erer | Source: ererनई दिल्ली। दिवाली से पहले यूपीआई (UPI) से भुगतान करने वाले करोड़ों लोगों और कारोबारियों के लिए एक अहम खबर सामने आई है। National Payments Corporation of India (NPCI) ने चुनिंदा दुकानदारों को किए जाने वाले यूपीआई भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) शुल्क लागू करने के फैसले को फिलहाल टाल दिया है। 13 अक्टूबर 2026 को जारी जानकारी के मुताबिक, यह शुल्क अब दिवाली के तुरंत बाद लागू किए जाने की तैयारी है। हालांकि, इसे लागू करने की नई तारीख अभी घोषित नहीं की गई है। पहले इस व्यवस्था को इसी सप्ताह गुरुवार से शुरू करने की तैयारी थी।

दिवाली से पहले क्यों रोकना पड़ा UPI पर शुल्क लगाने का फैसला?

त्योहारों के मौसम में बाजारों में खरीदारी बढ़ जाती है। कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक सामान, घरेलू जरूरतों और अन्य उत्पादों की खरीदारी के दौरान यूपीआई भुगतान का इस्तेमाल भी बड़े पैमाने पर होता है। ऐसे समय में डिजिटल भुगतान पर नया शुल्क लागू होने से कारोबारियों की लागत बढ़ने और उसका अप्रत्यक्ष असर ग्राहकों पर पड़ने की आशंका जताई गई थी। इसी वजह से मर्चेंट संगठनों, वित्तीय प्रौद्योगिकी कंपनियों और भुगतान सेवाएं देने वाली कंपनियों ने NPCI से फैसले को टालने की मांग की थी।

इन संगठनों का कहना था कि MDR की दरों और इसे लागू करने से जुड़े नियमों को लेकर अभी और स्पष्टता जरूरी है। इसके अलावा, भुगतान कंपनियों को अपने तकनीकी तंत्र में आवश्यक बदलाव करने के लिए भी समय चाहिए। कारोबारियों के बीच यह आशंका भी थी कि यदि डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त खर्च बढ़ता है तो कुछ दुकानदार यूपीआई के बजाय नकद भुगतान को प्राथमिकता देने लग सकते हैं। इन चिंताओं के बीच शुल्क लागू करने का फैसला दिवाली तक टाल दिया गया है।

दिवाली के बाद किस तारीख से लागू होगा नया MDR चार्ज?

NPCI के मुताबिक, चुनिंदा दुकानदारों को किए जाने वाले भुगतान पर MDR शुल्क दिवाली के तुरंत बाद लागू किया जा सकता है। हालांकि, इसकी शुरुआत किस दिन से होगी, इस संबंध में आधिकारिक तारीख की घोषणा नहीं की गई है। नई तारीख अलग से घोषित की जाएगी।

कुछ मीडिया रिपोर्टों में इसके नवंबर 2026 के दूसरे सप्ताह में लागू होने की संभावना जताई गई है। हालांकि, इसे अंतिम तारीख नहीं माना जाना चाहिए, क्योंकि NPCI की ओर से अभी इसकी पुष्टि नहीं की गई है। इसलिए दुकानदारों और ग्राहकों को नई व्यवस्था की वास्तविक शुरुआत के लिए आधिकारिक घोषणा का इंतजार करना होगा।

2,000/- से ज्यादा के UPI भुगतान पर कितना लगेगा चार्ज?

प्रस्तावित व्यवस्था के मुताबिक, चुनिंदा मर्चेंट श्रेणियों में ₹2,000 से अधिक के यूपीआई भुगतान पर 0.4 प्रतिशत MDR शुल्क लगाए जाने की बात कही गई है। यह शुल्क सभी प्रकार के यूपीआई लेनदेन पर लागू नहीं होगा। इसकी सीमा और लागू होने की शर्तें संबंधित व्यवस्था के अनुसार तय होंगी।

इसे एक उदाहरण से समझा जा सकता है। यदि किसी पात्र दुकान पर ₹10,000 का भुगतान किया जाता है और उस लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR दर लागू होती है, तो शुल्क की गणना ₹40 होगी। इसी तरह, ₹5,000 के भुगतान पर गणना के अनुसार ₹20 शुल्क बनता है। वहीं, ₹2,000 के भुगतान पर 0.4 प्रतिशत की गणना ₹8 होती है, लेकिन प्रस्ताव में शुल्क की सीमा ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा भुगतान से जुड़ी बताई गई है। इसलिए केवल गणितीय उदाहरण के आधार पर यह नहीं माना जाना चाहिए कि हर लेनदेन पर शुल्क लगेगा।

यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि प्रस्तावित MDR व्यवस्था चुनिंदा मर्चेंट भुगतानों के लिए है। इसे सामान्य यूपीआई भुगतान पर लागू होने वाले सार्वभौमिक शुल्क के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

Google Pay, PhonePe और Paytm यूजर्स को अपनी जेब से देने होंगे पैसे?

यूपीआई इस्तेमाल करने वाले लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या Google Pay, PhonePe और Paytm से भुगतान करने पर अब अतिरिक्त पैसे देने पड़ेंगे? उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, प्रस्तावित MDR शुल्क सीधे दुकानदारों से डिजिटल भुगतान स्वीकार करने और संसाधित करने के बदले लिया जाना है। इसलिए केवल इन ऐप के जरिए भुगतान करने के कारण ग्राहकों पर सीधे MDR शुल्क लगाने की बात नहीं कही गई है।

उदाहरण के लिए, यदि कोई ग्राहक किसी दुकान पर यूपीआई के माध्यम से भुगतान करता है, तो प्रस्तावित व्यवस्था में MDR का भुगतान व्यापारी पक्ष से संबंधित होगा। हालांकि, ग्राहकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि शुल्क से जुड़े अंतिम नियम और उनके पालन की शर्तें आधिकारिक दिशानिर्देशों से स्पष्ट होंगी।

MDR चार्ज ग्राहक देगा या दुकानदार उठाएगा खर्च?

