नई दिल्ली। महाराष्ट्र में आदिवासी आवासीय और आश्रम स्कूलों की स्थिति को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने एक नई मुहिम शुरू करने का ऐलान किया है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके की अगुवाई में 17 सितंबर से महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले में ‘आदिवासी स्कूल ठीक करो’ अभियान शुरू किया जा रहा है। इस अभियान के तहत सरकारी आदिवासी स्कूलों और छात्रावासों की व्यवस्थाओं की जांच तथा वहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों की समस्याओं को सामने लाने की बात कही गई है।
छात्राओं ने बातचीत में बताईं कई परेशानियां
इस अभियान की शुरुआत से पहले बुधवार को अभिजीत दीपके ने विदर्भ और मराठवाड़ा क्षेत्र से आईं कई आदिवासी छात्राओं से बातचीत की। छात्राओं ने इस दौरान अपने स्कूलों और छात्रावासों में होने वाली कथित परेशानियों के बारे में जानकारी दी। बातचीत के दौरान कुछ छात्राओं ने आश्रम स्कूलों में छात्राओं की सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर आरोप भी लगाए।
छात्राओं की ओर से यह दावा किया गया कि कई आदिवासी आश्रम स्कूलों में बच्चियों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कुछ छात्राओं ने कथित यौन शोषण की घटनाओं का भी उल्लेख किया। इसके अलावा छात्राओं ने यह आरोप भी लगाया कि कुछ स्थानों पर लड़कियों को प्रेग्नेंसी टेस्ट कराने के लिए मजबूर किया जाता है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं हुई है।
एक कमरे में 15 छात्राओं के रहने का दावा
बातचीत के दौरान भंडारा के एक आदिवासी छात्रावास का मुद्दा भी सामने आया। एक छात्रा ने बताया कि छात्रावास में एक कमरे में करीब 15 लड़कियों को रखा जाता है। छात्राओं ने कहा कि रहने की व्यवस्था के साथ-साथ वॉशरूम के इस्तेमाल और अन्य बुनियादी सुविधाओं को लेकर भी उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
लोकमत की रिपोर्ट का हवाला देते हुए यह भी बताया गया कि कुछ छात्राओं ने आश्रम स्कूलों में कथित तौर पर जबरन प्रेग्नेंसी टेस्ट कराए जाने की बात कही है। छात्राओं ने छात्रवृत्ति से जुड़ी समस्याओं समेत दूसरी दिक्कतों का भी उल्लेख किया।
आरोपियों को बचाने का भी लगाया आरोप
बुधवार को हुई बातचीत में कुछ छात्राओं ने यह आरोप भी लगाया कि कथित मामलों में मुख्य आरोपियों को बचाने के लिए आदिवासी समुदाय के बच्चों को आरोपी बनाया जा रहा है। छात्राओं ने सरकारी आदिवासी स्कूलों में पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने की बात भी कही।
इन आरोपों के सामने आने के बाद आदिवासी स्कूलों और छात्रावासों में विद्यार्थियों की सुरक्षा, रहने की व्यवस्था तथा उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, सामने आए आरोपों की पुष्टि संबंधित सरकारी जांच या स्वतंत्र जांच के निष्कर्षों से होना बाकी है।
नागपुर में छात्रों का प्रदर्शन, दीपके ने दिया समर्थन
इसी बीच नागपुर स्थित आदिवासी विकास भवन में कई आदिवासी छात्र विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, अभिजीत दीपके ने इन छात्रों के आंदोलन को समर्थन देने की घोषणा की है। उन्होंने राज्य सरकार के खिलाफ होने वाले प्रदर्शन में शामिल होने की बात भी कही है।
दीपके ने विद्यार्थियों से अपनी समस्याओं और उनके सामने आने वाली परेशानियों की जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने को कहा है। इसके लिए उन्होंने व्हाट्सऐप समूह बनाने की बात भी कही, ताकि छात्र अपनी समस्याओं को साझा कर सकें और अभियान से जुड़े लोगों तक जानकारी पहुंचाई जा सके।
गढ़चिरौली से शुरू होगा ‘आदिवासी स्कूल ठीक करो’ अभियान
