देश की राजनीति में विपक्षी दलों के भीतर बढ़ती टूट और दल-बदल की घटनाओं ने नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कई सांसदों के अलग होने की चर्चा के बीच अब महाराष्ट्र में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के छह सांसदों के बागी रुख ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। इसी घटनाक्रम पर AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने तीखा तंज कसते हुए कहा, “शिकारी नया है, जाल पुराना है।” ओवैसी का यह बयान ऐसे समय आया है जब विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी पर लगातार अपने नेताओं और जनप्रतिनिधियों को तोड़ने के आरोप लगा रहे हैं।शिवसेना में टूट पर ओवैसी का तंज

शिवसेना में टूट पर ओवैसी का तंज

उद्धव ठाकरे की पार्टी में बगावत की चर्चा

राजनीतिक सूत्रों के अनुसार शिवसेना UBT के 9 लोकसभा सांसदों में से 6 सांसदों ने अलग गुट बना लिया है। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि इन सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय की इच्छा जताई है। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम पर अंतिम संवैधानिक और संसदीय प्रक्रिया अभी बाकी है। जिन सांसदों के नाम सामने आए हैं, उनमें भाऊसाहेब वाकचौरे, नागेश पाटिल आष्टीकर, संजय दीना पाटिल, संजय हरिभाऊ जाधव, ओमप्रकाश राजे निंबालकर और संजय देशमुख शामिल बताए जा रहे हैं। यदि यह विलय औपचारिक रूप से होता है तो यह उद्धव ठाकरे के लिए एक और बड़ा राजनीतिक झटका माना जाएगा।

ओवैसी ने उठाए बड़े सवाल

AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रतिक्रिया देते हुए विपक्षी दलों में हो रही टूट को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि बड़ी संख्या में सांसद लगातार भाजपा या एनडीए के साथ जाने का फैसला कर रहे हैं तो इसके पीछे के कारणों पर भी चर्चा होनी चाहिए। ओवैसी ने तंज भरे अंदाज में कहा कि हर बार किसी एक व्यक्ति या किसी एक नेता को दोष देकर राजनीतिक वास्तविकताओं से बचा नहीं जा सकता। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि देश में दल-बदल की राजनीति कोई नई बात नहीं है, लेकिन मौजूदा दौर में इसकी रफ्तार ने विपक्षी दलों की चुनौतियों को बढ़ा दिया है।

TMC में टूट की खबरों ने बढ़ाई चर्चा

शिवसेना UBT संकट के साथ-साथ तृणमूल कांग्रेस में कथित टूट की खबरों ने भी राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक TMC के 28 सांसदों में से 20 सांसदों ने अलग गुट बनाकर त्रिपुरा की नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी (NCPI) में शामिल होने का दावा किया है। इस समूह का नेतृत्व काकोली घोष दस्तीदार कर रही हैं, जो कभी ममता बनर्जी की करीबी नेताओं में गिनी जाती थीं। बागी सांसदों द्वारा एनडीए के साथ काम करने की इच्छा जताने की खबरों ने विपक्षी एकता को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि तृणमूल कांग्रेस की ओर से इन दावों पर राजनीतिक प्रतिक्रिया जारी है।

विपक्षी राजनीति के सामने नई चुनौती

लगातार हो रही टूट की घटनाओं ने विपक्षी गठबंधनों की स्थिरता और नेतृत्व क्षमता पर बहस छेड़ दी है। महाराष्ट्र में 2022 में शिवसेना के विभाजन के बाद अब लोकसभा सांसदों के स्तर पर संभावित टूट उद्धव ठाकरे की राजनीतिक ताकत को प्रभावित कर सकती है। वहीं पश्चिम बंगाल में TMC को लेकर सामने आई खबरों ने भी विपक्षी दलों की एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले महीनों में यह तय होगा कि ये घटनाएं केवल आंतरिक असंतोष का परिणाम हैं या फिर राष्ट्रीय राजनीति में शक्ति संतुलन बदलने की बड़ी रणनीति का हिस्सा।