
उत्तराखंड की राजनीति में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत एक बार फिर चर्चा में हैं। रावत ने साफ कर दिया है कि वह 2027 का विधानसभा चुनाव खुद नहीं लड़ेंगे, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वह सक्रिय राजनीति से दूर हो रहे हैं। उनका कहना है कि पार्टी उन्हें जो भी जिम्मेदारी देगी, वह उसे पूरी मेहनत से निभाएंगे।
रावत के इस बयान के बाद उत्तराखंड कांग्रेस में उनकी आगे की भूमिका को लेकर चर्चा तेज हो गई है। खासकर इसलिए क्योंकि 2027 का विधानसभा चुनाव अब राज्य की राजनीति के लिए बड़ा मुद्दा बन चुका है।
21 अगस्त को दिए बयान में हरीश रावत ने कहा कि वह अगला विधानसभा चुनाव नहीं लड़ना चाहते। उन्होंने यह भी बताया कि उनके समर्थक भी अब उन्हें चुनावी मैदान में नहीं देखना चाहते। हालांकि, उन्होंने यह साफ कर दिया कि वह कांग्रेस से अलग नहीं हो रहे हैं।
रावत ने कहा कि पार्टी की तरफ से उन्हें जो जिम्मेदारी मिलेगी, वह उसे पूरी ताकत से निभाएंगे। यानी उनका फोकस अब खुद चुनाव लड़ने के बजाय पार्टी को चुनाव लड़ाने और मजबूत करने पर ज्यादा हो सकता है।
रावत के चुनाव नहीं लड़ने वाले बयान के बाद सोशल मीडिया पर यह चर्चा शुरू हो गई कि शायद वह राजनीति से संन्यास लेने जा रहे हैं। लेकिन रावत ने अगले ही दिन इन खबरों को खारिज कर दिया।
उन्होंने साफ कहा कि उन्होंने राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा नहीं की है। वह कांग्रेस और उत्तराखंड के लिए अपनी भूमिका निभाते रहेंगे। इसलिए फिलहाल यह समझना जरूरी है कि चुनाव नहीं लड़ना और राजनीति छोड़ देना, दोनों अलग-अलग बातें हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर हरीश रावत खुद चुनाव नहीं लड़ेंगे तो कांग्रेस में उनकी भूमिका क्या होगी।
रावत उत्तराखंड कांग्रेस के सबसे अनुभवी नेताओं में गिने जाते हैं। ऐसे में पार्टी उन्हें चुनाव प्रचार, उम्मीदवारों के बीच तालमेल और चुनावी रणनीति जैसे कामों में इस्तेमाल कर सकती है। हालांकि, पार्टी उन्हें कौन सी जिम्मेदारी देगी, इसका अंतिम फैसला कांग्रेस आलाकमान को करना है।
रावत पहले भी कह चुके हैं कि वह 2027 में खुद चुनाव लड़ने के बजाय कांग्रेस को चुनाव लड़ाने पर ध्यान देना चाहते हैं। उनका मानना है कि अगर वह पूरे राज्य में घूमकर पार्टी के लिए प्रचार करते हैं तो इससे कांग्रेस को ज्यादा फायदा हो सकता है।
हरीश रावत से यह सवाल भी पूछा गया कि अगर कांग्रेस 2027 में चुनाव जीतती है तो मुख्यमंत्री कौन होगा और क्या वह खुद इस दौड़ में शामिल होंगे।
इस पर रावत ने कहा कि मुख्यमंत्री पद का फैसला पार्टी आलाकमान करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश कांग्रेस हमेशा पार्टी के फैसले को मानती रही है और आगे भी ऐसा ही होगा। यानी उन्होंने मुख्यमंत्री पद को लेकर सीधे तौर पर अपनी दावेदारी पेश नहीं की है।
उत्तराखंड में 2027 का विधानसभा चुनाव कांग्रेस और बीजेपी दोनों के लिए अहम माना जा रहा है। ऐसे में हरीश रावत का खुद चुनाव से बाहर रहना कांग्रेस की रणनीति को प्रभावित कर सकता है।
रावत के पास लंबे राजनीतिक अनुभव के साथ राज्य की राजनीति की अच्छी समझ भी है। अब पार्टी के सामने यह चुनौती होगी कि उनके अनुभव का इस्तेमाल किस तरह किया जाए।
फिलहाल रावत ने एक बात साफ कर दी है—वह चुनाव नहीं लड़ेंगे, लेकिन कांग्रेस का साथ नहीं छोड़ेंगे। वह पार्टी के लिए काम करते रहेंगे और 2027 के चुनाव में कांग्रेस को मजबूत करने की कोशिश करेंगे। अब देखना होगा कि कांग्रेस उन्हें चुनाव से पहले कौन सी बड़ी जिम्मेदारी देती है और उनकी सक्रिय भूमिका पार्टी के प्रदर्शन पर कितना असर डालती है।
