बक्सर। हॉकी के महान खिलाड़ी और राष्ट्रभक्त मेजर ध्यानचंद की जयंती के अवसर पर मनाए जाने वाले राष्ट्रीय खेल दिवस पर बक्सर जिले में खेल गतिविधियों का उत्साह देखने को मिला। राष्ट्रव्यापी खेल संगठन क्रीड़ा भारती की ओर से देशभर में विभिन्न खेल गतिविधियां आयोजित की गईं। इसी क्रम में क्रीड़ा भारती, बक्सर जिला की ओर से जिले के अलग-अलग खेल मैदानों और स्थलों पर विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। इन प्रतियोगिताओं में छात्र-छात्राओं और युवाओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया तथा अपनी खेल प्रतिभा और खेल भावना का प्रदर्शन किया।
गंगा किनारे से सिपाही घाट तक दौड़े खिलाड़ी
राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर गंगा किनारे स्थित खेल मैदान, सिपाही घाट और सेंट्रल जेल रोड में बालक एवं बालिकाओं के लिए अलग-अलग 100 मीटर दौड़ प्रतियोगिता कराई गई। प्रतियोगिता में दर्जनों छात्र-छात्राओं ने उत्साह के साथ हिस्सा लिया। प्रतिभागियों के बीच बेहतर प्रदर्शन करने को लेकर खासा उत्साह दिखाई दिया।
दौड़ प्रतियोगिता ने बच्चों और युवाओं को अपनी शारीरिक क्षमता प्रदर्शित करने का अवसर दिया। प्रतिभागियों ने पूरे उत्साह और खेल भावना के साथ प्रतियोगिता में हिस्सा लेकर खेलों के प्रति अपनी रुचि का परिचय दिया।
खेलों से चरित्र निर्माण और राष्ट्र निर्माण का संदेश
इस अवसर पर प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए शिक्षाविद् सह समाजसेवी एवं क्रीड़ा भारती दक्षिण बिहार प्रांत के मंत्री डॉ. रमेश कुमार ने क्रीड़ा भारती की स्थापना, उसके उद्देश्य और कार्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि क्रीड़ा भारती समाज के सभी वर्गों के लोगों को स्वस्थ और सक्रिय जीवन के लिए खेल के मैदान से जोड़ने का कार्य कर रही है।
डॉ. रमेश कुमार ने कहा कि खेल केवल स्वस्थ जीवन का आधार नहीं हैं, बल्कि युवाओं के लिए कैरियर निर्माण का भी बेहतर माध्यम हैं। खेल गतिविधियों से आनंद, आत्मविश्वास, अनुशासन और सकारात्मक सोच का विकास होता है। उन्होंने क्रीड़ा भारती के ध्येय वाक्य “खेल से चरित्र निर्माण एवं चरित्र से राष्ट्र निर्माण” को भी रेखांकित किया।
खेल मैदान से विकसित होते हैं नेतृत्व और टीम भावना के गुण
डॉ. रमेश कुमार ने कहा कि खेलों का महत्व केवल शारीरिक क्षमता तक सीमित नहीं है। नियमित खेल गतिविधियों के माध्यम से बच्चों और युवाओं में अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, टीम भावना और आत्मविश्वास जैसे महत्वपूर्ण गुण विकसित होते हैं। इसके साथ ही खेलों के माध्यम से राष्ट्रभक्ति की भावना को भी मजबूती मिलती है।
उन्होंने खेलों को युवाओं के सर्वांगीण विकास का महत्वपूर्ण माध्यम बताते हुए अधिक से अधिक लोगों को खेल गतिविधियों से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। राष्ट्रीय खेल दिवस के आयोजन के माध्यम से भी बच्चों और युवाओं को नियमित खेल अभ्यास के प्रति प्रोत्साहित करने का संदेश दिया गया।
किला मैदान में फुटबॉल, बाल विकास केंद्र में खो-खो
