अर्जुन कपूर की बहन और फिल्म निर्माता बोनी कपूर की बेटी अंशुला कपूर की शादी का जश्न शुरू हो चुका है। अंशुला और उनके मंगेतर रोहन ठक्कर की शादी की रस्मों की शुरुआत माता की चौकी से हुई, जिसमें पूरा कपूर परिवार शामिल हुआ। इस खास मौके पर अंशुला कपूर ने बेहद खूबसूरत गोल्डन लहंगा पहनकर सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। हालांकि, इस लहंगे की खूबसूरती सिर्फ इसके डिजाइन तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसके पीछे छिपी पारंपरिक भारतीय कारीगरी, सांस्कृतिक विरासत और 1,600 घंटे की मेहनत ने इसे और भी खास बना दिया।
ITRH का डिजाइनर लहंगा बना आकर्षण का केंद्र
माता की चौकी के लिए अंशुला कपूर ने फैशन लेबल ITRH का डिजाइन किया हुआ गोल्डन लहंगा चुना। इस आउटफिट को डिजाइनर रिद्धि बंसल ने तैयार किया, जबकि इसे सेलिब्रिटी स्टाइलिस्ट मोहित राय ने स्टाइल किया। इस लहंगे में भारतीय पारंपरिक कारीगरी और विरासत की खूबसूरत झलक देखने को मिली।
अंशुला ने इस मौके पर बनारसी सिल्क टिश्यू ब्रोकेड से बना गोल्डन लहंगा पहना था। आउटफिट में ITRH की सिग्नेचर जड़ाऊ डिटेलिंग के साथ बेहद बारीक हाथ की कढ़ाई की गई थी। लहंगे को घुंघरू के काम, जरदोजी की कढ़ाई, शीशों और पोलकी एलिमेंट्स से सजाया गया था। इन सभी डिटेल्स ने लहंगे को भारी बनाए बिना उसे एक शानदार टेक्सचर और रॉयल लुक दिया। क्लासिक गोल्डन टोन ने इस आउटफिट को एक टाइमलेस ब्राइडल अपील दी।
फुलकारी दुपट्टे ने बढ़ाई लुक की खूबसूरती, छिपा है गहरा सांस्कृतिक महत्व
अंशुला कपूर के इस पूरे लुक का सबसे खास हिस्सा उनका वाइब्रेंट फुलकारी दुपट्टा रहा। रंग-बिरंगे फुलकारी दुपट्टे ने गोल्डन लहंगे के साथ शानदार कंट्रास्ट बनाया और पूरे लुक को अलग पहचान दी। यह दुपट्टा सिर्फ फैशन का हिस्सा नहीं था, बल्कि पंजाबी संस्कृति और विरासत का प्रतीक भी था।
इवेंट की तस्वीरों के साथ साझा किए गए एक नोट में अंशुला कपूर ने बताया कि उन्होंने इस खास मौके पर फुलकारी दुपट्टा पहनना इसलिए चुना क्योंकि यह उनकी जड़ों और परंपराओं से जुड़ा हुआ है। उन्होंने लिखा कि इस मौके पर फुलकारी दुपट्टा पहनना मेरे लिए बेहद सार्थक था। पंजाबी परंपरा में यह विरासत, कारीगरी और पीढ़ियों से महिलाओं की दुआओं और प्रेम का प्रतीक माना जाता है।
पंजाबी परिवारों में फुलकारी केवल सजावटी कढ़ाई नहीं होती, बल्कि यह पीढ़ियों से चली आ रही एक सांस्कृतिक विरासत है। पारंपरिक रूप से महिलाएं इसे अपने हाथों से तैयार करती हैं और यह शादियों, पारिवारिक समारोहों तथा जीवन के महत्वपूर्ण अवसरों का अहम हिस्सा माना जाता है।
1,600 घंटे की मेहनत से तैयार हुआ लहंगा, हेरिटेज टेक्सटाइल्स को दिया गया खास महत्व
इस डिजाइनर आउटफिट की सबसे बड़ी खासियत इसे तैयार करने में लगा समय और बारीक कारीगरी है। डिजाइनर के अनुसार इस पूरे लहंगे को तैयार करने में करीब 1,600 घंटे का समय लगा। बनारसी टिश्यू ब्रोकेड बेस से लेकर हाथ की कढ़ाई, जड़ाऊ डिटेलिंग और सजावट तक हर हिस्से पर बेहद बारीकी से काम किया गया, ताकि आउटफिट में गहराई, टेक्सचर और खूबसूरत मूवमेंट दिखाई दे।
इस लुक को तैयार करते समय केवल आधुनिक ब्राइडल ट्रेंड्स पर ध्यान नहीं दिया गया, बल्कि भारतीय हेरिटेज टेक्सटाइल्स और पारंपरिक तकनीकों को प्राथमिकता दी गई। यही वजह है कि यह आउटफिट फैशन के साथ-साथ भारतीय शिल्पकला और सांस्कृतिक विरासत का भी बेहतरीन उदाहरण बनकर सामने आया।
अंशुला कपूर का यह लुक उस नए ट्रेंड को भी दर्शाता है, जिसमें आज की दुल्हनें अपनी शादी के कपड़ों में पारंपरिक कारीगरी, हेरिटेज टेक्सटाइल्स और अपनी सांस्कृतिक पहचान को शामिल करना पसंद कर रही हैं। बता दें कि अंशुला कपूर और रोहन ठक्कर की शादी 6 जुलाई को होने वाली है।

