ere | Source: ererअहमदाबाद। गुजरात के स्थानीय निकाय चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए तीन शहरी निकायों में अपनी सत्ता बरकरार रखी है। विपक्षी दलों की घेराबंदी और राजनीतिक विरोध के बीच भाजपा के लिए ये नतीजे बड़ी राहत के रूप में सामने आए हैं। मंगलवार को घोषित चुनाव परिणामों में गांधीनगर नगर निगम, थारा नगरपालिका और ओखा नगरपालिका में भाजपा ने जीत दर्ज की। गांधीनगर नगर निगम के चुनाव में भाजपा ने 44 में से 38 सीटों पर कब्जा जमाया, जबकि कांग्रेस पांच सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही। एक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार ने जीत हासिल की। आम आदमी पार्टी (आप) इस बार अपना खाता भी नहीं खोल सकी। इन नतीजों ने गुजरात में भाजपा की राजनीतिक स्थिति और शहरी निकायों में उसके प्रभाव को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।

गांधीनगर नगर निगम में भाजपा की बड़ी जीत, 44 में से 38 सीटें हासिल

गुजरात की राजधानी गांधीनगर में हुए नगर निगम चुनाव के नतीजों में भाजपा ने स्पष्ट बढ़त के साथ जीत दर्ज की। मंगलवार को घोषित परिणामों के अनुसार, पार्टी ने कुल 44 सीटों में से 38 पर विजय प्राप्त की। कांग्रेस पांच सीटें जीतकर दूसरे स्थान पर रही, जबकि एक सीट निर्दलीय प्रत्याशी के खाते में गई। आम आदमी पार्टी को एक भी सीट नहीं मिली।

गांधीनगर नगर निगम के चुनाव परिणाम भाजपा के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि पिछले चुनाव में भी पार्टी ने यहां बहुमत हासिल किया था। अक्टूबर 2021 में हुए पिछले नगर निगम चुनाव में भाजपा ने 44 में से 41 सीटें जीती थीं। उस समय कांग्रेस को दो और आम आदमी पार्टी को एक सीट मिली थी। इस बार भाजपा की सीटों की संख्या पिछले चुनाव के मुकाबले तीन कम रही, लेकिन पार्टी ने नगर निगम में अपना स्पष्ट बहुमत बरकरार रखा।

दूसरी ओर, कांग्रेस को पांच सीटों के साथ विपक्ष में जगह मिली, जबकि पिछले चुनाव में एक सीट जीतने वाली आम आदमी पार्टी इस बार कोई सीट हासिल नहीं कर सकी। गांधीनगर के इन परिणामों से तीनों प्रमुख राजनीतिक दलों के प्रदर्शन की तुलना भी सामने आई है।

थारा नगरपालिका में भी भाजपा का दबदबा, 24 में से 19 सीटों पर जीत

गांधीनगर के अलावा बनासकांठा जिले की थारा नगरपालिका में भी भाजपा ने अच्छा प्रदर्शन किया। यहां कुल 24 सीटों में से पार्टी ने 19 सीटों पर जीत दर्ज की। कांग्रेस को शेष पांच सीटें मिलीं। इस परिणाम के साथ भाजपा ने थारा नगरपालिका में भी अपनी सत्ता बरकरार रखी।

थारा के चुनाव परिणामों में भाजपा ने कांग्रेस के मुकाबले स्पष्ट बढ़त हासिल की। कांग्रेस को पांच सीटें मिलने से वह नगरपालिका में विपक्ष की भूमिका में रहेगी। तीनों निकायों में भाजपा के प्रदर्शन को देखते हुए पार्टी के लिए यह चुनावी परिणाम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

ओखा नगरपालिका में भाजपा की बड़ी सफलता, कुल 36 में से 33 सीटें

देवभूमि द्वारका जिले की ओखा नगरपालिका में भी भाजपा ने शानदार जीत हासिल की। जिन 32 सीटों के लिए मतदान हुआ, उनमें से भाजपा ने 29 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस को तीन सीटें मिलीं। इसके अलावा चार सीटों पर भाजपा के उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए थे, क्योंकि इन सीटों पर चुनाव मैदान में केवल भाजपा के उम्मीदवार ही बचे थे।

इन चार निर्विरोध सीटों को मिलाकर ओखा नगरपालिका की कुल 36 सीटों में भाजपा ने 33 सीटें अपने नाम कीं। इस तरह पार्टी ने यहां भी अपना मजबूत प्रदर्शन दोहराया और नगरपालिका पर नियंत्रण बनाए रखा। कांग्रेस को कुल तीन सीटों से संतोष करना पड़ा।

