नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध को लेकर विपक्ष ने अपना आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया है। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालने के बाद मंगलवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नई दिल्ली स्थित 5, सुनहरी बाग रोड आवास पर INDIA ब्लॉक के नेताओं की बैठक हुई।
चाय पर हुई इस बैठक में आंदोलन की आगे की रणनीति पर चर्चा की गई। बैठक के बाद विपक्षी नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर निशाना साधा। राहुल गांधी ने स्पष्ट कहा कि ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा उनके आंदोलन का मिशन है। वहीं, विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि अब वोट के अधिकार के साथ-साथ विरोध प्रदर्शन के लिए निर्धारित जगह भी छीनी जा रही है। नेताओं ने कहा कि लोकतंत्र और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए उनका आंदोलन जारी रहेगा।
राहुल गांधी बोले- देश में लोकतंत्र बर्बाद किया जा रहा
प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने कहा कि देश में अलग-अलग प्रदर्शन नहीं हो रहे हैं, बल्कि यह एक ही आंदोलन है, जो लोकतंत्र की रक्षा के उद्देश्य से चलाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में लोकतंत्र को बर्बाद किया जा रहा है और आम लोगों के अधिकार छीने जा रहे हैं। राहुल गांधी के मुताबिक, आंदोलन का उद्देश्य लोकतांत्रिक व्यवस्था को बचाना और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना है।
राहुल गांधी ने कहा कि यह आंदोलन एक मिशन के साथ आगे बढ़ रहा है और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा उनका मिशन है। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार देश के लोकतंत्र को नुकसान पहुंचा रहे हैं। हालांकि, ये विपक्षी नेताओं के आरोप हैं।
INDIA ब्लॉक की बैठक में आंदोलन को आगे बढ़ाने पर मंथन
राहुल गांधी के आवास पर हुई बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी और शशि थरूर समेत कई प्रमुख नेता शामिल हुए। बैठक में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता तेजस्वी यादव और मनोज झा, तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा, झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की महुआ माजी और समाजवादी पार्टी के नेता भी पहुंचे।
बैठक में CPI(M) के एमए बेबी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के डी. राजा और पी. संतोश कुमार, CPI-ML के दीपांकर भट्टाचार्य तथा समाजवादी पार्टी के हरेंद्र मलिक, आनंद भदौरिया और मोहिबुल्लाह नदवी सहित कई नेताओं ने हिस्सा लिया। सुप्रिया सुले भी बैठक में शामिल हुईं। विपक्षी दलों के नेताओं ने SIR के विरोध और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आंदोलन को आगे बढ़ाने की रणनीति पर विचार किया।
बैठक में शामिल समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन ने कहा कि यह पूरे देश से जुड़ा मुद्दा है और विपक्षी दल एक साथ हैं। उन्होंने कहा कि CJP हो या आम आदमी पार्टी, सभी एक ही सत्तावादी सरकार के खिलाफ लड़ रहे हैं। उनके बयान से विपक्षी दलों के बीच इस मुद्दे पर साझा रणनीति बनाने की कोशिश का संकेत मिला।
तेजस्वी यादव का आरोप- ज्ञानेश कुमार ने लोकतंत्र को धोखा दिया
RJD नेता तेजस्वी यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि विपक्ष एकजुट है और लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई जारी रखेगा। उन्होंने कहा, “हम सब लोग एकजुट हैं। जो कुर्बानी देनी होगी, वह सब मिलकर देंगे। देश गांधी जी का देश है। जो भी संवैधानिक संस्थाओं को हाईजैक करने की कोशिश करेगा, उसके खिलाफ हम लड़ते रहेंगे।”
तेजस्वी यादव ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने लोकतंत्र को धोखा दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार ने कठपुतली की तरह काम किया है और उन्हें इसकी सजा जरूर मिलेगी। तेजस्वी ने जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शनों का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां पहले भी प्रदर्शन होते रहे हैं और आगे भी जारी रहेंगे।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रदर्शन स्थल को दिल्ली की सीमा की ओर स्थानांतरित करना सरकार के डर को दर्शाता है। विपक्ष का कहना है कि विरोध प्रदर्शन के लिए जगह बदलने के बावजूद आंदोलन को रोका नहीं जा सकता। नेताओं ने दोहराया कि वे चुनाव प्रक्रिया और मतदाताओं के अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाते रहेंगे।