MDR का मूल उद्देश्य डिजिटल भुगतान स्वीकार करने वाले व्यापारी से शुल्क लेना है। यह ग्राहक से सीधे वसूला जाने वाला सामान्य यूपीआई शुल्क नहीं है। लेकिन कारोबारियों की लागत बढ़ने पर यह चिंता बनी हुई है कि कुछ दुकानदार इसकी भरपाई के लिए ग्राहकों से अतिरिक्त रकम मांग सकते हैं।

इसी आशंका के मद्देनजर यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण होगा कि MDR का बोझ सीधे ग्राहकों पर नहीं डाला जाए। दी गई जानकारी के अनुसार, सरकार ने बैंकों से इस संबंध में ध्यान रखने को कहा है। हालांकि, शुल्क के वास्तविक क्रियान्वयन और नियमों के पालन की स्थिति आधिकारिक निर्देशों के आधार पर ही स्पष्ट होगी।

ग्राहकों के लिए जरूरी है कि वे किसी दुकान पर यूपीआई भुगतान करते समय दिखाई गई राशि की जांच करें। यदि कोई दुकानदार भुगतान के नाम पर अतिरिक्त शुल्क मांगता है, तो ग्राहक उससे शुल्क का आधार और लागू नियमों के बारे में जानकारी ले सकते हैं।

दोस्त या परिवार को UPI से पैसे भेजने पर भी लगेगा शुल्क?

नहीं, प्रस्तावित MDR व्यवस्था के तहत किसी दोस्त, रिश्तेदार या परिवार के सदस्य को व्यक्तिगत रूप से यूपीआई के जरिए पैसे भेजने पर यह शुल्क लागू नहीं होगा। यह प्रस्ताव चुनिंदा दुकानदारों को किए जाने वाले भुगतानों से संबंधित है। यानी सामान्य व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) यूपीआई हस्तांतरण पहले की तरह इस प्रस्तावित मर्चेंट शुल्क के दायरे से बाहर रहेगा।

इस अंतर को समझना जरूरी है, क्योंकि दुकानदार को सामान खरीदने के बदले भुगतान करना और किसी परिचित को निजी तौर पर पैसे भेजना अलग-अलग प्रकार के लेनदेन हैं। प्रस्तावित व्यवस्था का संबंध चुनिंदा व्यापारिक भुगतानों से है, न कि सभी यूपीआई हस्तांतरण से।

छोटे दुकानदारों और कारोबारियों पर क्या पड़ेगा असर?

MDR शुल्क लागू होने पर उन कारोबारियों की भुगतान लागत प्रभावित हो सकती है, जिनके लेनदेन इस व्यवस्था के दायरे में आएंगे। छोटे दुकानदारों के लिए यह समझना जरूरी होगा कि कौन-से भुगतान पर शुल्क लागू होगा, दर कितनी होगी और इसका हिसाब किस तरह किया जाएगा। वहीं, भुगतान सेवा देने वाली कंपनियों को अपने तकनीकी तंत्र और प्रक्रियाओं को नए नियमों के अनुरूप तैयार करना पड़ सकता है।

त्योहारों के दौरान कारोबारियों के लिए डिजिटल भुगतान की सुविधा और ग्राहकों के लिए आसान लेनदेन दोनों महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में शुल्क की दर, पात्र लेनदेन की श्रेणी और नियमों की स्पष्ट जानकारी व्यवस्था को लागू करने में अहम भूमिका निभाएगी। इसी वजह से संबंधित संगठनों ने नए शुल्क को लागू करने से पहले तैयारी और स्पष्टता के लिए अतिरिक्त समय मांगा था।

UPI यूजर्स अभी किन बातों का रखें ध्यान?

फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि MDR शुल्क को दिवाली के बाद लागू करने का फैसला किया गया है, लेकिन इसकी नई तारीख की आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है। प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत दर को भी हर यूपीआई भुगतान पर लागू मानना सही नहीं होगा, क्योंकि इसका संबंध चुनिंदा मर्चेंट भुगतानों से है।

ग्राहकों को सामान्य व्यक्तिगत यूपीआई हस्तांतरण और दुकानदारों को किए जाने वाले भुगतान के बीच अंतर समझना चाहिए। वहीं, व्यापारियों को अंतिम दिशा-निर्देश जारी होने के बाद यह जांचना होगा कि उनकी दुकान और भुगतान की श्रेणी नई व्यवस्था के दायरे में आती है या नहीं।

निष्कर्ष: दिवाली के बाद NPCI की घोषणा पर टिकी नजरें

दिवाली से पहले MDR शुल्क लागू करने के फैसले को टालने से कारोबारियों और भुगतान सेवा कंपनियों को तैयारी के लिए अतिरिक्त समय मिला है। प्रस्तावित व्यवस्था में चुनिंदा दुकानदारों को किए जाने वाले ₹2,000 से अधिक के यूपीआई भुगतानों पर 0.4 प्रतिशत शुल्क की बात कही गई है, लेकिन इसे लागू करने की नई तारीख अभी घोषित नहीं हुई है। व्यक्तिगत यूपीआई हस्तांतरण पर इस प्रस्ताव के तहत शुल्क नहीं लगेगा और ग्राहकों से सीधे MDR वसूलने की व्यवस्था भी नहीं बताई गई है। अब सभी की नजर NPCI की अगली आधिकारिक घोषणा पर रहेगी, जिससे शुल्क की शुरुआत और लागू होने वाले नियमों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।