राष्ट्रीय खेल दिवस के कार्यक्रम केवल दौड़ प्रतियोगिता तक सीमित नहीं रहे। कार्यक्रम के तहत किला मैदान में फुटबॉल प्रतियोगिता आयोजित की गई। वहीं बाल विकास केंद्र में खो-खो प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। हेरिटेज स्कूल में कबड्डी प्रतियोगिता भी कराई गई।
अलग-अलग स्थानों पर आयोजित इन प्रतियोगिताओं के माध्यम से पारंपरिक और आधुनिक दोनों तरह के खेलों को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया। आयोजन का उद्देश्य बच्चों और युवाओं को खेल गतिविधियों के प्रति आकर्षित करना तथा उन्हें नियमित रूप से खेल के मैदान से जोड़ने का संदेश देना रहा।
मेजर ध्यानचंद की उपलब्धियों को किया याद
राष्ट्रीय खेल दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए डॉ. रमेश कुमार ने मेजर ध्यानचंद के योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि मेजर ध्यानचंद भारतीय हॉकी के महानतम खिलाड़ियों में से एक और देश के गौरव थे। उनके असाधारण खेल कौशल के कारण उन्हें ‘हॉकी का जादूगर’ कहा जाता है।
मेजर ध्यानचंद ने 1928, 1932 और 1936 के ओलंपिक खेलों में भारतीय हॉकी टीम की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वर्ष 1936 के बर्लिन ओलंपिक में उनके शानदार प्रदर्शन ने भारत को स्वर्ण पदक दिलाने में अहम योगदान दिया।
खिलाड़ियों के लिए आज भी प्रेरणा हैं मेजर ध्यानचंद
मेजर ध्यानचंद की खेल प्रतिभा, राष्ट्रभक्ति और समर्पण आज भी देश के खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। राष्ट्रीय खेल दिवस उनके योगदान और भारतीय खेल जगत में उनके महत्वपूर्ण स्थान को याद करने का अवसर भी प्रदान करता है।
बक्सर में आयोजित प्रतियोगिताओं के दौरान भी खेलों के माध्यम से अनुशासन, आत्मविश्वास और राष्ट्र निर्माण की भावना को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। विभिन्न खेल गतिविधियों में बच्चों और युवाओं की भागीदारी ने आयोजन को उत्साहपूर्ण बना दिया।
आयोजन में इन लोगों की रही सक्रिय भूमिका
कार्यक्रम के सफल आयोजन में क्रीड़ा भारती भोजपुर विभाग के संयोजक डॉ. अरविंद सिंह, बक्सर जिला अध्यक्ष डॉ. प्रदीप पाठक, बाल विकास केंद्र के निदेशक सतीश त्रिपाठी, खेल शिक्षक मृत्युंजय राय और खेल प्रशिक्षक अनिकेत राय की सक्रिय भूमिका रही।
इनके साथ खेल प्रेमियों और आयोजन से जुड़े अन्य लोगों ने भी कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण सहयोग दिया। अलग-अलग खेल स्थलों पर प्रतियोगिताओं के आयोजन से जिले में राष्ट्रीय खेल दिवस का माहौल खेलमय रहा।
युवाओं को नियमित खेलों से जुड़ने का संदेश
राष्ट्रीय खेल दिवस पर आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं ने बक्सर के छात्र-छात्राओं और युवाओं में खेलों के प्रति उत्साह बढ़ाने का काम किया। 100 मीटर दौड़ से लेकर फुटबॉल, खो-खो और कबड्डी तक अलग-अलग प्रतियोगिताओं में भागीदारी ने बच्चों और युवाओं को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर दिया।
आयोजन के माध्यम से युवाओं को नियमित रूप से खेल गतिविधियों से जुड़ने और स्वस्थ एवं अनुशासित जीवन अपनाने का संदेश दिया गया। क्रीड़ा भारती की ओर से आयोजित इन गतिविधियों में खेल को शारीरिक विकास के साथ-साथ चरित्र निर्माण और सकारात्मक जीवनशैली से जोड़ने पर जोर दिया गया।