ओखा के परिणाम यह भी बताते हैं कि भाजपा ने केवल गांधीनगर में ही नहीं, बल्कि अन्य शहरी निकायों में भी अपनी स्थिति मजबूत बनाए रखी। थारा और ओखा में जीत के साथ पार्टी ने तीनों निकायों में अपना कब्जा बरकरार रखा।

तीनों निकायों में सत्ता बरकरार, मंगलवार सुबह शुरू हुई मतगणना

गांधीनगर नगर निगम, थारा नगरपालिका और ओखा नगरपालिका के लिए रविवार को मतदान हुआ था। मंगलवार सुबह नौ बजे तीनों शहरी निकायों में मतगणना शुरू हुई। इसके बाद घोषित परिणामों में भाजपा ने तीनों निकायों में जीत हासिल की।

गांधीनगर में भाजपा को 38 सीटें मिलीं, जबकि थारा में उसने 19 और ओखा में निर्विरोध चुने गए उम्मीदवारों समेत कुल 33 सीटें अपने नाम कीं। कांग्रेस को तीनों निकायों में भाजपा के मुकाबले कम सीटें मिलीं। वहीं, गांधीनगर में आम आदमी पार्टी का खाता नहीं खुलना भी इन चुनावों का महत्वपूर्ण पहलू रहा।

इन नतीजों के साथ भाजपा ने गुजरात के इन तीनों शहरी स्थानीय निकायों में अपना राजनीतिक नियंत्रण बनाए रखा है। पार्टी के लिए यह परिणाम स्थानीय स्तर पर संगठनात्मक मजबूती और मतदाताओं के बीच समर्थन के लिहाज से अहम माने जा रहे हैं।

कॉकरोच जनता पार्टी और कांग्रेस की घेराबंदी के बीच भाजपा को राहत

इन चुनाव परिणामों को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा और उसकी सरकार को विभिन्न मुद्दों पर विपक्षी दलों की आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और कांग्रेस की अगुआई में विपक्षी दलों की ओर से उठाए जा रहे मुद्दों के बीच गुजरात से भाजपा के लिए सकारात्मक चुनावी परिणाम सामने आए हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, नीट परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) जैसे मुद्दों पर विपक्ष भाजपा सरकार को घेर रहा है। ऐसे राजनीतिक माहौल में गुजरात के तीन शहरी निकायों में मिली जीत से भाजपा कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ सकता है।

हालांकि, स्थानीय निकाय चुनाव के नतीजों को सीधे राष्ट्रीय राजनीति या विधानसभा चुनाव के परिणामों का संकेत मानना उचित नहीं होगा। फिर भी, इन चुनावों में जीत से भाजपा को अपने संगठन और शहरी क्षेत्रों में राजनीतिक समर्थन का आकलन करने का अवसर मिला है।

आगामी विधानसभा चुनाव के लिहाज से क्यों अहम हैं ये नतीजे?

गुजरात भाजपा का प्रमुख राजनीतिक आधार रहा है। ऐसे में राज्य के शहरी निकायों में पार्टी की जीत को राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। गांधीनगर, थारा और ओखा में सत्ता बरकरार रखने से पार्टी को स्थानीय स्तर पर अपनी स्थिति मजबूत बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

गांधीनगर में भाजपा ने बहुमत के साथ जीत हासिल की, जबकि ओखा में कुल 36 में से 33 सीटें जीतकर बड़ी बढ़त दर्ज की। थारा में भी 24 में से 19 सीटें भाजपा के खाते में गईं। इन परिणामों से तीनों निकायों में पार्टी का प्रदर्शन स्पष्ट रूप से सामने आया है।

आगामी विधानसभा चुनावों के संदर्भ में इन नतीजों को भाजपा के लिए उत्साह बढ़ाने वाला माना जा सकता है। वहीं, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के लिए भी यह परिणाम अपने संगठन, चुनावी रणनीति और स्थानीय स्तर पर जनसमर्थन की समीक्षा करने का अवसर हो सकते हैं।

कांग्रेस को सीमित सफलता, गांधीनगर में AAP पूरी तरह खाली हाथ

तीनों निकायों के परिणामों में कांग्रेस दूसरे स्थान पर रही, लेकिन वह भाजपा को चुनौती देने में सफल नहीं हो सकी। गांधीनगर नगर निगम में कांग्रेस ने पांच सीटें जीतीं। थारा नगरपालिका में भी उसे पांच सीटें मिलीं, जबकि ओखा नगरपालिका में पार्टी तीन सीटों पर जीत दर्ज कर सकी।

आम आदमी पार्टी के लिए गांधीनगर का परिणाम विशेष रूप से निराशाजनक रहा। पिछले नगर निगम चुनाव में एक सीट जीतने वाली पार्टी इस बार कोई सीट हासिल नहीं कर सकी। इससे गांधीनगर में पार्टी के पिछले प्रदर्शन की तुलना में गिरावट सामने आई है।