
रांची। दुर्गा पूजा के पंडालों में आपने मंदिरों, महलों, ऐतिहासिक इमारतों और आकर्षक कलाकृतियों की झलक जरूर देखी होगी, लेकिन झारखंड की राजधानी रांची में इस बार एक ऐसा प्रयोग किया जा रहा है, जो आम पंडालों से बिल्कुल अलग है। यहां गोलगप्पे और झालमुड़ी जैसे लोकप्रिय चटपटे व्यंजन दुर्गा पूजा की सजावट की प्रेरणा बनेंगे। शुक्ला कॉलोनी, हिनू में तैयार हो रहे इस पंडाल में मां दुर्गा के दर्शन के साथ लोगों को एक अनोखी थीम देखने को मिलेगी। आयोजकों का मानना है कि यह प्रयोग बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक को आकर्षित कर सकता है।
आखिर गोलगप्पे और झालमुड़ी को ही क्यों चुना गया?
दुर्गा पूजा के दौरान पंडालों की सजावट लोगों के आकर्षण का बड़ा केंद्र होती है। हर पूजा समिति कोशिश करती है कि उसकी थीम दूसरों से अलग हो और श्रद्धालु उसे देखने जरूर पहुंचें। इसी सोच के साथ हिनू की शुक्ला कॉलोनी में गोलगप्पे और झालमुड़ी पर आधारित सजावट की योजना बनाई गई है। पंडाल के भीतर गोलगप्पों से प्रेरित सजावट को खास आकर्षण के रूप में तैयार किया जा रहा है।
इस थीम की दिलचस्प बात यह है कि इसमें रोजमर्रा के लोकप्रिय स्वाद को पूजा के उत्सव से जोड़ने की कोशिश की गई है। गोलगप्पे का खट्टा-मीठा और चटपटा स्वाद लोगों को खूब पसंद आता है, जबकि झालमुड़ी अपने मसालेदार जायके के लिए जानी जाती है। आयोजक इन स्वादों के जरिए लोगों को एक अलग अनुभव देना चाहते हैं, ताकि पंडाल की पहचान केवल उसकी सजावट तक सीमित न रहे, बल्कि उसके पीछे की सोच भी लोगों का ध्यान खींचे।
जगह बदली तो पूजा समिति ने तैयार किया नया आइडिया
आयोजन समिति के आयोजक कुंदन सिंह के मुताबिक, शुक्ला कॉलोनी, हिनू में हुई समिति की बैठक में इस बात पर चर्चा की गई कि जगह बदलने के बाद इस बार पंडाल को किस तरह खास बनाया जाए। समिति चाहती थी कि ऐसा विषय चुना जाए, जो आम लोगों से जुड़ा हो और देखने में भी अलग लगे।
इसी चर्चा के दौरान गोलगप्पे और झालमुड़ी की थीम पर पंडाल बनाने का विचार सामने आया। इसके बाद इसे तैयार करने और सजाने की योजना पर काम शुरू किया गया। समिति का उद्देश्य है कि मां दुर्गा के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को इस बार कुछ नया देखने को मिले। आयोजकों को उम्मीद है कि अनोखी थीम लोगों में उत्सुकता पैदा करेगी और पंडाल को देखने के लिए अधिक लोग पहुंचेंगे।
बंगाल के कारीगरों के हाथों आकार ले रहा पंडाल
पंडाल को आकर्षक रूप देने के लिए बंगाल के कारीगर भी तैयारी में जुटे हैं। दुर्गा पूजा और बंगाल की सांस्कृतिक परंपराओं के बीच गहरा संबंध रहा है। वहां पूजा के दौरान अलग-अलग विषयों पर आधारित पंडाल, कलात्मक सजावट और रचनात्मक प्रस्तुतियां लोगों का ध्यान खींचती हैं। रांची में इस बार भी बंगाल की कला से जुड़े कारीगर पंडाल को खास अंदाज देने में योगदान कर रहे हैं।
गोलगप्पे और झालमुड़ी की थीम को किस तरह सजावट में बदला जाएगा, इसे लेकर लोगों में उत्सुकता हो सकती है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, पंडाल में गोलगप्पों से जुड़ी सजावट विशेष आकर्षण होगी। अंतिम रूप सामने आने के बाद ही इसकी पूरी बनावट और सजावट का अंदाजा लगाया जा सकेगा।
झालमुड़ी के बहाने दिखेगी बंगाल की खाद्य संस्कृति
झालमुड़ी बंगाल के लोकप्रिय स्ट्रीट फूड में गिनी जाती है। मुरमुरे और मसालों से तैयार होने वाला यह चटपटा नाश्ता वहां की खाद्य संस्कृति का जाना-पहचाना हिस्सा है। दूसरी ओर, गोलगप्पे भी देश के कई हिस्सों में लोगों के पसंदीदा स्ट्रीट फूड में शामिल हैं। दोनों व्यंजनों को एक ही थीम में शामिल करके आयोजक लोगों के परिचित स्वादों को पूजा के माहौल से जोड़ रहे हैं।
हाल के दिनों में बंगाल के चुनावी माहौल के दौरान भी झालमुड़ी चर्चा में रही थी। रांची की दुर्गा पूजा में बंगाल की सांस्कृतिक झलक पहले से देखने को मिलती रही है। इस बार खाद्य संस्कृति को सजावट का आधार बनाकर उसी जुड़ाव को नए तरीके से पेश करने की कोशिश की जा रही है।
बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक को लुभाने की उम्मीद
आयोजन समिति के सदस्य शंभू को उम्मीद है कि गोलगप्पे और झालमुड़ी की थीम लोगों को पसंद आएगी। इन खाद्य पदार्थों से बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी परिचित हैं। यही वजह है कि समिति को लगता है कि पंडाल की सजावट अलग-अलग उम्र के लोगों के लिए दिलचस्प साबित हो सकती है।
दुर्गा पूजा के दौरान परिवार के लोग एक साथ पंडाल घूमने और मां दुर्गा के दर्शन करने निकलते हैं। ऐसे में धार्मिक आस्था के साथ कोई अनोखी सजावट देखने को मिले तो वह उनके लिए यादगार अनुभव बन सकती है। समिति की कोशिश है कि पंडाल में आने वाले लोग सजावट को देखें, उसकी थीम को समझें और इस नए प्रयोग को अपने अनुभव का हिस्सा बनाएं।
रांची की दुर्गा पूजा में इस बार अलग होगा आकर्षण
रांची में दुर्गा पूजा भव्य आयोजनों और आकर्षक पंडालों के लिए जानी जाती है। हर साल पूजा समितियां अपनी-अपनी थीम के जरिए श्रद्धालुओं को आकर्षित करने की कोशिश करती हैं। शुक्ला कॉलोनी, हिनू का यह पंडाल भी इसी परंपरा में एक नया प्रयोग है, जिसमें धार्मिक आयोजन के साथ लोकप्रिय खानपान को जोड़ने की योजना बनाई गई है।
अब लोगों की दिलचस्पी इस बात में होगी कि तैयार होने के बाद गोलगप्पे और झालमुड़ी की थीम वाला पंडाल कैसा नजर आता है और श्रद्धालुओं को कितना पसंद आता है। आयोजकों को भरोसा है कि यह अनोखा विचार बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक को अपनी ओर खींचेगा। मां दुर्गा के दर्शन, बंगाल की सांस्कृतिक झलक और चटपटे स्वाद से प्रेरित सजावट का यह मेल इस बार रांची की दुर्गा पूजा में चर्चा का विषय बन सकता है।
