद्धव गुट अलर्ट, नोटिस और कार्रवाई शुरू

सांसदों की गैरमौजूदगी के बाद शिवसेना (UBT) ने सख्त रुख अपनाया है। पार्टी ने सभी अनुपस्थित सांसदों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है और सात दिन के भीतर जवाब मांगा है। राज्यसभा सांसद संजय राउत ने इसे खुली गद्दारी बताते हुए कहा कि बालासाहेब ठाकरे की विरासत के खिलाफ साजिश रची जा रही है। पार्टी नेतृत्व को आशंका है कि ये सांसद अलग गुट बनाकर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो सकते हैं। यही कारण है कि संगठन स्तर पर कानूनी और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर तैयारी शुरू कर दी गई है। पार्टी अब यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि सांसदों की राजस्थान यात्रा के पीछे असली रणनीति क्या है।

क्या फिर दोहराई जाएगी 2022 वाली कहानी?

राजस्थान के रिसॉर्ट में सांसदों के ठहरने की खबर ने महाराष्ट्र की राजनीति को फिर उसी मोड़ पर ला खड़ा किया है, जहां 2022 में एकनाथ शिंदे की बगावत ने शिवसेना को दो हिस्सों में बांट दिया था। उस समय भी विधायकों को राज्य से बाहर सुरक्षित स्थानों पर रखा गया था और बाद में सत्ता परिवर्तन का रास्ता खुला था। अब लोकसभा सांसदों को लेकर सामने आ रही खबरें उद्धव ठाकरे के लिए नई चुनौती बन गई हैं। यदि 6 सांसद वास्तव में अलग रास्ता चुनते हैं, तो लोकसभा में उद्धव गुट की ताकत बुरी तरह प्रभावित होगी। फिलहाल सबकी नजर राजस्थान के उस रिसॉर्ट पर टिकी है, जहां ठहरे सांसदों की अगली राजनीतिक चाल महाराष्ट्र की राजनीति का भविष्य तय कर सकती है।