प्रशांत भूषण बोले- आंदोलन को कुचलने की कोशिश हुई
वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि दिल्ली में कथित वोट चोरी और SIR के खिलाफ आंदोलन 2 अक्टूबर से शुरू किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने आंदोलन को कुचलने की कोशिश की। भूषण के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया गया और आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया।
उन्होंने कहा कि विरोध प्रदर्शन करना संवैधानिक अधिकार है और आंदोलन को रोका नहीं जा सकता। प्रशांत भूषण ने यह भी कहा कि आने वाले समय में इस आंदोलन में कई अन्य संगठन शामिल होंगे। उनके अनुसार, किसान संगठनों, नागरिक समाज के समूहों और ट्रेड यूनियनों को भी आंदोलन से जोड़ा जाएगा।
प्रशांत भूषण के बयान से संकेत मिलता है कि विपक्ष और उससे जुड़े संगठन इस मुद्दे को केवल राजनीतिक दलों तक सीमित नहीं रखना चाहते, बल्कि व्यापक स्तर पर विरोध दर्ज कराने की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि, आंदोलन में शामिल होने वाले संगठनों की विस्तृत सूची और आगे के कार्यक्रमों की जानकारी इस दौरान सामने नहीं आई।
6 से 12 अक्टूबर तक प्रदर्शन, सुप्रीम कोर्ट तक निकाला गया मार्च
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और SIR के विरोध में विपक्षी दलों ने 6, 7, 8, 9 और 12 अक्टूबर को प्रदर्शन किए। सोमवार को विपक्षी नेताओं ने बाराखंभा रोड से सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकाला था। इस मार्च में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी समेत 11 विपक्षी दलों के नेता शामिल हुए थे।
विपक्ष ने SIR के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दायर की है। इस कदम के जरिए विपक्ष ने चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची के पुनरीक्षण से जुड़े अपने विरोध को न्यायिक मंच पर भी उठाया है। एक ओर विपक्षी दल सड़क पर प्रदर्शन कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अदालत में याचिका के माध्यम से अपनी आपत्तियां रख रहे हैं।
विपक्षी नेताओं का कहना है कि आंदोलन का उद्देश्य मतदाताओं के अधिकारों और लोकतांत्रिक व्यवस्था की रक्षा करना है। वहीं, मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर भी विपक्ष ने अपना रुख स्पष्ट रखा है। राहुल गांधी के आवास पर हुई बैठक के बाद नेताओं के बयानों से साफ है कि वे इस मुद्दे पर पीछे हटने के बजाय आंदोलन को आगे बढ़ाने की तैयारी में हैं।
धरनास्थल को लेकर भी बढ़ा विवाद
विपक्षी नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि अब वोट के साथ-साथ धरना देने की जगह भी छीनी जा रही है। तेजस्वी यादव ने कहा कि जंतर-मंतर पर लंबे समय से प्रदर्शन होते रहे हैं, लेकिन प्रदर्शन स्थल को दिल्ली के बॉर्डर की ओर स्थानांतरित करना सरकार के डर को दिखाता है। विपक्ष ने इसे विरोध की आवाज सीमित करने की कोशिश के रूप में पेश किया।
इस मुद्दे ने आंदोलन को एक नया राजनीतिक आयाम दे दिया है। विपक्ष अब SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग के साथ-साथ विरोध प्रदर्शन के अधिकार और धरनास्थल को लेकर भी सवाल उठा रहा है। नेताओं का कहना है कि लोकतंत्र में असहमति दर्ज कराना और शांतिपूर्ण विरोध करना महत्वपूर्ण अधिकार हैं।
विपक्ष का संदेश- आंदोलन जारी रहेगा
INDIA ब्लॉक की बैठक और उसके बाद हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस का प्रमुख संदेश यही रहा कि विपक्ष इस मुद्दे पर एकजुट रहकर संघर्ष जारी रखने की तैयारी में है। राहुल गांधी ने आंदोलन को लोकतंत्र बचाने का मिशन बताया, जबकि तेजस्वी यादव ने संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता और जवाबदेही का सवाल उठाया। प्रशांत भूषण ने आंदोलन में किसान संगठनों, नागरिक समाज और ट्रेड यूनियनों की भागीदारी बढ़ने की बात कही।
फिलहाल विपक्ष की प्रमुख मांगों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा और SIR का विरोध शामिल है। संसद से बाहर सड़क पर प्रदर्शन, विभिन्न विपक्षी दलों की संयुक्त बैठक और सुप्रीम कोर्ट में याचिका के जरिए इस मुद्दे को आगे बढ़ाया जा रहा है। विपक्षी नेताओं ने साफ कर दिया है कि प्रदर्शन रोकने या धरनास्थल बदलने से उनकी रणनीति समाप्त नहीं होगी।