अभिजीत दीपके ने बुधवार को घोषणा की कि 17 सितंबर से महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले से ‘आदिवासी स्कूल ठीक करो’ अभियान की शुरुआत की जाएगी। इससे पहले कॉकरोच जनता पार्टी की ओर से ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान चलाया जा रहा था। अब पार्टी ने आदिवासी क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों और आवासीय विद्यालयों को इस अभियान के केंद्र में रखने की बात कही है।
दीपके ने कहा, ‘देशभर के आदिवासी क्षेत्रों के स्कूलों की पिछले 80 वर्ष में सभी सरकारों ने उपेक्षा की है। इसलिए हम महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले से गुरुवार को आदिवासी स्कूल ठीक करो अभियान शुरू कर रहे हैं।’
उन्होंने आदिवासी विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध शिक्षा और आवासीय सुविधाओं पर सवाल उठाते हुए कहा, ‘लगभग सभी सरकारों ने आदिवासी छात्रों की अनदेखी की है... राजनीतिक दल हर जिले में करोड़ों रुपये खर्च कर अपने पार्टी मुख्यालय बनाते हैं, लेकिन उन आदिवासी आवासीय विद्यालयों के लिए उनके पास धन नहीं है, जो ज्यादातर किराये की इमारतों से संचालित होते हैं।’
आदिवासी शिक्षा पर सरकार से प्राथमिकता देने की मांग
दीपके ने आदिवासी समुदाय की शिक्षा और उससे जुड़ी व्यवस्थाओं को प्राथमिकता देने की मांग की। उन्होंने कहा, ‘सरकार को आदिवासी समुदाय को प्राथमिकता देनी होगी क्योंकि इसकी आबादी बहुत बड़ी है। केवल 7.8 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि दर का दावा करना या पांच हजार अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की बात करना पर्याप्त नहीं है।’
उनके मुताबिक, आर्थिक विकास के आंकड़ों के साथ आदिवासी विद्यार्थियों के लिए शिक्षा और आवासीय विद्यालयों की सुविधाओं पर भी ध्यान दिया जाना जरूरी है। अभियान के जरिए पार्टी आदिवासी स्कूलों की स्थिति को सार्वजनिक चर्चा में लाने का प्रयास कर रही है।
आदिवासी विद्यार्थियों की मौतों का भी उठाया मुद्दा
अभिजीत दीपके ने आदिवासी विद्यार्थियों की मौतों को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि कई आदिवासी विद्यार्थियों की मौत सांप के काटने से हो जाती है और ऐसी घटनाओं पर सरकार की ओर से पर्याप्त प्रतिक्रिया नहीं आती।
उन्होंने कहा, ‘कई आदिवासी विद्यार्थियों की मौत सांप के काटने से हो जाती है। लेकिन इन मौतों पर सरकार की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आती। यदि ये मौतें पुणे या मुंबई में हुई होतीं तो पूरे देश में हंगामा मच जाता।’
हाल ही में अभिजीत दीपके मध्य प्रदेश के बालाघाट भी पहुंचे थे। अब महाराष्ट्र के गढ़चिरौली से शुरू होने वाले अभियान के जरिए आदिवासी स्कूलों की व्यवस्थाओं, छात्रावासों की स्थिति और विद्यार्थियों की ओर से बताई जा रही समस्याओं को सामने लाने की बात कही गई है।
अभियान के जरिए स्कूलों की स्थिति पर उठेंगे सवाल
‘आदिवासी स्कूल ठीक करो’ अभियान के तहत सरकारी आदिवासी स्कूलों का दौरा किए जाने की योजना है। बुधवार को छात्राओं के साथ हुई बातचीत में सामने आई शिकायतों ने अभियान को लेकर ध्यान आकर्षित किया है। खासतौर पर छात्रावासों में रहने की व्यवस्था, वॉशरूम, छात्रवृत्ति, सुरक्षा और छात्राओं द्वारा लगाए गए प्रेग्नेंसी टेस्ट संबंधी आरोप इस पूरे मामले के महत्वपूर्ण बिंदु हैं।
फिलहाल इन आरोपों के संबंध में संबंधित विभागों या सरकार की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आने की जानकारी इस रिपोर्ट में नहीं है। ऐसे में छात्राओं द्वारा लगाए गए आरोपों और अभियान के दौरान सामने आने वाली शिकायतों की आधिकारिक जांच तथा संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
